
नईदुनिया प्रतिनिधि, इंदौर। वाराणसी (काशी) में मणिकर्णिका घाट और उस पर बने मंदिरों को तोड़े जाने का विरोध अब इंदौर में भी देखने को मिला। कांग्रेस नेताओं ने बुधवार को राजवाड़ा पर अहिल्या प्रतिमा के सामने धरना दिया। एक घंटे तक मौन धरने के बाद कांग्रेस नेताओं ने केंद्र और उत्तर प्रदेश सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि राजनीति के लिए धर्म की आड़ लेने वाली भाजपा सरकार असल में सनातन और उसकी विरासत को खत्म कर रही है।
पूर्व मंत्री सज्जनसिंह वर्मा और शहर कांग्रेस अध्यक्ष चिंटू चौकसे की अगुवाई में वरिष्ठ नेता और कार्यकर्ता धरने पर बैठे। इसके बाद कांग्रेस की ओर से शहर के नाम एक खुला पत्र जारी किया गया।
हिंदू-द्रोही मानसिकता
खुले पत्र में लिखा गया कि काशी का मणिकर्णिका घाट सिर्फ एक ऐतिहासिक संरचना नहीं, बल्कि सनातन आस्था, मोक्ष परंपरा और भारतीय सांस्कृतिक चेतना का अटूट और जीवंत प्रतीक है। 1771 में निर्मित तथा 1791 में देवी अहिल्याबाई द्वारा जीर्णोद्धारित इस अमूल्य धरोहर को “विकास” के नाम पर चूर-चूर करने वाली भाजपा सरकार की संस्कृति-विरोधी और हिंदू-द्रोही मानसिकता पूरी तरह बेनकाब हो चुकी है।
शहर कांग्रेस अध्यक्ष चिंटू चौकसे ने कहा कि अहिल्याबाई होलकर के त्रिशताब्दी वर्ष के समापन पर उनकी विरासत का ऐसा घिनौना अपमान अत्यंत पीड़ादायक है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी, जो स्वयं वाराणसी से सांसद हैं, काशी विश्वनाथ कॉरिडोर के नाम पर बनारस की प्राचीन संस्कृति, मंदिर परंपरा और सनातन धरोहर को लगातार कुचल रहे हैं।
पूर्व मंत्री सज्जनसिंह वर्मा ने कहा कि कांग्रेस इस अन्याय के खिलाफ सड़कों से लेकर संसद तक डटकर संघर्ष करेगी, जब तक कि काशी की विरासत की रक्षा सुनिश्चित नहीं होती। काशी से लेकर इंदौर तक के नागरिक इससे आक्रोशित हैं। परियोजना के नाम पर बनारस में सैकड़ों प्राचीन मंदिरों को रातोंरात जमींदोज कर दिया गया। काशी विश्वनाथ मंदिर के पास संकट मोचन क्षेत्र के प्राचीन शिवलिंग और अन्य सनातन धरोहरों को बुलडोजर से नष्ट करने वाली यह हिंदू विरोधी सरकार अब होलकर साम्राज्य की अमर विरासत पर भी कुल्हाड़ी चला रही है।
उन्होंने कहा कि अफसोस की बात यह है कि इस घटना के विरोध में भाजपा के एक भी जनप्रतिनिधि की आवाज सामने नहीं आई। मेरे शहर में मानव मल-मूत्र से मिले दूषित पानी को पीने से 23 से अधिक निर्दोष नागरिक मर जाते हैं, लेकिन यह असंवेदनशील सरकार कुंभकरण की नींद में सोई रहती है। सनातन धर्म पर इतना बड़ा प्रहार होने के बावजूद भाजपा नेताओं और जनप्रतिनिधियों के मुंह से आवाज तक नहीं निकलती। जो खुद को इंदौर का बेटा और मां अहिल्या की विरासत का संरक्षक बताते हैं, वे सभी भाजपा नेता आज मौन धारण किए हुए हैं।
धरने में राजेश चौकसे, गिरधर नागर, विनय बाकलीवाल, अमन बजाज, मनोहर धवन, रघु परमार, राजा चौकसे, नकुल पाटोदी, पार्षद सादिक खान, प्रदेश प्रवक्ता अमित चौरसिया, लीलाधर करोसिया सहित कांग्रेस कार्यकर्ता उपस्थित रहे।
जान लीजिए क्या है विवाद
घाट के पुनर्विकास कार्य के दौरान मंगलवार को जब मणिकर्णिका घाट की सीढ़ियां और चबूतरा तोड़ा गया, तो मलबे में अहिल्याबाई सहित अन्य कलाकृतियां दिखाई दीं। इसे लेकर दोपहर में पाल समिति के अध्यक्ष महेंद्र पाल पिंटू अपने साथियों के साथ घाट पहुंचे और अहिल्याबाई की मूर्ति को क्षतिग्रस्त किए जाने का विरोध शुरू कर दिया।
विरोध की खबर फैलते ही मौके पर लोगों की भीड़ जमा होने लगी। सूचना मिलने पर एडीएम और एसीपी पुलिस बल के साथ पहुंचे और लोगों को समझाइश देकर वहां से हटाया गया। इस दौरान पाल समाज के अध्यक्ष ने कहा कि विकास के नाम पर ऐतिहासिक धरोहरों को हटाया जाना गलत है। वहीं घाट के चच्छन गुरु ने आरोप लगाया कि पुनर्विकास की आड़ में घाट का अस्तित्व ही समाप्त किया जा रहा है।
लोगों को समझाइश देकर वहां से हटाया
घाट के आसपास रहने वाले कुछ लोगों ने आजीविका छिनने का आरोप भी लगाया। इसी बीच ‘पगला बाबा’ के नाम से वायरल हो रहे वीडियो में मणिकर्णिका घाट पर बुलडोजर लगाकर पुराने मंदिर तोड़े जाने के दृश्य सामने आए हैं, जिसको लेकर पूरे शहर में चर्चा तेज हो गई है।
18 करोड़ रुपये से हो रहा पुनर्विकास कार्य
महाश्मशान मणिकर्णिका के पुनर्विकास की जिम्मेदारी अब अभियंत्रण कार्यदायी संस्था को सौंपी गई है। रूपा फाउंडेशन की ओर से जून 2026 तक कार्य पूरा करने का लक्ष्य तय किया गया है। साइट पर निर्माण सामग्री पहुंचाने के लिए गंगा पार चेकर्ड प्लेट बिछाने और जेट्टी निर्माण का कार्य शुरू कर दिया गया है, जिससे क्रूज का आवागमन सुगम हो सके।
सामग्री ढुलाई के लिए कोलकाता से रूपा फाउंडेशन की ओर से क्रूज उपलब्ध कराया गया है। घाट के एक हिस्से में बैरिकेडिंग कर दी गई है। मिट्टी समतलीकरण के बाद अगले सप्ताह से पाइलिंग कार्य शुरू किए जाने की बात कही गई है।
मणिकर्णिका घाट के पुनर्विकास पर रूपा फाउंडेशन अपने सीएसआर फंड से 18 करोड़ रुपये खर्च कर रहा है। पहले यह कार्य बीआईपीएल (ब्रिजटेक इंफ्राविजन प्राइवेट लिमिटेड) को सौंपा गया था, लेकिन हाल ही में संस्था ने काम करने से इनकार कर दिया।
जुलाई 2023 में हुआ था शिलान्यास
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने 7 जुलाई 2023 को महाश्मशान मणिकर्णिका के पुनर्विकास कार्य का शिलान्यास किया था। उस समय लगभग 18 करोड़ रुपये की लागत बताई गई थी और यह स्पष्ट किया गया था कि इस परियोजना में सरकार की ओर से कोई राशि खर्च नहीं की जाएगी। पूरा खर्च रूपा फाउंडेशन, कोलकाता के सीएसआर फंड से किया जाना है।
प्रस्तावित प्रमुख कार्य
घाट पर 32 क्रेमेटोरियम का निर्माण
प्रदूषण नियंत्रण के लिए ऊर्जा एजेंसी द्वारा अत्याधुनिक चिमनी का निर्माण
पर्यटकों के लिए अलग विजिटर मार्ग का निर्माण
भूतल पर पंजीकरण कक्ष, लकड़ी भंडारण क्षेत्र, सामुदायिक प्रतीक्षालय, दो सामुदायिक शौचालय और हरित क्षेत्र का विकास
तकनीकी विवरण
भूतल का कुल क्षेत्रफल: 29,350 वर्ग फीट
दाह संस्कार क्षेत्र: 12,250 वर्ग फीट
प्रथम तल का क्षेत्रफल: 20,200 वर्ग फीट
निर्माण की आर्किटेक्ट एजेंसी: इडिफिस
निगरानी एजेंसी: नगर निगम (नोडल)
प्रशासन ने क्या कहा
मणिकर्णिका घाट के पुनर्विकास कार्य के दौरान मंगलवार को बुलडोजर से तोड़फोड़ के जो वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुए, उन्हें लेकर प्रशासन ने दूसरे दिन स्थिति स्पष्ट की। प्रशासन ने कहा कि इस कार्रवाई में किसी भी मंदिर को क्षति नहीं पहुंचाई गई है। मढ़ी यानी चबूतरा हटाए जाने के दौरान अहिल्याबाई की मूर्ति और अन्य कलाकृतियां जो नीचे गिरी थीं, उन्हें सुरक्षित रखने के उद्देश्य से संस्कृति विभाग को सौंप दिया गया है।
प्रशासन के अनुसार निर्माण कार्य पूरा होने के बाद इन सभी कलाकृतियों को दोबारा उसी स्थान पर स्थापित किया जाएगा। जिलाधिकारी सत्येंद्र कुमार ने बताया कि मणिकर्णिका घाट के सभी पौराणिक मंदिर पूरी तरह सुरक्षित हैं और उन्हें यथावत रखा जाएगा। उन्होंने कहा कि घाट के पुनर्विकास का उद्देश्य व्यवस्थाओं को बेहतर बनाना, स्थानीय लोगों को होने वाली असुविधाओं को कम करना और दाह संस्कार के दौरान फैलने वाले प्रदूषण पर नियंत्रण पाना है।
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