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हाई कोर्ट ने कहा-निपटारे में देरी के लिए स्थगन ही जिम्मेदार नहीं, न्यायाधीशों व न्यायिक सुविधाओं की कमी भी प्रमुख कारण

मुख्य न्यायाधीश अल्पेश यशवंत कोगजे व न्यायमूर्ति विवेक रुसिया की युगलपीठ ने मामलों के शीघ्र निपटारे के लिए व्यापक दिशा-निर्देश जारी करने की मांग वाली ...और पढ़ें

By Ramkrishan paramhans pandeyEdited By: Dheeraj kumar Bajpai
Publish Date: Wed, 23 Sep 2026 06:54:43 PM (IST)Updated Date: Wed, 23 Sep 2026 06:54:43 PM (IST)
हाई कोर्ट ने कहा-निपटारे में देरी के लिए स्थगन ही जिम्मेदार नहीं, न्यायाधीशों व न्यायिक सुविधाओं की कमी भी प्रमुख कारण
कोर्ट ने कहा कि न्यायालय कक्षों, आधारभूत सुविधाओं, मंत्रालयीन कर्मचारियों और न्यायाधीशों की कमी पर राज्य सरकार को आवश्यक कदम उठाए।

HighLights

  1. हर मामले के लिए एक समान प्रक्रिया संभव नहीं
  2. सुप्रीम कोर्ट के विभिन्न न्यायदृष्टांतों का हवाला दिया
  3. पहले सुनवाई का उचित अवसर देना आवश्यक

नईदुनिया प्रतिनिधि, जबलपुर। हाई कोर्ट ने एक महत्वपूर्ण आदेश में साफ किया कि लंबित मामलों के निपटारे में देरी का एकमात्र कारण अनावश्यक स्थगन नहीं है। न्यायाधीशों की कमी के अलावा न्यायालय कक्ष, आधारभूत सुविधाओं, मंत्रालयीन कर्मचारियों और रिक्त पदों की समस्या भी मामलों के निपटारे को प्रभावित कर रही है।

कई दिशा-निर्देश जारी करने की मांग रखी

याचिकाकर्ताओं की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता अशोक लालवानी ने सुप्रीम कोर्ट के विभिन्न न्यायदृष्टांतों का हवाला दिया। उन्होंने अनावश्यक स्थगन, झूठे दावों, गलत दस्तावेजों एवं शपथ-पत्रों और बेबुनियाद मुकदमेबाजी पर प्रभावी रोक लगाने तथा दोषी पक्ष पर वास्तविक लागत व हर्जाना लगाने संबंधी दिशा-निर्देश जारी करने की मांग रखी।


प्रत्येक मामले की परिस्थितियां अलग होती हैं

हाई कोर्ट ने स्पष्ट किया कि प्रत्येक मामले की परिस्थितियां अलग होती हैं। इसलिए अंतरिम आवेदनों अथवा स्थगन के संबंध में ऐसा कोई निश्चित नियम या मानक प्रक्रिया नहीं बनाई जा सकती, जो हर मामले में समान रूप से लागू हो।

पक्ष को सुनवाई का उचित अवसर दें

दीवानी मुकदमे में किसी आवेदन पर निर्णय लेने से पहले संबंधित पक्ष को सुनवाई का उचित अवसर देना आवश्यक है।

राज्य सरकार को आवश्यक कदम उठाने चाहिए

कोर्ट ने कहा कि न्यायालय कक्षों, आधारभूत सुविधाओं, मंत्रालयीन कर्मचारियों और न्यायाधीशों की कमी पर राज्य सरकार को आवश्यक कदम उठाने चाहिए। व्यापक दिशा-निर्देश जारी करने का आधार नहीं पाते हुए खंडपीठ ने जनहित याचिका का पटाक्षेप कर दिया।

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