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Shri Vaishnav Dham Indore: शक्ति की भक्ति बनी समाज सेवा का आधार, भजन मंडली की महिलाओं का संकल्प हो रहा साकार

इंदौर शहर के जागृति महिला मंडल ने पहले श्रीवैष्णोधाम मंदिर बनवाया और अब मंदिर से समाजसेवा कर रही हैं।

By Harshal RathoreEdited By: Prashant Pandey
Publish Date: Mon, 19 Oct 2026 11:23:23 AM (IST)Updated Date: Mon, 19 Oct 2026 11:31:32 AM (IST)
Shri Vaishnav Dham Indore: शक्ति की भक्ति बनी समाज सेवा का आधार, भजन मंडली की महिलाओं का संकल्प हो रहा साकार
मंदिर में बनी लाइब्रेरी में अपनी पसंद की पुस्तक तलाशता पाठक। दूसरी मंदिर में शतरंज खेलते हुए बच्चे।

HighLights

  1. भजन मंडली में साढ़े सात हजार महिलाएं शामिल हैं
  2. 250 से अधिक बच्चों को उपलब्ध करा रहे फ्री शिक्षा
  3. मंदिर के अंदर एक लाइब्रेरी भी बनवाई गई है

हर्षल सिंह राठौड़, नईदुनिया, इंदौर। यूं तो शहर में कई भजन मंडलियां हैं, पर एक भजन मंडली ऐसी भी है जो करती तो शक्ति की भक्ति है, लेकिन इस भक्ति से वे समाज सेवा के संकल्प को साकार कर रही है। देवी दुर्गा की भक्ति में भजन गाने की ललक मन में जगी और चंद वर्षों में ही परहित का ऐसा दीप जला जो वर्ष 2004 से अब तक सकारात्मकता का प्रकाश फैला रहा है।

यह भजन मंडली महिलाओं की है और सभी निर्णय मंडल की महिलाओं द्वारा ही लिए जाते हैं। शहर के जागृति महिला मंडल ने पहले श्रीवैष्णोधाम मंदिर बनवाया और अब मंदिर से समाजसेवा कर रही हैं। यह मंदिर देवी दुर्गा को ही समर्पित मंदिर है, जिसके गर्भगृह में देवी दुर्गा, देवी सरस्वती और देवी महाकाली के विग्रह स्थापित हैं।


भजन मंडल द्वारा भजन करने और मंदिर में आए दान से जो राशि प्राप्त होती है, उससे विभिन्न प्रकल्प भी चलाए जाते हैं। जागृति महिला मंडल के प्रमुख विनोद कुमार अहलूवालिया बताती हैं कि साल 1990 में भजन करने की इच्छा हुई और कुछ महिलाओं के साथ भजन करना शुरू किए। धीरे-धीरे मंडली में सदस्यों की संख्या बढ़ने लगी और इसे जागृति महिला मंडल नाम दिया गया।

आज मंडली में साढ़े सात हजार महिलाएं शामिल हैं। भजन से राशि जब ज्यादा एकत्रित हुई तो सोचा कि देवी आराधना से ही राशि जमा हुई इसलिए उनका ही मंदिर बना देना चाहिए। स्कीम नंबर 140 में एक भक्त ने जमीन दान में दी और साल 2004 में श्रीवैष्णोधाम मंदिर बन गया। इसके लिए बकायदा ट्रस्ट भी बनाया गया है जिसमें सरिता छाबड़ा, इंदिरा दुबे, दीप्ति शर्मा, सरोज राठी, प्रभा खुराना, जयश्री शिंदे, लता पाहुजा आदि शामिल हैं।

खेल से शिक्षा तक का सफर

बच्चों को मोबाइल की लत से दूर करने के लिए फर्श पर विशाल चेस बोर्ड बनाकर बड़ी-बड़ी शतरंज की मोहरे रखी गई हैं, जिसे कोई भी बच्चा खेल सकता है। यहां निश्शुल्क लाइब्रेरी भी संचालित की जाती है जिसमें करीब तीन हजार किताबें हैं। इसमें धार्मिक-आध्यात्मिक के अलावा नीट, जेईई, सीए, सीएस, ला आदि प्रतियोगी परीक्षाओं की किताबों के साथ स्कूल-कॉलेज के विभिन्न कोर्स की किताबें भी है।

ये किताबें कोई भी पढ़ सकता है और घर भी ले जा सकता है। वर्तमान में यहां गणित की विशेष कक्षा भी संचालित हो रही है जिसमें विद्यार्थी समाधान प्राप्त करते हैं। अब इसमें अन्य विषयों को भी शामिल करने की योजना है, जिन्हें सेवानिवृत्त शिक्षक द्वारा पढ़ाया जाएगा। 2004 से अब तक 250 से अधिक जरूरतमंद स्कूली विद्यार्थियों का शिक्षण शुल्क भी जमा किया जा चुका है।

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दिव्यांगों के हित का भी रख रहे ध्यान

मंदिर बनने बाद जब भजन मंडल को और भी ज्यादा बुलाया जाने लगा तो और भी राशि दान में प्राप्त होने लगी। इसका सदुपयोग करने के लिए सेवा प्रकल्पों की शुरुआत की। मंदिर में दिव्यांगों के लिए न केवल लिफ्ट लगवाई गई बल्कि जगह-जगह ब्रेल लिपि में साइनबोर्ड लगवाए गए ताकि दृष्टिहीन भक्त को भी मंदिर में समस्या न हो।

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