
नईदुनिया प्रतिनिधि, इंदौर। भागीरथपुरा में दूषित पानी अब तक 20 जिंदगियां लील चुका है। रहवासी पीने के पानी के लिए पूरी तरह से टैंकरों पर आश्रित हैं। ड्रेनेज और पानी की लाइनों के सुधार के नाम पर निगम ने जगह-जगह सड़कें खोद दी हैं। काम की गति इतनी सुस्त है कि इस बात का अनुमान लगा पाना कि यह कब पूरा होगा बहुत मुश्किल है। विडंबना यह कि महीनों से दूषित पानी का दंश झेल रहे भागीरथपुरा में इतने भयावह हादसे के बावजूद पेयजल लाइन बदलने का काम जोर नहीं पकड़ पा रहा है।
50 हजार से ज्यादा जनसंख्या वाले इस क्षेत्र का एक बड़ा हिस्सा आज भी पुरानी, जर्जर और टूटी-फूटी लाइनों के भरोसे है। लाइन बदलने का जो काम चल रहा है उसमें भी गंभीरता दिखाई नहीं दे रही। बुधवार को ट्रायल के दौरान ही लाइन फूट गई थी। इधर भागीरथपुरा में जीवन तेजी से पटरी पर आने लगा है। उल्टी-दस्त के मरीजों की संख्या में भी कमी आ रही है। इधर जिला न्यायालय में एक परिवाद दायर हुआ है। इसमें भागीरथपुरा मामले में जिम्मेदार अधिकारियों पर गैर इरादतन हत्या की धारा में केस दर्ज करने की मांग की गई है।
क्षेत्र में 25 किमी लंबी जल वितरण लाइन बिछी हुई है। यह लाइन चार दशक से ज्यादा पुरानी है। नगर निगम ने वर्षों पहले इस लाइन को बदलने की योजना तैयार की थी, लेकिन काम ही शुरू नहीं किया। करीब चार वर्ष पहले निगम ने क्षेत्र की 14 किमी लंबी लाइन को बदलने के लिए तीन पैकेज में टेंडर जारी किए थे। टेंडर प्रक्रिया पूरी होते-होते इतना समय लग गया कि अब तक पहले पैकेज का काम ही चल रहा है। निगम के अधिकारियों के अनुसार पहले पैकेज का 80 प्रतिशत काम पूरा हो गया है। लगभग पांच किमी लाइन बदली जा चुकी है। दूसरे और तीसरे पैकेज का काम तो अब तक शुरू ही नहीं हुआ। शेष 11 किमी वितरण लाइन अमृत 2.0 प्रोजेक्ट के तहत बदली जाना है।
दूषित पानी कांड को एक पखवाड़ा होने को आया है, लेकिन निगम के जिम्मेदार अब तक यह पता नहीं लगा सके कि किस लीकेज की वजह से दूषित पानी लोगों के घरों तक पहुंचा और इतने बड़े हादसे की वजह बना। दावा भले ही किया जा रहा है कि पुलिस चौकी के पास बने शौचालय का लीकेज ही हादसे की वजह है, लेकिन यह बात लोगों के गले नहीं उतर रही। गुरुवार को भी क्षेत्र में जल वितरण टैंकरों के भरोसे रहा। नगर निगम के 30 से ज्यादा टैंकर लगातार घूम रहे हैं। रहवासियों का कहना है कि गुरुवार को जो पानी बांटा गया वह अन्य दिनों के मुकाबले साफ था। हालांकि नागरिक अब भी इस पानी को पीने से परहेज कर रहे हैं। स्वास्थ्य विभाग की टीम भी क्षेत्र में लगातार ओआरएस और क्लोरिनेट वितरित कर रही है।
जिला न्यायालय में पेश हुए परिवाद पर कोर्ट ने बाणगंगा पुलिस को जांच कर प्रतिवेदन प्रस्तुत करने को कहा है। भागीरथपुरा दूषित पानी कांड में वर्तमान कलेक्टर और तत्कालीन निगमायुक्त शिवम वर्मा, पूर्व निगमायुक्त दिलीप कुमार यादव, निलंबित अपर आयुक्त रोहित सिसोनिया और निलंबित कार्यपालन यंत्री संजीव श्रीवास्तव के विरुद्ध गैर इरादतन हत्या की धारा (बीएनएस की धारा 105, 106, 125, 127) में एफआइआर दर्ज करने की मांग करते हुए परिवाद दायर हुआ है। कोर्ट ने मामले में सुनवाई करते हुए बाणगंगा पुलिस से जांच कर 24 जनवरी को प्रतिवेदन प्रस्तुत करने के लिए कहा है।
यह परिवाद भागीरथपुरा के मोहता नगर निवासी रामू रूपसिंह ने एडवोकेट दिलीप नागर के माध्यम से प्रस्तुत किया है। परिवाद में कहा है कि परिवादी ने इस संबंध में पुलिस थाने में शिकायत की थी लेकिन कुछ नहीं हुआ। परिवादी पिछले तीन वर्ष से सीएम हेल्पलाइन और मेयर हेल्पलाइन पर दूषित पानी की शिकायत कर रहे थे, लेकिन किसी ने ध्यान नहीं दिया। परिवाद में यह भी कहा है कि 24 नवंबर 2024 को इस संबंध में ठहराव-प्रस्ताव हुआ था। आवश्यक कार्रवाई के लिए निविदा समिति को भेजा जाने वाला प्रपत्र 30 जुलाई 2025 को भेजा गया। समय पर टेंडर प्रक्रिया पूरी नहीं करते हुए निगम के अधिकारियों ने घोर लापरवाही बरती और जानबूझकर दुर्भावनापूर्वक काम किया। पदेन अधिकारी अपने कर्तव्यों का निर्वहन समय रहते करते तो हादसे को रोका जा सकता था और दूषित पानी से मौतें नहीं होतीं।
यह भी पढ़ें- भोपाल में अब 'नो कतार, सीधे उपचार'... घर बैठे बुक करें सरकारी अस्पतालों का अपॉइंटमेंट, टोल-फ्री नंबर जारी