
नईदुनिया प्रतिनिधि, इंदौर। भागीरथपुरा जल त्रासदी को लेकर मंगलवार को इंदौर में भारी राजनीतिक गहमागहमी देखी गई। प्रशासन द्वारा धरना और प्रदर्शन पर प्रतिबंध लगाए जाने के बावजूद कांग्रेस नेताओं ने बस्ती में दाखिल होने की कोशिश की। लंबी जद्दोजहद और तनावपूर्ण स्थिति के बाद पुलिस ने कांग्रेस के केवल 8 वरिष्ठ नेताओं को ही भागीरथपुरा की प्रभावित बस्ती में जाने की अनुमति दी।
जब कांग्रेस नेताओं का काफिला भागीरथपुरा पहुंचा, तो भारी पुलिस बल ने उन्हें रोकने का प्रयास किया। इस दौरान नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार और पुलिस अधिकारियों के बीच तीखी बहस हो गई। सिंघार ने प्रशासन की रोक पर कड़ा ऐतराज जताया और पुलिस की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े किए। काफी देर तक चले हंगामे के बाद प्रशासन ने सीमित संख्या में नेताओं को अंदर जाने दिया, जहां उन्होंने पीड़ित परिवारों से मुलाकात कर उनका हाल जाना।
बस्ती में पहुंचने के बाद प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी ने सरकार और स्थानीय प्रशासन पर कड़ा प्रहार किया। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार अपनी विफलताओं और 'पापों' को छुपाने के लिए कांग्रेस को जनता से मिलने से रोक रही है। पटवारी ने कहा कि 17 लोगों की जान चली गई और प्रशासन अब भी वास्तविक स्थिति बताने के बजाय प्रतिबंधों का सहारा ले रहा है।
राजनीतिक मोर्चे पर कांग्रेस ने अब आर-पार की लड़ाई का मन बना लिया है। प्रशासन ने क्षेत्र में किसी भी प्रकार के धरने या विरोध प्रदर्शन की अनुमति नहीं दी है, लेकिन कांग्रेस ने इन प्रतिबंधों को चुनौती दी है। कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने स्पष्ट किया है कि वे झुकेंगे नहीं। पार्टी ने शाम को शहर के हर वार्ड में रैली निकालने और प्रभावितों की याद में कैंडल मार्च निकालने की घोषणा की है।
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प्रशासन ने सुरक्षा कारणों और शांति व्यवस्था का हवाला देते हुए कड़े इंतजाम किए हैं, वहीं कांग्रेस इसे जनता की आवाज दबाने का प्रयास बता रही है। उमंग सिंघार और जीतू पटवारी के नेतृत्व में कांग्रेस का 'हल्ला बोल' अभियान अब वार्ड स्तर तक ले जाने की तैयारी है। पार्टी का कहना है कि जब तक दोषियों पर कार्रवाई नहीं होती और पीड़ितों को न्याय नहीं मिलता, उनका संघर्ष जारी रहेगा।