
नईदुनिया प्रतिनिधि, भोपाल। राजधानी के लोगों को पेयजल के तौर पर भेजे जा रहे पानी में मल-मूत्र में मिलने वाला बैक्टीरिया तैर रहा है। नगर निगम की खुद की जांच में खानूगांव और ईदगाह हिल्स इलाके से लिए गए चार नमूनों में ई-कोलाई बैक्टीरिया की पुष्टि हुई है। यह वह बैक्टीरिया है, जिसने इंदौर में 20 लोगों की जान ली है। स्थानीय लोगों का कहना है कि उनके इलाके में इससे पहले पेयजल की गुणवत्ता की जांच शायद ही कभी कराई गई हो। नगर निगम इससे जुड़ी उनकी शिकायतों की भी अनदेखी करता है।
खानूगांव के जिस कुएं से निचली बस्तियों में पेयजल की आपूर्ति हो रही है, उसमें 10-15 दिनों से सीवर का पानी मिल रहा है। यह पानी इतना खतरनाक है कि पीने का छोड़िए नहाने से भी गंभीर स्वास्थ्य संकट पैदा कर सकता है। स्थानीय नागरिक वसीम खान ने बताया कि उन्होंने एक दिन कुएं के पानी से अपनी बच्ची को नहला दिया था। उसके बाद से उसकी तबीयत खराब है शरीर में फोड़े हो गए हैं। अन्य रहवासियों ने बताया कि 50 साल पुराना कुआं है। खानूगांव के निचले इलाकों में इसी से पानी की सप्लाई निगम करता है। खानूगांव में नर्मदा की पाइपलाइन पहुंची है, लेकिन निचली बस्तियों तक इसका पानी नहीं पहुंचता। ऐसे में पुराने कुएं से पानी वहां भेजा जाता है।
निगम ने कुछ समय पहले एक उसके पास ही एक सीवेज लाइन डाली थी, जो 10-15 दिन पहले फूट गई। रहवासियों ने शिकायत की, लेकिन कोई सुनवाई नहीं हुई। अखबार में छपा और इंटरनेट मीडिया में यह बात आई तो नगर निगम का अमला पहुंचा। बुधवार को वहां पानी की जांच हुई जिसमें ई-कोलाई बैक्टीरिया की पुष्टि हुई। स्थानीय रहवासी रूबीना खान ने बताया कि जब से कुएं के पानी से बदबू आ रही थी, उसी दिन से कुएं का पानी छोड़ दिया। कुछ दिनों तक निस्तारी के लिए उसका इस्तेमाल किया, लेकिन अब बदबू बढ़ने लगी तो उसे पूरी तरह छोड़ दिया। आसपास के सभी लोग पीने का पानी खरीदकर मंगा रहे हैं। निस्तार के लिए पानी कुप्पियों में ढोकर लाया जा रहा है।
नगर निगम के हाउसिंग फॉर ऑल के तहत ईदगाह हिल्स में विकसित बाजपेयी नगर बदहाली की गिरफ्त में है। यहां की करीब 15 हजार आबादी पिछले चार साल से दूषित पानी पी रही है। पानी की लाइन सीवेज में डूबी हुई है। हर महीने शिकायतें करते हैं, लेकिन सुनवाई नहीं होती थी। इंदौर कांड के बाद यहां पहली बार पानी की जांच हुई तो ई-कोलाई बैक्टीरिया मिला। खानूगांव निवासी अब्दुल आहत के अनुसार कुएं के पास से पंप हाउस ले जाने के लिए सीवेज लाइन डाली गई थी। वह टूट गई है उसी की गंदगी कुएं में मिल रही थी, जिससे कुएं का पानी दूषित हुआ है।
मोहम्मद यूसुफ और असद खान ने बताया कि शिकायत करते हैं कि पानी गंदा आ रहा है, लेकिन सुनवाई नहीं होती। निगम के अधिकारी देखने तक नहीं आते थे। बाजपेयी नगर के शहजाद खान और मुश्ताक खान का कहना है कि पाइप लाइन सीवेज की गंदगी में डूबी हुई है, 15 हजार आबादी पिछले चार सालों से दूषित पानी पी रही है। इंदौर कांड के बाद नगर निगम का अमला प्रत्येक दिन 200 से अधिक नमूनों की जांच कर रहा है, लेकिन इसमें भी केवल खानापूर्ति हो रही है। केवल पानी की गुणवत्ता को रंग, गंध, स्वाद, क्लोरीन और बैक्टीरिया की मौजूदगी के आधार पर मापा जा रहा है।
आर्सेनिक, लेड, फ्लोराइड, पीएच, टीडीएस, नाइट्रेट और जहरीले रसायनों की जांच ही नहीं हो रही है। इन पैमानों की जांच भारत मानक ब्यूरो ने नियत किए हैं। पेयजल आम लोगों के लिए बड़ा मुद्दा है। नगर निगम के बुनियादी कामों में इसकी आपूर्ति भी है, लेकिन इसे बेहद हल्के में लिया जाता है। इसका अंदाजा शिकायत निवारण प्रणाली को देखकर लगाया जा सकता है। एसओपी है कि लीकेज की शिकायत पर 48 घंटे के अंदर उसे सुधारना है, लेकिन कई-कई दिनों तक शिकायत की अनदेखी हो रही है। सीएम हेल्पलाइन में दिसंबर माह में ही पेयजल से संबंधित 463 शिकायतें दर्ज कराई गईं हैं, यानी हर दिन औसतन 15 शिकायतें सिर्फ पीने के पानी को लेकर की गईं हैं।
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