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नलखेड़ा स्थित बगलामुखी मंदिर के पास चार और निर्माण तोड़ने पर मध्य प्रदेश हाई कोर्ट की रोक

Baglamukhi Temple Nalkheda: मंदिर आने वाले श्रद्धालुओं के लिए निजी जमीन पर बने यज्ञ, हवन और पूजन कराने के उद्देश्य से बनाए गए अस्थायी ढांचों को हटाने ...और पढ़ें

By Kuldeep BhawsarEdited By: Prashant Pandey
Publish Date: Mon, 19 Oct 2026 10:14:10 AM (IST)Updated Date: Mon, 19 Oct 2026 10:28:43 AM (IST)
नलखेड़ा स्थित बगलामुखी मंदिर के पास चार और निर्माण तोड़ने पर मध्य प्रदेश हाई कोर्ट की रोक
मध्य प्रदेश हाईकोर्ट की इंदौर खंडपीठ। - फाइल फोटो

HighLights

  1. अस्थायी ढांचों को 48 घंटे में हटाने के लिए जारी हुए थे नोटिस
  2. यज्ञ, हवन और पूजन कराने के उद्देश्य से बनाए गए थे
  3. हाईकोर्ट ने अगली सुनवाई तक कार्रवाई पर रोक लगा दी है

नईदुनिया प्रतिनिधि, इंदौर। आगर-मालवा जिले में नलखेड़ा स्थित मां बगलामुखी मंदिर के पास निजी जमीन पर बनी यज्ञशालाओं को हटाने के चार और मामलों में जमीन मालिकों को राहत मिली है। रविवार को अवकाश के बावजूद न्यायमूर्ति पवन कुमार द्विवेदी की विशेष पीठ ने सुनवाई की और अगली सुनवाई तक यहां किसी भी तरह की तोड़फोड़ या अन्य कार्रवाई पर रोक लगा दी।

मंदिर आने वाले श्रद्धालुओं के लिए निजी जमीन पर बने यज्ञ, हवन और पूजन कराने के उद्देश्य से बनाए गए अस्थायी ढांचों को हटाने के लिए नलखेड़ा नगर परिषद ने नोटिस जारी किए थे। इसके पहले शनिवार को भी हाई कोर्ट ने ऐसे चार मामलों में परिषद के नोटिस पर स्टे किया था।


48 घंटे में हटाने के आदेश दिए गए थे

अधिवक्ता गौरव श्रीवास्तव और परितोष श्रीवास्तव ने बताया कि नगर परिषद नलखेड़ा द्वारा 12 अक्टूबर को जारी नोटिस याचिकाकर्ता को 16 अक्टूबर की शाम मिले थे। इसमें निजी भूमि पर बने अस्थायी निर्माण को 48 घंटे में हटाने के निर्देश दिए गए थे। नगर परिषद के नोटिस में कहा गया कि बगैर अनुमति और भवन अनुज्ञा के ही यज्ञशाला का निर्माण किया गया है।

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दो सप्ताह में जवाब पेश के लिए कहा

वहां हवन-यज्ञ के दौरान आग प्रज्वलित की जाती है, लेकिन अग्नि सुरक्षा और अग्निशामक उपकरणों की पर्याप्त व्यवस्था नहीं है। याचिकाकर्ता की ओर से कोर्ट को बताया गया कि संबंधित जमीन निजी स्वामित्व की है और अस्थायी निर्माण की अनुमति के लिए आवेदन भी स्थानीय निकाय को दिया गया था।

कोर्ट ने मामले में सुनवाई करते हुए नगर परिषद नलखेड़ा, कलेक्टर और राज्य सरकार को नोटिस जारी करते हुए दो सप्ताह में जवाब पेश करने के लिए कहा है। साथ ही अगली सुनवाई तक यहां किसी तरह की कार्रवाई पर भी रोक लगा दी गई है।

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