
नईदुनिया प्रतिनिधि, जबलपुर। महाधिवक्ता कार्यालय के लेटरहेड पर प्रदेश के सभी पुलिस अधीक्षकों से मोबाइल नंबर मांगना एक कांस्टेबल को भारी पड़ गया।
महाधिवक्ता कार्यालय ने उनके पत्राचार को गंभीर कदाचरण और अनुशासनहीनता मानते हुए कार्यालय में प्रवेश पर रोक लगा दी। इतना ही नहीं, विधिक मामलों में समन्वय की जिम्मेदारी भी उससे लेकर उप पुलिस अधीक्षक को सौंप दी गई है।
दरअसल, 23 सितंबर को जारी पत्र में रघुवंशी ने खुद को महाधिवक्ता कार्यालय की समन्वय शाखा में कोआर्डिनेटर बताते हुए प्रदेश के सभी एसपी, उनके रीडर और जिला विधिक प्रभारियों के सरकारी, व्यक्तिगत और सीयूजी मोबाइल नंबर मांगे थे।
जानकारी भेजने के लिए 25 सितंबर तक की समयसीमा तय की गई थी। 28 सितंबर को सचिव (विधि) ने इस पत्राचार पर कड़ी आपत्ति जताते हुए कार्रवाई के निर्देश जारी किए थे।
23 सितंबर 2026 को जारी पत्र में रघुवंशी ने खुद को महाधिवक्ता कार्यालय की समन्वय शाखा में कोआर्डिनेटर (गृह/पुलिस विभाग) बताते हुए प्रदेश के सभी एसपी, उनके रीडर और जिला विधिक प्रभारियों के सरकारी, व्यक्तिगत और सीयूजी मोबाइल नंबर मांगे थे।
जानकारी 25 सितंबर तक ईमेल और व्हाट्सएप से भेजने के निर्देश दिए गए थे। इसके लिए न्यायालयीन प्रकरणों में समन्वय का हवाला दिया गया।
महाधिवक्ता कार्यालय ने लेटरहेड के इस्तेमाल को गंभीर अनुशासनहीनता मानते हुए उनका प्रवेश अनुचित ठहराया और मूल विभाग से काम करने के निर्देश दिए।
एसपी रेडियो सुनील राजोरे के अनुसार, पत्र मिलने के बाद आरक्षक के उत्तरदायित्व में बदलाव किया गया है। अब विधिक मामलों में समन्वय की जिम्मेदारी उप पुलिस अधीक्षक को सौंपी गई है।
यह भी पढ़ें- हाई कोर्ट का महत्वपूर्ण फैसला : कानूनी अभिभावक नहीं होने पर नानी कर सकती है नातिन के भरण-पोषण का दावा