
नईदुनिया प्रतिनिधि, जबलपुर। दीपावली पर वायु और ध्वनि प्रदूषण नियंत्रित करने के लिए जिला प्रशासन ने पटाखों के निर्माण, बिक्री, भंडारण, परिवहन और उपयोग को लेकर प्रतिबंधात्मक आदेश जारी किया है।
जिला दंडाधिकारी एवं कलेक्टर अरुण कुमार विश्वकर्मा ने भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता, 2023 की धारा 163 के तहत यह आदेश जारी करते हुए बेरियम साल्ट सहित प्रतिबंधित रसायनों से बने पटाखों पर रोक लगा दी है। 125 डेसिबल से अधिक ध्वनि तीव्रता वाले पटाखे और पटाखों की लड़ियां भी प्रतिबंधित रहेंगी।
आदेश तत्काल प्रभाव से लागू होकर आगामी आदेश तक प्रभावी रहेगा। प्रशासन ने ग्रीन पटाखों के उपयोग पर जोर देने के साथ लाइसेंसधारी विक्रेताओं के लिए स्व-घोषणा पत्र देना अनिवार्य किया है। प्रतिबंधों के पालन के लिए पटाखों के नमूने लेकर उनकी जांच भी कराई जाएगी।
आदेश के मुताबिक बेरियम साल्ट, मरकरी, लेड, आर्सेनिक, एंटीमोनी, लिथियम और स्ट्रोनटियम क्रोमेट के इस्तेमाल से बने पटाखों की खरीद-बिक्री, भंडारण और परिवहन प्रतिबंधित रहेगा।
विस्फोट स्थल से चार मीटर की दूरी पर 125 डेसीबल से अधिक ध्वनि तीव्रता वाले पटाखे और जुड़ी हुई लड़ियां भी नहीं बेची जा सकेंगी। ई-कामर्स प्लेटफार्म, निजी व्यक्तियों के आनलाइन विक्रय और गैर-लाइसेंसी बिक्री पर भी रोक रहेगी।
अस्पताल, नर्सिंग होम, स्वास्थ्य केंद्र, शिक्षण संस्थान, न्यायालय और धार्मिक स्थलों जैसे शांत क्षेत्रों के 100 मीटर के दायरे में पटाखे चलाना प्रतिबंधित रहेगा। आयुध निर्माणी, पेट्रोल पंप, गैस गोदाम, गैस एजेंसी और पटाखा बाजार जैसे ज्वलनशील स्थानों पर भी आतिशबाजी नहीं की जा सकेगी।
प्रत्येक पटाखा लाइसेंसधारी को संबंधित अनुविभागीय दंडाधिकारी के समक्ष स्व-घोषणा पत्र देना होगा कि वह प्रतिबंधित पटाखों का निर्माण, परिवहन, विक्रय या भंडारण नहीं कर रहा है। संदेह होने पर प्रशासन पटाखों के नमूने लेकर प्रदूषण नियंत्रण मंडल की विजय नगर स्थित प्रयोगशाला में जांच के लिए भेजेगा। प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड दीपावली से सात दिन पहले और सात दिन बाद तक वायु गुणवत्ता की निगरानी करेगा तथा पटाखों के नमूनों का विश्लेषण भी करेगा।
प्रशासन ने आतिशबाजी के बाद निकलने वाले कचरे को प्राकृतिक और पेयजल स्रोतों को प्रदूषित करने वाले स्थानों पर फेंकने से मना किया है। पटाखों का कचरा एकत्रित कर संबंधित स्थानीय निकाय के सफाई कर्मचारियों को सौंपना होगा।
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