
नईदुनिया प्रतिनिधि, जबलपुर। पुराना 333 मीटर सीमेंट ट्रैक हटाकर 250 मीटर का अंतरराष्ट्रीय मानकों वाला बैंक्ड ट्रैक, फ्लडलाइट, आधुनिक जिम, रेसिंग साइकिलें और 50 बेड का हाॅस्टल प्रस्तावित है।
खेल विभाग के अनुसार वेलोड्रम के कायाकल्प के लिए करीब 18 करोड़ रुपये की योजना प्रस्तावित है। डीपीआर अंतिम चरण में है। स्वीकृति के बाद अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुरूप ट्रैक और अन्य सुविधाओं का विकास किया जाएगा।
2004-05 में जबलपुर में तीसरी नेशनल साइकिलिंग चैंपियनशिप के लिए इस वेलोड्रम का निर्माण कराया गया था। उस समय इसे प्रदेश का पहला और इकलौता बैंक्ड ट्रैक वेलोड्रम कहा गया था। निर्माण के समय यह पंजाब के बाद राष्ट्रीय स्तर का दूसरा वेलोड्रम था, जिसे राष्ट्रीय प्रतियोगिताओं के लिए बनाया गया था।
333 मीटर का यह ट्रैक सीमेंट से बना है, जबकि अंतरराष्ट्रीय मानक 250 मीटर लकड़ी के ट्रैक का है। शुरुआती पांच साल यहां रोज अभ्यास होता था, राष्ट्रीय शिविर भी लगे, लेकिन 2015-16 के बाद मेंटेनेंस बंद हो गया।
खेल विभाग के पास न तो स्थाई कोच रहा, न ही बजट। धीरे-धीरे ट्रैक पर घास उग आई और बाउंड्रीवाल टूट गई। यह भी महत्वपूर्ण है कि उचित रख-रखाव और उपयोग के अभाव में यह ट्रैक वर्तमान में क्षतिग्रस्त हो चुका है और इस पर चारों ओर दरारें आ गई हैं।
नया ट्रैक : पुराने सीमेंट ट्रैक को तोड़कर 250 मीटर का अंतरराष्ट्रीय नया बैंक्ड ट्रैक बनेगा, जिस पर राष्ट्रीय स्तर की स्पर्धा हो सके।
लाइट और जिम : फ्लड लाइट, आधुनिक जिम, 20 अत्याधुनिक रेसिंग साइकिलें मिलेगी।
हाॅस्टल : 50 बेड का बालक-बालिका हास्टल ताकी बाहर के खिलाड़ी यहीं रहकर अभ्यास कर सकें।
कभी राष्ट्रीय साइकिलिंग प्रतियोगिताओं और शिविरों की मेजबानी कर चुका रानीताल स्पोर्ट्स काम्प्लेक्स का वेलोड्रम अब अपनी ही बदहाली का गवाह बना हुआ है।
जिस ट्रैक पर कभी साइकिलों की रफ्तार और खिलाड़ियों की मेहनत दिखाई देती थी, वहां आज दरारें, खराब लाइटें और सुविधाओं का अभाव व्यवस्था की अनदेखी को उजागर करता है।
करीब दो दशक पहले चार करोड़ रुपये खर्च कर बनाया गया प्रदेश का एकमात्र ट्रैक रेस वेलोड्रम अब उपयोग के लिहाज से जर्जर स्थिति में पहुंच चुका है।
शुरुआती वर्षों में यहां नियमित अभ्यास के साथ राष्ट्रीय शिविर भी लगे, लेकिन स्थायी कोच, रखरखाव और बजट की कमी ने धीरे-धीरे साइकिलिंग गतिविधियों को खत्म कर दिया।
2015-16 के बाद ट्रैक का नियमित मेंटेनेंस तक नहीं हो सका। फीडर सेंटर में 25 से ज्यादा खिलाड़ी अभ्यास करते थे, लेकिन समय के साथ खिलाड़ी और कोच दोनों दूर होते गए। अब करीब 18 करोड़ रुपये की योजना इस तस्वीर को बदलने का दावा कर रही है।
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