
नईदुनिया प्रतिनिधि, इंदौर। इंदौर के शासकीय अस्पतालों में बेहतर स्वास्थ्य सुविधाओं के बड़े-बड़े दावे धरातल पर दम तोड़ते नजर आ रहे हैं। स्वास्थ्य विभाग द्वारा महिलाओं के लिए संचालित पीसी सेठी अस्पताल इसका जीता-जागता उदाहरण है, जहां सुविधाओं के नाम पर केवल खानापूर्ति हो रही है। अस्पताल की अव्यवस्थाओं से तंग आकर अब महिलाएं यहाँ आने के बजाय निजी अस्पतालों का रुख करने को मजबूर हैं।
अस्पताल में लगी लिफ्ट गर्भवती महिलाओं के लिए जी का जंजाल बन गई है। यहाँ एक लिफ्ट स्थायी रूप से बंद रहती है, जबकि दूसरी लिफ्ट आए दिन तकनीकी खराबी का शिकार हो जाती है। ऐसी स्थिति में प्रसव के लिए आई महिलाओं को भारी दर्द और जोखिम के बीच सीढ़ियों का सहारा लेकर ऊपरी मंजिल तक जाना पड़ता है। ओपीडी की लंबी लाइनों और इलाज के लिए घंटों इंतजार ने मरीजों की परेशानी को और बढ़ा दिया है।
अस्पताल में हाल ही में ब्लड सैंपल और अन्य पैथोलॉजी जांच के लिए नए काउंटरों का निर्माण किया गया है, लेकिन यहाँ की व्यवस्था 'ढाक के तीन पात' वाली है। रविवार को जब स्थिति का जायजा लिया गया, तो काउंटर तो खुले थे लेकिन सैंपल लेने वाला कोई कर्मचारी मौजूद नहीं था। मरीजों के परिजनों का आरोप है कि कर्मचारी अक्सर नदारद रहते हैं, जिसके कारण मजबूरी में उन्हें निजी लैब में मोटी रकम देकर जांच करवानी पड़ती है।
स्वास्थ्य विभाग जहाँ एक ओर फायर एनओसी (Fire NOC) न होने पर निजी अस्पतालों को सील करने और नोटिस जारी करने की कार्रवाई करता है, वहीं उसका अपना पीसी सेठी अस्पताल बिना फायर एनओसी के धड़ल्ले से चल रहा है। अस्पताल में रोजाना 200 से अधिक गर्भवती महिलाएं आती हैं। आग लगने जैसी आपातकालीन स्थिति से निपटने के लिए यहाँ कोई पुख्ता इंतजाम नहीं हैं, लेकिन विभाग की लाइसेंस शाखा इस पर चुप्पी साधे हुए है।
अस्पताल के पिछले हिस्से में वर्तमान में निर्माण कार्य चल रहा है, जिसने सुरक्षा संबंधी गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। निर्माण के लिए दीवार तोड़ी गई है, जिसे केवल एक अस्थाई प्लास्टिक सीट से ढका गया है। वहीं, कार्यस्थल के चारों ओर मात्र एक नेट लगाई गई है। इस लापरवाही के कारण किसी भी समय बड़ा हादसा होने की आशंका बनी रहती है।
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पीसी सेठी अस्पताल की कार्यप्रणाली पर एमटीएच (MTH) अस्पताल ने भी कलेक्टर से शिकायत की है। आरोप है कि गंभीर मरीजों का प्राथमिक उपचार करने के बजाय उन्हें सीधे एमटीएच रेफर कर दिया जाता है। इतना ही नहीं, दुष्कर्म जैसी घटनाओं की शिकार नाबालिगों को मेडिकल परीक्षण के लिए यहाँ-वहाँ भटकना पड़ता है। पूर्व में एक नाबालिग पीड़िता को मेडिकल के लिए दो दिनों तक भटकना पड़ा था, जो अस्पताल प्रबंधन की संवेदनहीनता को दर्शाता है।
अस्पताल में निर्माण कार्य के चलते सुरक्षा इंतजाम का ध्यान रखा जा रहा है। अस्पताल में मरीजों को बेहतर उपचार मिल रहा है। लिफ्ट भी चालू है, यदि बंद है तो इसे दिखवाता हूं। - डॉ. वीरेंद्र राजगीर, प्रभारी, पीसी सेठी अस्पताल