
नईदुनिया प्रतिनिधि, इंदौर। भागीरथपुरा में दूषित पानी के कारण बीमार हो रहे मरीजों की संख्या कम नहीं हो रही है। अभी भी क्षेत्र से रोजाना 15 से अधिक मरीज उल्टी-दस्त के सामने आ रहे हैं। 40 से अधिक मरीज अभी भी अस्पतालों में भर्ती हैं, वहीं 12 से अधिक मरीज आईसीयू में हैं। चार मरीज करीब सप्ताहभर से वेंटिलेटर पर हैं, उनमें कोई खास सुधार नहीं आ रहा है। परिजन सुबह से शाम अस्पतालों में अपने मरीज के ठीक होने का इंतजार कर रहे हैं।
बॉम्बे अस्पताल में एक वर्ष की निहारिका गुरुवार से भर्ती है। उसकी हालत में अभी सुधार आया है। उल्टी-दस्त की शिकायत के बाद उसे भर्ती किया गया था। पिता संतराम मजदूरी करते हैं। बच्ची के बीमार होने के बाद से माता नेहा और पिता दोनों अस्पताल में ही मौजूद हैं। पिता ने बताया कि पेट दर्द की शिकायत के बाद हम बच्ची को स्वास्थ्य केंद्र लेकर गए थे, यहाँ से उसे इलाज के लिए भेजा गया। हमारे क्षेत्र में दूषित पानी की समस्या के कारण बड़ी संख्या में लोग बीमार हुए हैं।
भागीरथपुरा की रहने वाली 70 वर्षीय देवकीबाई अभी सीएचएल अस्पताल में भर्ती हैं। उन्हें लकवा आ गया है। इनकी पोती कनक भी अस्पताल में भर्ती थी, वह एक दिन पहले ही डिस्चार्ज होकर घर आ गई है। बेटे बबलू ने बताया कि मेरी माँ देवकीबाई घर पर बिल्कुल स्वस्थ थीं। वह अपना काम भी खुद ही करती थीं और सीढ़ियां भी चढ़ जाती थीं। लेकिन दूषित पानी के कारण वह बीमार हैं और अभी अस्पताल में भर्ती हैं। माँ को इस हालत में देखकर बिल्कुल अच्छा नहीं लगता है। उनका एक तरफ का हिस्सा लकवाग्रस्त हो गया है। विशेषज्ञों ने हमें बताया कि उनके सिर की कोई नस ब्लॉक हो गई है, जिसके कारण समस्या आ रही है।
भागीरथपुरा के रहवासी अभी भी टैंकर से सप्लाई हो रहे पानी को पीने में डर रहे हैं। जिन परिवारों की आर्थिक स्थिति ठीक नहीं है, वे मजबूरी में इस पानी का सेवन कर रहे हैं। बाकी अधिकांश परिवार आरओ का पानी खरीदकर पी रहे हैं। यहाँ के कई लोग तो दूसरे क्षेत्र से आरओ का पानी खरीदकर ला रहे हैं। उन्हें क्षेत्र के सभी जल स्रोत से पानी पीने में डर लग रहा है। कई घरों में आरओ लग गया है।
रहवासियों ने बताया कि हमें नहीं पता कि कब हमें शुद्ध पानी मिल पाएगा। लंबे समय से हम दूषित पानी की शिकायत कर रहे थे, लेकिन किसी ने ध्यान नहीं दिया। अब इतना बड़ा घटनाक्रम हो गया है तो काम शुरू हुआ है। लोग अब भी खौफ में हैं और घरों में पानी उबालकर पीने को मजबूर हैं, क्योंकि नलों से आ रहे पानी पर से उनका विश्वास पूरी तरह उठ चुका है।