
नईदुनिया प्रतिनिधि, जबलपुर। जबलपुर शहर में पेयजल की लाइनें काफी पुरानी और जर्जर हो चुकी हैं, जो अक्सर नालियों और सीवेज लाइनों के साथ गुजरती हैं, जिससे गंदा पानी घरों तक पहुंच जाता है, और यह ई-कोलाई जैसे बैक्टीरिया से युक्त होने के कारण स्वास्थ्य के लिए खतरा बन गया है। शहर के कई इलाकों में 40-50 साल पुरानी पाइपलाइनें हैं, जिन्हें बदला नहीं गया है।
50 प्रतिशत से ज़्यादा पाइपलाइनें नालियों और सीवेज के साथ बिछी हैं, जिससे रिसाव होता है। यह भी महत्वपूर्ण है कि नगर निगम रखरखाव पर खर्च कर रहा है, लेकिन समस्या बड़ी है और घटनाओं के बाद जांचें तेज की गई है। नगर निगम का जल विभाग लीकेज सुधारने व नालियों से गुजरने वाली पेयजल लाइन को पृथक करने पर फोकस कर रहा है।
शहर में भी हालात फिलहाल ठीकठाक है। लेकिन सावधानी जरूरी है। आरोप है कि शहर के कई इलाकों में पेयजल पाइपलाइन नालों और गंदे पानी के बीच से होकर घरों तक पहुंच रहा है, जिससे आम नागरिकों की सेहत खतरे में है। गौरीघाट, रामपुर छापर, शक्तिनगर, धनवंतरी नगर, सिविल लाइन व त्रिमूर्ति नगर 90 क्वार्टर क्षेत्र में नगर निगम द्वारा सप्लाई किया जा रहा पानी पिछले डेढ़ साल से दूषित आ रहा है।
शिकायत के बाद प्लंबर भेजे गए, लेकिन समस्या जस की तस बनी रही। अनेक रहवासियों ने मजबूरी में आरओ लगाया और अनेक जगह पेयजल को उबालकर उपयोग में ले रहे हैं। मंडी मदार टेकरी व अधारताल क्षेत्र में अनेक जगह लीकेज पानी की लाइन में देखी जा सकती है। जिसे लेकर रहवासी नगर निगम जोन अधिकारियों को अवगत करा रहे हैं।
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शहरवासियों को शुद्ध पेयजल उपलब्ध कराने प्रयासरत हैं और पहली प्राथमिकता उन लाइनों को दे रहे हैं जो गंदे नाले व नालियों से होकर गुजर रहीं हैं। कई वार्डों में पेयजल सप्लाई के दौरान लीकेज भी थी उन्हें भी सुधारा जा रहा है। - कमलेश श्रीवास्तव कार्यपालन यंत्री ननि जल विभाग