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नो कार डे : इंदौर की सड़कों पर 20,753 कारें कम निकलीं, आठ चौराहों पर हुआ सर्वे

इंटीग्रेटेड ट्रैफिक मैनेजमेंट सिस्टम (आईटीएमएस) के आंकड़ों के अनुसार आठ प्रमुख चौराहों पर किए गए सर्वे में 15 सितंबर की तुलना में 22 सितंबर को 20,753 ...और पढ़ें

By Kuldeep BhawsarEdited By: Prashant Pandey
Publish Date: Wed, 23 Sep 2026 08:28:11 AM (IST)Updated Date: Wed, 23 Sep 2026 08:42:03 AM (IST)
नो कार डे : इंदौर की सड़कों पर 20,753 कारें कम निकलीं, आठ चौराहों पर हुआ सर्वे
ईवी स्कूटर चलाकर कलेक्ट्रेट जाते हुए कलेक्टर शिवम वर्मा।

HighLights

  1. 22 सितंबर को मनाया जाता है नो कार डे
  2. न्यायिक अधिकारियों ने भी निजी वाहन छोड़कर संदेश दिया
  3. नो कार डे का असर ईंधन की खपत पर भी पड़ा

कुलदीप भावसार, नईदुनिया प्रतिनिधि, इंदौर। पर्यावरण संरक्षण के उद्देश्य से हर 22 सितंबर को मनाए जाने वाले नो कार डे का असर इस बार इंदौर की सड़कों पर साफ दिखा। मंगलवार को शहर में कई अधिकारी और कर्मचारी कार के बजाय दोपहिया, साइकिल और लोक परिवहन से कार्यालय पहुंचे। न्यायिक अधिकारियों ने भी निजी वाहन छोड़कर संदेश दिया।

अभियान की पहल करने वाले महापौर पुष्यमित्र भार्गव ने विदेश प्रवास पर रहते हुए भी लोक परिवहन का उपयोग कर नो कार डे मनाया। इंटीग्रेटेड ट्रैफिक मैनेजमेंट सिस्टम (आईटीएमएस) के आंकड़ों के अनुसार आठ प्रमुख चौराहों पर किए गए सर्वे में 15 सितंबर की तुलना में 22 सितंबर को 20,753 कारें कम दर्ज हुईं।


30 प्रतिशत से ज्यादा की कमी

आईटीएमएस की गणना के अनुसार सुबह आठ से शाम छह बजे तक आठ चौराहों पर आवाजाही दर्ज की गई। 15 सितंबर को इन स्थानों से 68,630 कारें गुजरी थीं। नो कार डे यानी 22 सितंबर को यह संख्या घटकर 47,877 रह गई। यानी लगभग 30.24 प्रतिशत की कमी आई। यह आंकड़ा सिर्फ इन आठ चौराहों का है, पूरे शहर का नहीं।

चौराहों के अनुसार शिवाजी वाटिका पर 15 सितंबर के 6,946 के मुकाबले 22 सितंबर को 5,981 कारें दर्ज हुईं। गीता भवन पर 10,782 से घटकर 8,488 और कृषि महाविद्यालय चौराहा पर 9,900 से घटकर 7,776 कारें निकलीं। जीपीओ, एलआइजी, पलासिया, पिपलियाहाना और महू नाका पर भी कारों की आवाजाही में स्पष्ट कमी देखी गई।

ईंधन की खपत में भी आई 10 प्रतिशत से ज्यादा की कमी

नो कार डे का असर ईंधन की खपत पर भी पड़ा। अनुमान के अनुसार 15 सितंबर की तुलना में 22 सितंबर को लगभग 1,325 लीटर ईंधन कम खर्च हुआ। इसमें पेट्रोल की बचत 501.21 लीटर और डीजल की बचत 824.40 लीटर रही। औसतन ईंधन खपत में करीब 10.34 प्रतिशत की कमी दर्ज की गई।

महापौर ने विदेश में मनाया नो कार डे

नो कार डे में सिर्फ आमजन ही नहीं, प्रशासनिक और न्यायिक अधिकारियों ने भी भागीदारी की। वर्तमान में विदेश प्रवास पर चल रहे महापौर पुष्यमित्र भार्गव ने विदेश में रहते हुए भी निजी वाहन के बजाय लोक परिवहन का उपयोग किया। शहरवासियों के नाम संदेश में उन्होंने कहा कि नो कार डे का उद्देश्य केवल एक दिन कार छोड़ना नहीं है। इसका लक्ष्य निजी वाहन पर निर्भरता कम करना और सार्वजनिक परिवहन को रोजमर्रा की जिंदगी का हिस्सा बनाना है।

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ये हैं आंकडे

  • नो कार डे मनाया जाता है - 22 सितंबर को
  • तुलनात्मक अध्ययन 15 सितंबर 2026 बनाम 22 सितंबर 2026
  • समय : सुबह 8 से शाम 6 बजे तक
  • निगरानी की गई : 8 प्रमुख चौराहों पर
  • 15 सितंबर 2026 : 68630 कारें गुजरी इन चौराहों से
  • 22 सितंबर : 47877 कारें गुजरी इन चौराहों से
  • कमी : 20,753 कारें कम निकली इन चौराहों से
  • कमी : लगभग 30.24 प्रतिशत
  • पेट्रोल बचत : 501.21 लीटर
  • डीजल बचत : 824.40 लीटर

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