
नईदुनिया प्रतिनिधि, जबलपुर। कटनी से बीना बीच रेलवे की तीसरी रेल लाइन बनकर तैयार है। पश्चिम मध्य रेल की यह लाइन 263 किलोमीटर लंबी है। परियोजना पर सात वर्ष से कार्य जारी था। सागर-कटनी रेलखंड पर दो टुकड़ों में रेल लाइन बिछना बाकी था। जिसका कार्य गत सप्ताह पूरा होते ही तीसरी रेल लाइन का काम पूरा हो गया है। रेल जोन को रेल संरक्षा आयुक्त की रिपोर्ट का इंतजार है।
उनकी अनुमति प्राप्त होते ही तीसरी रेल लाइन पर कटनी से बीना तक दोनों छोर के बीच ट्रेनें दौड़ने लगेगी। संभावना है कि अगले माह तक तीसरे रेल लाइन के पूरे भाग में ट्रेनें चलना शुरू हो जाएगी। इससे रेलमार्ग से मालगाड़ी और यात्री ट्रेनों का जल्दी गुजरना संभव होगा।
कटनी-बीना के बीच तीसरी लाइन का अधिकांश भाग बन चुका था। सिर्फ बांदकपुर-घटेरा और पथरिया-असलाना के बीच कार्य शेष था। यह दोनों रेलखंड मिलकर कुल 25 किलोमीटर लाइन का काम गत सप्ताह पूरा किया गया। दोनों रेलखंड पर सीआरएस ने 120 किलोमीटर प्रतिघंटा की गति से ट्रेन दौड़ाकर ट्रायल लिया है। जो कि आरंभिक रुप से सफल रहा है। इसके साथ ही कटनी से बीना तक का रेलखंड अब तीन रेल लाइन का बन गया है।
बीना-कटनी तीसरी रेल लाइन निर्माण को वर्ष 2016 में स्वीकृति प्राप्त हुई थी। वित्तीय वर्ष 2017-18 में तीसरी लाइन बनाने का काम प्रारंभ हुआ। लगभग तीन हजार करोड़ की लागत वाली परियोजना की समय-सीमा वर्ष 2022 निर्धारित थी। कोरोना काल में परियोजना का कार्य प्रभावित हुआ। इसके कारण समय पर तीसरी लाइन बनकर तैयार नहीं हो सकी। उसके बाद गत तीन वर्षों में तेजी से काम किया गया। रेलवे ने निर्माण पूरा किया।
बीना-कटनी रेलखंड पर छोटे बड़े मिलाकर 30 से ज्यादा रेलवे स्टेशन है। अभी यह रेलमार्ग दोहरी लाइन का है। बीना के आगे झांसी और कटनी के आगे शहडोल होते हुए बिलासपुर को जोड़ता है। रेलमार्ग पर यात्री ट्रेनों के साथ ही मालगाड़ियों का भारी दबाव है। जिसके कारण कई बार ट्रेनों को आवाजाही के दौरान अलग-अलग स्टेशन के आउटर पर रोकना पड़ता है। तीसरी रेल लाइन का विकल्प उपलब्ध होने से दो रेललाइन पर ट्रेन होने से तीसरी लाइन से ट्रेन को पास दिया जा सकेगा। इससे ट्रेनें तेजी से गंतव्य की ओर बढ़ सकेंगी।