
नईदुनिया प्रतिनिधि, जबलपुर। शहर की बिगड़ती ट्रैफिक व्यवस्था में सुधार और उसकी मॉनिटरिंग के लिए राज्य सरकार ने हाई कोर्ट के समक्ष पांच विशेषज्ञों के नाम प्रस्तावित किए हैं। हालांकि, इन नामों को अभी अंतिम रूप नहीं दिया गया है।
मुख्य न्यायाधीश अल्पेश यशवंत कोगजे व न्यायमूर्ति विवेक जैन की युगलपीठ ने राज्य सरकार से पूछा कि क्या जबलपुर की तर्ज पर प्रदेश के अन्य शहरों में भी ट्रैफिक सुधार के लिए विशेषज्ञ समिति गठित की जा सकती है।
समिति में शामिल नाम
याचिकाकर्ता डॉक्टर पीजी नाजपांडे व रजत भार्गव की ओर से अधिवक्ता दिनेश उपाध्याय ने पैरवी की। सुनवाई के दौरान राज्य सरकार की ओर से उप-महाधिवक्ता स्वप्निल गांगुली ने विशेषज्ञों के पांच नाम प्रस्तावित किए। इनमें शासकीय इंजीनियरिंग कॉलेज जबलपुर के प्राचार्य, मैनिट भोपाल के विशेषज्ञ, सेवानिवृत्त एडीशनल एसपी ट्रैफिक, स्मार्ट सिटी के ट्रैफिक विशेषज्ञ और एक आईटी विशेषज्ञ को शामिल किया गया है।
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जबलपुर में ट्रैफिक समस्या गंभीर
याचिका में कहा गया है कि जबलपुर में ट्रैफिक सिग्नल, जाम और अतिक्रमण की समस्या लगातार गंभीर होती जा रही है। याचिकाकर्ता की ओर से तर्क दिया गया कि पूर्व में कोर्ट के निर्देश के बावजूद ट्रैफिक व्यवस्था में अपेक्षित सुधार नहीं हुआ है और इसका खामियाजा आम नागरिकों को भुगतना पड़ रहा है।
13 अक्टूबर को होगी अगली सुनवाई
उल्लेखनीय है कि नौ सितंबर को सुनवाई के दौरान कोर्ट ने जबलपुर में ट्रैफिक सुधार और मॉनीटरिंग के लिए विशेषज्ञ समिति गठित करने के निर्देश दिए थे। सोमवार की सुनवाई में सरकार ने प्रस्तावित विशेषज्ञों के नाम कोर्ट के समक्ष रखे। हाईकोर्ट ने राज्य सरकार को ट्रैफिक सुधार की प्रगति रिपोर्ट प्रस्तुत करने के निर्देश दिए हैं। मामले की अगली सुनवाई 13 अक्टूबर को होगी।