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200 से 250 परिवारों को हटाने का मामला: लक्ष्मीपुर बस्ती वालों ने जबलपुर हाई कोर्ट में रखा अपना पक्ष, अदालत ने फैसला रखा सुरक्षित

जबलपुर हाई कोर्ट ने एमआर-फोर से लगी लक्ष्मीपुर बस्ती में रह रहे करीब 200 से 250 परिवारों को हटाने के मामले में फैसला सुरक्षित कर लिया।

By Digital DeskEdited By: Nitin Kumar
Publish Date: Sun, 20 Sep 2026 11:39:03 AM (IST)Updated Date: Sun, 20 Sep 2026 11:41:51 AM (IST)
200 से 250 परिवारों को हटाने का मामला: लक्ष्मीपुर बस्ती वालों ने जबलपुर हाई कोर्ट में रखा अपना पक्ष, अदालत ने फैसला रखा सुरक्षित
हाई कोर्ट ने सुनवाई के बाद फैसला रखा सुरक्षित, फाइल फोटो

HighLights

  1. लक्ष्मीपुर बस्ती वालों ने हाई कोर्ट में रखा पक्ष
  2. 200 से 250 परिवारों को हटाने का मामला
  3. बस्ती वालों ने पुनर्वास को लेकर जताई आपत्ति

नईदुनिया प्रतिनिधि, जबलपुर। हाई कोर्ट ने एमआर-फोर से लगी लक्ष्मीपुर बस्ती में रह रहे करीब 200 से 250 परिवारों को हटाने के मामले में जबलपुर नगर निगम, जबलपुर विकास प्राधिकरण, केसरवानी शिक्षा समिति तथा बस्ती के रहवासियों का पक्ष सुनने के बाद प्रकरण आदेश के लिए सुरक्षित कर लिया।

1990 में हुआ जमीन का अधिग्रहण

न्यायमूर्ति विशाल मिश्रा की एकलपीठ के समक्ष हस्तक्षेपकर्ताओं की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता शशांक शेखर व अधिवक्ता रविंद्र कुमार गुप्ता ने पक्ष रखा। उन्होंने दलील दी कि लक्ष्मीपुर की करीब आठ हेक्टेयर भूमि का वर्ष 1990 में अधिग्रहण किया गया था।


पट्टाधारी परिवारों ने जताई आपत्ति

क्षेत्र में पहले से रह रहे कई परिवारों को वर्ष 1998 में नगरीय क्षेत्र के भूमिहीन अधिनियम के तहत 28 वर्ष की पट्टेदारी दी गई थी। अधिवक्ताओं ने तर्क दिया कि वर्तमान में यहां करीब 200 से 250 परिवार रह रहे हैं। इनमें पट्टाधारी परिवार भी शामिल हैं।

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उनका कहना था कि बिना सुनवाई, पुनर्वास और मुआवजे की प्रक्रिया पूरी किए इन्हें हटाया नहीं जा सकता। हस्तक्षेपकर्ताओं ने यह भी आरोप लगाया कि पूर्व में बस्ती खाली कराने की कार्रवाई के दौरान प्रशासन ने बिजली काटने और अतिक्रमण हटाने की तैयारी की थी, जिसे हाई कोर्ट के समक्ष मामला आने के बाद रोका गया।

उनका कहना था कि पिछले वर्षों में क्षेत्र में सड़क, बिजली और पानी की सुविधाएं भी विकसित की गई हैं। सभी पक्षों को सुनने के बाद कोर्ट ने आदेश सुरक्षित कर लिया।

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