
आलोक बैनर्जी, नईदुनिया जबलपुर। विजयनगर स्थित शेल्बी अस्पताल में लगी आग ने एक बार फिर अस्पतालों में मरीजों की सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। निरीक्षण में सामने आई खामियों के आधार पर स्वास्थ्य विभाग ने शेल्बी अस्पताल का पंजीयन तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया है।
निरीक्षण के दौरान फायर एक्जिट गेट पर सामान रखा मिला, कई अग्निशमन सिलिंडर की वैधता समाप्त हो चुकी थी और इलेक्ट्रिकल पैनल में भी अनियमितताएं मिलीं। इसके अलावा, नर्सिंग होम एक्ट के तहत आग जैसी आकस्मिक घटना की तत्काल सूचना देना अनिवार्य होने के बावजूद अस्पताल प्रबंधन ने विभाग को लिखित प्रतिवेदन, ई-मेल या फोन के माध्यम से सूचना नहीं दी।
इस कार्रवाई के बाद सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या अस्पतालों में सुरक्षा व्यवस्था को लेकर इस बार स्थायी सुधार होगा या कुछ दिनों की सख्ती के बाद स्थिति फिर पहले जैसी हो जाएगी। जबलपुर में एक अगस्त 2022 को हुए न्यू लाइफ अस्पताल अग्निकांड के बाद भी सुरक्षा मानकों को लेकर व्यापक कार्रवाई की गई थी।
अस्पतालों की जांच, नोटिस और सीलिंग जैसी कार्रवाई के बावजूद समय-समय पर सामने आने वाली घटनाएं निगरानी व्यवस्था की प्रभावशीलता पर सवाल खड़े करती हैं। अग्नि सुरक्षा केवल अनापत्ति प्रमाणपत्र हासिल करने तक सीमित नहीं रह सकती। अग्निशमन उपकरणों का चालू रहना, विद्युत व्यवस्था का सुरक्षित होना और कर्मचारियों को आपात स्थिति से निपटने का प्रशिक्षण मिलना भी उतना ही जरूरी है।
न्यू लाइफ मल्टी स्पेशियलिटी हॉस्पिटल अग्निकांड : एक अगस्त 2022 : शिवनगर के पास चंडालभाटा स्थित इस अस्पताल में लगी भीषण आग में करीब आठ लोगों की मौत हो गई थी, जिनमें अधिकांश स्टाफ था। जांच में सामने आया था कि अस्पताल में एक ही एग्जिट गेट था, फायर एनओसी नहीं थी। बिजली काटने के बाद एक घंटे में आग पर काबू पाया गया था। सरकार ने मृतकों को पांच-पांच लाख मुआवजा दिया।
जबलपुर हॉस्पिटल - 2024-25 : यहां जनरेटर रूम में ओवरहीटिंग से आग लगी।
कटंगी स्वास्थ्य केंद्र : 2024 : शार्ट सर्किट से ट्रांसफार्मर और मीटर में आग लगी।
शासकीय और निजी अस्पतालों में छोटे हादसे : पिछले दो साल में सीएमएचओ कार्यालय के आंकड़ों के अनुसार जिले में 12 से अधिक अस्पतालों में शार्ट सर्किट, एसी ब्लास्ट और जनरेटर में आग की छोटी-बड़ी घटनाएं दर्ज हुई हैं।
पैटर्न एक ही-सख्ती सील, फिर समझौता
बहरहाल इस घटना के बाद एक बार फिर अस्पतालों में मरीजों की सुरक्षा के इंतजाम और जिम्मेदारों के निगरानी तंत्र की पोल कर रख दी है। इस तरह हर बड़ी घटना के बाद पैटर्न एक जैसा रहता है। पहले दिन - हॉस्पिटल सील, पंजीयन निलंबित, एफआइआर, सभी 150 से अधिक निजी अस्पतालों की जांच के आदेश। दूसरे हफ्ते - फायर विभाग की रिपोर्ट, 30 से 40 फीसदी अस्पतालों में फायर सिस्टम फेल मिलना।
तीसरे हफ्ते - धीरे-धीरे एनओसी जमा करवाकर अस्पतालों का फिर से खुल जाना। न्यू लाइफ हादसे के बाद भी 2022 में 45 अस्पतालों को नोटिस दिए गए थे, इसके साथ ही 12 सील हुए थे, आज सभी संचालित हैं। इसके पीछे कारण साफ है - फायर सेफ्टी ऑडिट साल में एक बार कागज पर हो जाता है, एक्सपायरी सिलिंडर नहीं बदले जाते, फायर एक्जिट पर स्टोर बना दिया जाता है, इलेक्ट्रिकल लोड आडिट नहीं होता, स्टाफ को माक ड्रिल की ट्रेनिंग नहीं दी जाती।
आग की घटनाओं से निपटने नियम जानना जरूरी
मध्य प्रदेश अग्निशमन व आपातकालीन सेवा सामान्य नियम-2026 को लागू कर दिए गया है। शैल्बी हॉस्पिटल सहित लगातार हो रही आग की घटनाओं के बाद सरकार ने अधिसूचना जारी की है। नए नियम हर अस्पताल, मॉल, स्कूल, होटल के लिए अनिवार्य होंगे।
हर साल 30 जून तक फायर ऑडिट अनिवार्य : अब सिर्फ एक बार एनओसी लेकर काम नहीं चलेगा। अस्पताल भवनों को हर साल 30 जून तक फायर आडिट रिपोर्ट सक्षम अधिकारी को जमा करनी होगी।
अब न्यूनतम दो फीसदी फायर टैक्स लगेगा : नगरीय क्षेत्र के सभी भवनों और जमीनों पर अब संपत्ति कर के साथ न्यूनतम दो फीसदी फायर टैक्स लगेगा। यह पैसा दमकल विभाग के इंफ्रास्ट्रक्चर को मजबूत करने और 10 मिनट में रिस्पांस टाइम सुनिश्चित करने के लिए इस्तेमाल होगा।
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प्रशिक्षित फायर सुपरवाइजर अनिवार्य : अस्पताल परिसरों में प्रशिक्षित फायर सेफ्टी सुपरवाइजर की नियुक्ति अनिवार्य होगी। तय समय में नियुक्ति न करने पर 10 रुपये प्रति वर्ग मीटर पेनल्टी और उसके बाद भी पालन न करने पर 10 हजार रुपये प्रतिदिन तक का जुर्माना लगेगा।
बिना फायर एनओसी के भवन का उपयोग करने पर पांच लाख रुपये तक का जुर्माना। सुरक्षा उपायों में लापरवाही पर 50 हजार, अफवाह फैलाने पर 20 हजार का जुर्माना। लगातार उल्लंघन पर पांच हजार रुपये प्रतिदिन जुर्माना।
गर निगम के फायर आफिसर से स्थलीय निरीक्षण और अधिकृत इंजीनियर की सत्यापित फायर आडिट रिपोर्ट, विद्युत सुरक्षा विभाग से इलेक्ट्रिकल सेफ्टी ऑडिट व अग्निकांड का विस्तृत तथ्यात्मक प्रतिवेदन। तब तक कोई नया मरीज भर्ती नहीं होगा।
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