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नईदुनिया प्रतिनिधि, जबलपुर। मध्य प्रदेश के निजी मेडिकल कॉलेजों में आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग (ईडब्ल्यूएस) के विद्यार्थियों को आरक्षण का लाभ नहीं मिलने पर हाई कोर्ट ने कड़ी नाराजगी जताई है। न्यायमूर्ति विवेक अग्रवाल की अध्यक्षता वाली विशेष युगलपीठ ने केंद्र और राज्य सरकार सहित सभी आठ प्रतिवादियों को चार सप्ताह के भीतर पूर्व आदेश का पालन सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं।
कोर्ट ने स्पष्ट चेतावनी दी कि निर्धारित अवधि में अनुपालन नहीं होने पर संबंधित पक्षों के विरुद्ध अवमानना की कार्रवाई की जाएगी।
सीटों की संख्या बढ़ाने के दिए थे निर्देश
मामले की शुरुआत जबलपुर के छात्र अथर्व चतुर्वेदी की कानूनी पहल से हुई थी। हाई कोर्ट ने 17 दिसंबर 2024 को पारित आदेश में निजी मेडिकल कॉलेजों में ईडब्ल्यूएस आरक्षण का लाभ सुनिश्चित करने के लिए सीटों की संख्या बढ़ाने के निर्देश दिए थे।
इसके बावजूद आदेश का पालन नहीं होने पर न्यायालय ने मामले में स्वतः संज्ञान लेते हुए संबंधित पक्षों की जवाबदेही तय करने की दिशा में सख्त रुख अपनाया।
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सुनवाई के दौरान केंद्र सरकार की ओर से स्पष्ट किया गया कि ईडब्ल्यूएस आरक्षण लागू करने पर उसे कोई आपत्ति नहीं है, लेकिन इसके लिए निर्धारित नियमों और संबंधित आयोग की मंजूरियों का पालन आवश्यक है।
न्यायालय ने इस मुद्दे पर सवाल उठाया कि जब काउंसिलिंग प्रक्रिया के माध्यम से अन्य श्रेणियों के विद्यार्थियों को आरक्षण का लाभ दिया जा रहा है, तो आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग के विद्यार्थियों को इससे वंचित क्यों रखा जा रहा है।
मामले में चिकित्सा शिक्षा विभाग के प्रमुख सचिव, तकनीकी शिक्षा, कौशल विकास एवं प्रशिक्षण विभाग के सचिव और संचालक, लोक स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा विभाग के आयुक्त, नेशनल मेडिकल कमीशन, भारत सरकार के स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय के सचिव तथा जबलपुर के सुख सागर मेडिकल कॉलेज व हॉस्पिटल सहित संबंधित पक्षों को निर्देश जारी किए गए हैं।
हाई कोर्ट ने चार सप्ताह की समयसीमा निर्धारित करते हुए स्पष्ट कर दिया है कि पूर्व आदेश का पालन सुनिश्चित करना संबंधित अधिकारियों और संस्थानों की जिम्मेदारी है। निर्धारित अवधि में अनुपालन नहीं होने की स्थिति में अवमानना की कार्रवाई का सामना करना पड़ सकता है।
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