
नईदुनिया प्रतिनिधि, इंदौर। भागीरथपुरा में दूषित पानी से हुई तबाही के बाद अब प्रभावित परिवारों में शोक और बीमारी का दोहरा कहर टूट रहा है। 10 साल की मन्नतों के बाद जन्मे छह माह के मासूम अव्यान की मौत ने उसके माता-पिता को झकझोर कर रख दिया है। बेटे को खोने के गम में डूबी मां साधना साहू की सोमवार को अचानक तबीयत बिगड़ गई, जिसके बाद उन्हें इलाज के लिए स्वास्थ्य केंद्र लाया गया।
बुखार, सर्दी और उल्टी-दस्त की शिकायत लेकर अस्पताल पहुंची साधना की आंखों से आंसू थमने का नाम नहीं ले रहे हैं। अव्यान का नाम सुनते ही वह सहम जाती हैं। साधना का कहना है कि 10 साल बाद हुआ बेटा बुढ़ापे का सहारा बनता, लेकिन प्रशासन की लापरवाही और दूषित पानी ने उसे छीन लिया। वे इस घटना के जिम्मेदारों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग कर रही हैं। यह केवल एक परिवार की कहानी नहीं है, बल्कि पूरे भागीरथपुरा के कई घरों में मातम पसरा हुआ है कहीं कोई विधवा हो गई है, तो कहीं कोई मासूम अनाथ।
हालात को देखते हुए स्वास्थ्य विभाग ने क्षेत्र में मोर्चा संभाल लिया है। सोमवार को भारत सरकार के क्षेत्रीय निदेशक डॉ. चंद्रशेखर गेदाम की मौजूदगी में 'कोबो टूल' का प्रशिक्षण दिया गया, जिससे वास्तविक समय (रियल टाइम) में स्थिति का मूल्यांकन किया जा रहा है। स्वास्थ्य विभाग की 200 टीमों ने 2,745 घरों का दौरा कर करीब 14 हजार लोगों तक स्वास्थ्य किट पहुंचाई है।
भागीरथपुरा स्वास्थ्य केंद्र में सोमवार को 38 नए मरीज सामने आए, जिनमें से 6 की हालत गंभीर होने पर उन्हें अस्पताल रेफर किया गया। वर्तमान में विभिन्न अस्पतालों में कुल 110 मरीज भर्ती हैं, जिनमें से 15 मरीज आईसीयू (ICU) में जिंदगी और मौत के बीच जूझ रहे हैं। डॉक्टरों के अनुसार, अधिकांश मरीजों में संक्रमण किडनी और लिवर तक फैल गया है। चाचा नेहरू अस्पताल में भी 10 से अधिक बच्चे उपचाराधीन हैं, जबकि पूरे शहर में लगभग 6 मरीज वेंटिलेटर सपोर्ट पर बताए जा रहे हैं।
सर्वे टीम में चिकित्सक, नर्सिंग ऑफिसर, सीएचओ (CHO), आशा कार्यकर्ता और एएनएम (ANM) को शामिल किया गया है। प्रत्येक टीम को 25 घरों के दौरे का लक्ष्य दिया गया है ताकि कोई भी संक्रमित व्यक्ति उपचार से वंचित न रहे। प्रशासन अब जल शुद्धिकरण और संक्रमण के प्रसार को रोकने के लिए आधुनिक तकनीकों का सहारा ले रहा है।