
अतुल शुक्ला, जबलपुर। गांव में सालों से रह रहे ग्रामीणों को उनके भूखंडों का मालिकाना हक दिलाने के लिए शुरू की गई स्वामित्व योजना की रफ्तार नहीं बढ़ रही है। जबलपुर समेत संभाग के दूसरे जिलों की भी हालात सुस्त है। यही हाल प्रदेश के अन्य जिलों का है।
जबलपुर में ही करीब एक लाख 37 हजार 836 प्लाट की रजिस्ट्री होनी है, लेकिन 22 अक्टूबर तक महज पांच हजार 818 प्लाट की ही रजिस्ट्री पूरी हो सकी थी, जो लक्ष्य के मुकाबले करीब 4.22 प्रतिशत ही काम अब तक हुआ है।
इस योजना के तहत जबलपुर की 11 तहसीलों के 1,180 गांवों में एक लाख 67 हजार 224 हितग्राहियों के लिए प्रक्रिया पूरी की जानी है। इसके बावजूद रजिस्ट्री के आंकड़े लक्ष्य से काफी पीछे हैं। जबलपुर प्रदेशभर में 12 वें पायदान पर है।
वहीं प्रदेशभर में छिंदवाड़ा नंबर वन पर है। यहां 22 अक्टूबर तक करीब 12 हजार 384 रजिस्ट्री हुई। वहीं दूसरे पर राजगढ़ और तीसरे पर सागर जिला है। इधर इस काम में सबसे खराब प्रदर्शन करने वाले जिलों की बात करें तो इनमें सिंगरौली, आलीराजपुर, उमरिया, अनूपपुर, मऊगंज शामिल हैं।
स्वामित्य के आंकड़े बताते हैं कि जबलपुर जिले में 4 हजार 238 प्रकरणों में रजिस्ट्री की प्रक्रिया शुरू हुई है, जबकि 2,803 प्रकरणों में पटवारी सत्यापन प्रस्तुत किया गया है। वहीं, 823 प्रकरण रजिस्ट्रेशन की प्रक्रिया में हैं। इन आंकड़ों से स्पष्ट है कि हितग्राहियों को स्वामित्व दस्तावेज उपलब्ध कराने के लिए राजस्व अमले को प्रक्रिया में तेजी लानी होगी। गांववार प्रकरणों की समीक्षा कर यह देखना जरूरी होगा कि रजिस्ट्री में देरी की वजह दस्तावेजों की कमी, सत्यापन या अन्य प्रक्रियागत बाधाएं तो नहीं हैं।
रिपोर्ट में शामिल अन्य जिलों में भी प्रगति बहुत अधिक नहीं है। सिवनी में 4.55 प्रतिशत, सागर में 4.87 प्रतिशत, विदिशा में 4.90 प्रतिशत और शिवपुरी में 5.28 प्रतिशत काम पूरा हुआ है। हालांकि, इन जिलों की तुलना में जबलपुर की स्थिति सबसे कमजोर बनी हुई है। रीवा की 40.25 प्रतिशत उपलब्धि जबलपुर से काफी आगे है। ऐसे में जिले में लंबित प्रकरणों की पहचान, पटवारी सत्यापन और रजिस्ट्रेशन की नियमित समीक्षा से ही योजना की रफ्तार बढ़ने की उम्मीद है।
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योजना के क्रियान्वयन में इसलिए हो रही देरी
पटवारियों की हड़ताल : प्रदेशभर में पटवारियों की हड़ताल के कारण स्वामित्व योजना का काम प्रभावित हुआ।
राजस्व अमले की असहमति : योजना के तहत रजिस्ट्री की प्रक्रिया में पटवारियों, तहसीलदारों की भूमिका को लेकर काम अटका रहा।
12 अक्टूबर से काम में तेजी : शासन-प्रशासन स्तर पर प्रक्रिया स्पष्ट होने के बाद 437 तहसीलों में रजिस्ट्री का काम शुरू हुआ।
40,063 गांव शामिल : योजना के तहत करीब 11 लाख 95 हजार भूखंडों की रजिस्ट्री की जानी है।
4.59 लाख आवेदन : अब तक करीब चार लाख 59 हजार रजिस्ट्री आवेदन प्राप्त हुए हैं।
पटवारी स्तर पर लंबित : करीब 1,79,611 आवेदन लंबित हैं।
उपपंजीयक स्तर पर लंबित : करीब 41,685 आवेदन प्रक्रिया में अटके हैं।
2,38,357 रजिस्ट्री पूरी : अब तक इतने भूखंडों की रजिस्ट्री हो चुकी है।