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पंचगव्य प्रोजेक्ट के पैसों से किया गोवा का टूर, खरीदी महंगी गाड़ी

Jabalpur News: जबलपुर वेटरनरी विश्वविद्यालय में करोड़ों के पंचगव्य प्रोजेक्ट की आड़ शोध कम, वित्तीय अनियमितताएं ज्यादा हुईं। प्रोजेक्ट में गाय के गोबर...और पढ़ें

By Atul ShuklaEdited By: Dheeraj Belwal
Publish Date: Fri, 09 Jan 2026 06:28:38 PM (IST)Updated Date: Fri, 09 Jan 2026 06:28:38 PM (IST)
पंचगव्य प्रोजेक्ट के पैसों से किया गोवा का टूर, खरीदी महंगी गाड़ी
'पंचगव्य प्रोजेक्ट' की आड़ में बड़ा फर्जीवाड़ा।

HighLights

  1. रिश्तेदारों से खरीदी मशीनें और सरकारी पैसे से मौज
  2. पंचगव्य प्रोजेक्ट में करोड़ों की अनियमितता उजागर
  3. जांच रिपोर्ट में फंसे प्रोफेसर, रिश्तेदारों को पहुंचाया लाभ

नईदुनिया प्रतिनिधि, जबलपुर। वेटरनरी विश्वविद्यालय में करोड़ों के पंचगव्य प्रोजेक्ट की आड़ शोध कम, वित्तीय अनियमितताएं ज्यादा हुईं। प्रोजेक्ट में गाय के गोबर और मूत्र से उत्पाद तैयार कर इन्हें लोगों तक सस्ते दाम में पहुंचाना था, लेकिन इस काम की आड़ में प्रोजेक्ट से जुड़े लोगों ने गोवा यात्रा की, महंगी गाड़ी खरीदी। यहां तक की कई ऐसी कंपनियों से मशीन खरीदी, जो प्रोजेक्ट से जुड़े लोगों के नाते-रिश्तेदार थे। यह तथ्य, जिला प्रशासन द्वारा गठित की गई जांच समिति की रिपोर्ट में सामने आई है।

समिति ने विश्वविद्यालय से प्रोजेक्ट से जुड़े सभी दस्तावेज मांगे, लेकिन उन्होंने में मद और उस पर होने वाले खर्चो को ब्यौरा मांगा, जो नहीं दिया गया। जो दस्तावेज मिले, उनकी जांच में पता चला कि प्रोजेक्ट प्रभारी प्रो. यशपाल साहनी और उनकी टीम ने वो यात्राएं किए, जो इस प्रोजेक्ट से जुड़ी नहीं थी। वहीं प्रोजेक्ट में वाहन भी नहीं खरीदना था, लेकिन खरीदा गया। इस पूरे प्रकरण की जांच कर कलेक्टर को जांच सौंपा दी गई है।


घंटों बैठे रहे,पर नहीं दिए दस्तावेज

कलेक्टर राघवेंद्र सिंह ने वेटरनरी विश्वविद्यालय में चल रहे पंचगव्य प्रोजेक्ट में वित्तीय अनियमितताओं की जांच के निर्देश दिए। एसडीएम राघुवीर मरावी और टेजरी विनायिका ने इस प्रोजेक्ट की जांच करने, विवि प्रशासन से दस्तावेज मांगे, लेकिन उन्हें कुछ दस्तावेज नहीं मिले। जानकारी के मुताबिक साढ़े तीन करोड़ के प्रोजेक्ट में मद और उस पर होने वाले खर्च का ब्यौरा नहीं दिया गया। जबकि टीम ने इसके लिए कई बार पत्र दिया और जानकारी लेने विवि में भी बैठे रहे। जांच दल ने प्राप्त दस्तावेजों को खंगाला तो पाया कि प्रोजेक्ट के जिस पद पर जो काम करना था, वह नहीं हुआ। इस मद में न तो गोवा की यात्रा थी और न ही न ही वाहन खरीदने की बात सामने आई।

होगी कार्रवाई या फाइलों में दबे का मामला

जबलपुर संभाग के कमिश्नर धनंजय प्रताप भदौरिया ने नईदुनिया की पंचगव्य में गड़बड़ी से संबंधित खबर को संज्ञान में लिया और कलेक्टर को इसकी जांच के आदेश दिए थे। इसके बाद जिला प्रशासन ने जांच समिति बनाई। दो सदस्यीय जांच समिति ने प्रोजेक्ट से जो कुछ भी दस्तावेज उपलब्ध हुए, उसकी जांच में वित्तीय अनियमितता पाई। अब प्रोजेक्ट प्रभारी प्रो. यशपाल साहनी और प्रोजेक्ट के वित्त प्रभारी समेत प्रोजेक्ट से जुड़े लोगों पर कार्रवाई होगी, जिस पर कलेक्टर या कमिश्नर निर्णय लेंगे। हालांकि इस जांच में यह बात सामने आ गई है कि वेटरनरी विवि में चल रहे शोध में किस तरह से वित्तीय अनियमितता हो रही है।

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इसकी जांच क्यों नहीं?

  • बायोटेक्नोलाजी विभाग में चल रहे शोध
  • विवि के डेयरी, बकरी और मुर्गी फार्म में
  • फिशरी कालेज में चल रहे शोध
  • वाइल्ड लाइफ में चल रहे शोध

जांच समिति ने पंचगव्य से जुड़े सभी दस्तावेजों को विवि प्रशासन से मांगा था, लेकिन वे सभी उपलब्ध नहीं करा सके। जो दस्तावेज मिले, उसमें अनियमितता सामने आई । जो दस्तावेज नहीं दिए गए, उससे यह भी स्पष्ट होता है कि उनमें भी वित्तीय अनियमितता की गई थी। जांच पूरी कर कलेक्टर को सौंप दी गई है।- रघुवीर सिंह मरावी, एसडीएम, जबलपुर