
नईदुनिया प्रतिनिधि, इंदौर। महात्मा गांधी मेडिकल कॉलेज के बायज हॉस्टल में बिना अनुमति होने वाले आयोजन और भंडारे अब विवाद की वजह बनने लगे हैं। गणेश चतुर्थी पर मेडिकल हॉस्टल के ब्लॉक नंबर 6 में हुए आयोजन में जूनियर छात्रों को प्रसाद और भंडारा खाने के लिए मजबूर किए जाने का मामला सामने आया है।
घटना से आहत छात्रों ने नेशनल मेडिकल कमीशन (एनएमसी) से रैगिंग की शिकायत की है। नईदुनिया की पड़ताल में सामने आया कि प्रसाद और भंडारा खिलाने के लिए जूनियर छात्रों को नींद से उठाकर हॉस्टल में बुलाने और उन पर दबाव बनाने की शिकायत एंटी रैगिंग कमेटी के सामने भी की गई। वहीं, सीनियर छात्रों ने भी घटनाओं को स्वीकार किया, लेकिन इसे रैगिंग नहीं बताते हुए आयोजन में जूनियर छात्रों को शामिल करने का प्रयास बताया।
गणेशोत्सव के दौरान 21 सितंबर की रात मेडिकल छात्रावास के ब्लाक नंबर 6 में भजन संध्या हुई। यह देर रात तक चली। आयोजन के लिए बनाया गया हलवे का प्रसाद काफी मात्रा में बच गया था। इसके बाद दो सीनियर छात्र प्रसाद जूनियर छात्रों को खिलाने के लिए ब्लाक नंबर 2 में पहुंचे, जहां एमबीबीएस प्रथम वर्ष के छात्र सो रहे थे।
गार्ड के मना करने के बावजूद छात्रों ने हॉस्टल का गेट खुलवाया। अंदर जाकर सो रहे करीब 50 छात्रों को कमरों से बाहर निकाला और सभी को लेकर ब्लॉक 6 पहुंचे, जहां उन्हें प्रसाद बांटा गया। इसके बाद जूनियर छात्र हलवे का प्रसाद लेकर वापस कमरों में आ गए। जिन छात्रों ने रात होने के कारण प्रसाद खाने से मना किया, उन्हें सीनियर छात्रों ने जबरदस्ती हलवा खिलाया।
मेडिकल छात्रावास के ब्लाक नंबर 6 में 23 सितंबर को दिन में भंडारे का आयोजन किया गया। भंडारे का भोजन तैयार करने के लिए छात्रावास की मेस में खाना बनाने वाले कर्मचारियों से काम लिया गया। इस वजह से उस दिन मेस स्टाफ ने छात्रों का टिफिन बनाकर कॉलेज नहीं भेजा। प्री फाइनल ईयर के छात्रों ने कालेज से प्रथम वर्ष के छात्रों को भंडारे में आकर भोजन करने के लिए कहा। टिफिन नहीं पहुंचने के कारण छात्रों को मजबूरी में हॉस्टल आकर भंडारे में भोजन करना पड़ा।
छात्रों ने आपत्ति लेते हुए कहा कि जब उन्होंने मेस का पैसा दिया है तो फिर भंडारे का भोजन क्यों करें। जूनियर छात्रों के विरोध करने पर सीनियर छात्र उन्हें ब्लाक 6 के कमरे में ले गए और मोबाइल व स्मार्ट वाच बाहर रखवा दी। कमरे में सीनियर छात्रों ने जूनियरों को धमकाया और बताया कि सीनियर से किस तरह बात करनी है। उन्हें कहा गया कि शर्ट का तीसरा बटन देखना है और सिर नीचे रखना है। छात्रावास में रहने के लिए सीनियर के बताए नियम-कायदों का पालन करना होगा।
प्रसाद और भंडारा खिलाने की दोनों घटनाओं से आहत छात्रों ने नेशनल मेडिकल कमीशन (एनएमसी) को शिकायत की। इसमें सीनियर छात्रों द्वारा रैगिंग किए जाने का आरोप लगाया गया। एनएमसी ने मामले पर संज्ञान लेते हुए 27 सितंबर को मेडिकल कालेज प्रबंधन को ईमेल कर 24 घंटे में घटना को लेकर जवाब मांगा। रविवार होने के बावजूद कॉलेज प्रबंधन ने कमेटी गठित कर दी।
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मेडिकल कॉलेज की एंटी रैगिंग कमेटी ने 28 सितंबर को ब्लॉक 2 के जूनियर और 29 सितंबर को ब्लाक 6 के सीनियर छात्रों के बयान लिए। जूनियर छात्रों ने भजन संध्या की रात हॉस्टल से उठाकर हलवा खिलाने और दो दिन बाद भंडारे का भोजन जबरदस्ती खिलाने की बात कही। वहीं, सीनियर छात्रों ने घटनाओं को स्वीकार किया, लेकिन इसे जूनियर छात्रों को आयोजन में शामिल करने का प्रयास बताया।
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छात्रावास में गणेशोत्सव चल रहा था और वहां भंडारा था, तो सभी जूनियर छात्रों को भंडारे में शामिल होने के लिए सीनियर छात्र बुलाने गए थे। छात्र गलत समझे और शिकायत कर दी। – डॉ. अरविंद घनघोरिया, डीन, एमजीएम कालेज