
डिजिटल डेस्क। आज के दौर में आसान इंटरनेट, स्मार्टफोन की पहुंच और जिंदगी का बढ़ता खालीपन मिलकर समाज में एक नई और खतरनाक मानसिक बीमारी को जन्म दे रहे हैं। इंदौर शहर में पोर्नोग्राफी (अश्लील सामग्री) की लत के मामले पिछले दो सालों में करीब पांच गुना तक बढ़ गए हैं।
चिंताजनक बात यह है कि इस गंभीर लत के शिकार केवल युवा या किशोर ही नहीं हो रहे हैं, बल्कि 50 से 60 साल की उम्र के बुजुर्ग भी इसकी गिरफ्त में हैं। मनोचिकित्सकों के पास लगातार पहुंच रहे नए मामले इस बात का स्पष्ट संकेत हैं कि यह लत अब एक बड़ी सामाजिक चुनौती बन चुकी है।
इंदौर के प्रसिद्ध मनोचिकित्सक डॉ. राहुल माथुर का कहना है कि यह आंकड़े उनके क्लीनिक के अनुभवों पर आधारित हैं। एक समय था जब महीने भर में मुश्किल से एक या दो मरीज इस लत का इलाज कराने पहुंचते थे, लेकिन अब यह संख्या छलांग लगाकर 10 से 12 तक पहुंच गई है। इस लत के पीछे केवल आसान इंटरनेट ही जिम्मेदार नहीं है। रिश्तों में बढ़ता तनाव और इंसान का अकेलापन भी इसका बहुत बड़ा कारण है।
मनोचिकित्सक डॉ. रामगुलाम राजदान के मुताबिक, सिर्फ शहरी लोग ही नहीं बल्कि ग्रामीण परिवेश के बुजुर्ग भी इस अजीबोगरीब समस्या का शिकार हो रहे हैं। कोविड-19 महामारी के दौरान घरों में रहने के कारण बुजुर्गों में खाली वक्त बिताने के लिए मोबाइल और इंटरनेट के उपयोग की जो आदत पड़ी थी, वह अब तेजी से एक नकारात्मक लत में तब्दील हो गई है।
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इस ऑनलाइन जंजाल की भयावहता पर स्टेट साइबर सेल के एसपी प्रणय नागवंशी बताते हैं कि इंटरनेट पर मौजूद आपत्तिजनक कंटेंट का जाल इतना विशाल है कि जांच एजेंसियां अपनी पूरी कोशिश के बाद भी कुल कंटेंट का सिर्फ 10 से 15 प्रतिशत हिस्सा ही स्कैन कर पाती हैं।
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