
नईदुनिया प्रतिनिधि, इंदौर। स्वामित्व योजना के तहत रजिस्ट्री का काम शुरुआती धीमी गति के बाद अब रफ्तार पकड़ रहा है। ग्रामीण क्षेत्रों में आबादी भूमि पर रहने वाले लोगों को भू-अधिकार अभिलेख देने के बाद अब जमीन की रजिस्ट्री की जा रही है। इससे आबादी भूमि पर वर्षों से काबिज लोगों को पहली बार जमीन का कानूनी हक मिलेगा। रजिस्ट्री की प्रक्रिया का शुभारंभ करीब डेढ़ माह पहले मुख्यमंत्री ने इंदौर से किया था। शुरुआत में पटवारियों के विरोध के कारण काम प्रभावित रहा, लेकिन अब इसमें तेजी आई है।
इंदौर जिले में 95,086 प्लाटों की रजिस्ट्री की जानी है। इनमें से एक नवंबर तक 27.39 प्रतिशत प्लाटों की रजिस्ट्री हो चुकी है। यानी 26,042 प्लाटों के दस्तावेज पंजीकृत किए जा चुके हैं। इंदौर के 554 गांवों में आबादी भूमि पर रहने वाले ग्रामीण परिवारों को भू-अधिकार अभिलेख देने के बाद अब रजिस्ट्री की जा रही है। इसकी जिम्मेदारी नायब तहसीलदार, तहसीलदार और पटवारियों को सौंपी गई है।
पटवारियों का विरोध थमने के बाद प्रक्रिया ने गति पकड़ ली है। अब तक 26,042 दस्तावेज पंजीकृत किए जा चुके हैं, जबकि 2,554 दस्तावेज पटवारी सत्यापन के स्तर पर हैं। वहीं, 1,160 दस्तावेज पटवारियों ने रजिस्ट्री के लिए तहसीलदारों को भेजे हैं। जिले में सभी रजिस्ट्रियां पूरी होने पर एक लाख 22 हजार 669 लोग लाभान्वित होंगे।

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प्रदेश में एक नवंबर तक 13.18 लाख रजिस्ट्रियां हो चुकी हैं। इनमें इंदौर संभाग के आठ जिलों में अब तक एक लाख 65 हजार 893 रजिस्ट्रियां हुई हैं, जबकि संभाग में कुल सात लाख 21 हजार 498 प्लाटों की रजिस्ट्री की जानी है। संभाग में धार जिले में सबसे अधिक 35,694 रजिस्ट्रियां हुई हैं। दूसरे स्थान पर खंडवा है, जहां 30,792 रजिस्ट्रियां हो चुकी हैं।