
नईदुनिया प्रतिनिधि,इंदौर: भागीरथपुरा कांड के बाद नगर निगम फिर से जागा है। खुद नगरीय विकास मंत्री कैलाश विजयवर्गीय ने कबूल किया है कि पहले नर्मदा के जल वितरण का एक प्रोटोकॉल था। हर टंकी पर पानी की जांच होती थी। अब फिर उस सिस्टम को शुरू किया जाएगा।
विजयवर्गीय ने कहा कि शहर की सभी 105 टंकियों पर जांच का सिस्टम शुरू करेंगे। विजयवर्गीय ने कहा कि मुझे याद है जब मैं छोटा था तो नर्मदाजी के जल वितरण का एक प्रोटोकॉल था। टंकी से लेकर आखिरी सिरे तक हर दिन पानी की जांच होती थी। अब फिर एक सिस्टम बनाकर शुरू करेंगे।
इंदौर के भागीरथपुरा में पंद्रह दिन बीतने के बाद न तो पानी की सप्लाई सामान्य हो पाई है और न ही नए मरीज आना बंद हुए हैं। इन सबके बीच जनप्रतिनिधियों व अफसरों के दौरे लगातार जारी हैं। सरकार ने भागीरथपुरा के ताजा हालात जानने के लिए अतिरिक्त मुख्य सचिव (एसीएस) स्तर के दो अधिकारियों को इंदौर भेजा है। एसीएस अनुपम राजन और नीरज मंडलोई पहले सुबह भागीरथपुरा बस्ती पहुंचे।
अधिकारियों ने दोपहर के समय रेसीडेंसी में जनप्रतिनिधियों के साथ बैठक ली। बैठक में नगरीय विकास मंत्री कैलाश विजयवर्गीय के साथ संभागायुक्त डॉ.सुदाम खाड़े, निगमायुक्त क्षितिज सिंघल, कलेक्टर शिवम वर्मा व विधायक भी मौजूद रहे। इस बैठक में नगर निगम में कर्मचारियों की कमी का मुद्दा भी उठा। भागीरथपुरा के साथ शहर के अन्य क्षेत्रों में भी पेयजल की निगरानी की बात उठी।
सूत्रों के अनुसार निगम में धनतंगी और शासन से चुंगी क्षतिपूर्ति मिलने में हो रही देरी का मुद्दा भी कुछ जनप्रतिनिधियों ने उठा दिया। हालांकि बंद कमरे में हुई बैठक की इस चर्चा की कोई पुष्टी करने के तैयार नहीं दिखा।
यह भी पढ़ें- इंदौर के भागीरथीपुरा में गर्भवती महिलाओं और बच्चों के लिए विशेष जांच शुरू, 51 टीम मैदान में
भागीरथपुरा में करीब दो सप्ताह से नर्मदा और बोरवेल लाइन से जलापूर्ति नहीं हो सकी है। मंत्री विजयवर्गीय ने कहा कि पुरानी लाइन में जरूरत से ज्यादा लीकेज थे। इस वजह से नर्मदा लाइन बदली जा रही है। बस्ती के 30 प्रतिशत हिस्से में नई नर्मदा लाइन बिछाई जा चुकी है। पानी का सैंपल भी लिया जा रहा है। एक दो दिन और सैंपल लेकर जांच होगी। हम शत प्रतिशत पुष्टी कर लें कि पानी पूरी तरह सुरक्षित है उसी के बाद जलप्रदाय शुरू किया जाएगा।
उन्होंने कहा कि क्षेत्र में 114 सरकारी ट्यूबवेल हैं। सभी का पानी पीने योग्य नहीं मिला। उनका क्लोरिनेशन किया गया है। फिर भी हम नागरिकों से अपील कर रहे हैं कि वे ट्यूबवेल का पानी पीने के काम में ना लें। सिर्फ साफ सफाई में ही उसका उपयोग करें।