नईदुनिया प्रतिनिधि, जबलपुर। जिले में इन दिनों किसानों को फसल बीमा का पैसा बांटा जा रहा है, जो सीधे उनके खाते में पहुंचा रहा है। जिले में इस बार करीब 12 हजार 738 किसानों की फसल को नुकसान पहुंचा, जिस पर उन्हें करीब तीन करोड़ 20 लाख का फसल बीमा की राशि का आवंटन किया गया। इस बार केंद्र से पीएम फसल बीमा का पैसा सीधे खाते में आया, लेकिन इस पैसे को देने के लिए जो सर्वे किया गया, वो किसान के कुल जमीन पर नहीं बल्कि उसके खसरे पर हुआ। इस वजह से खसरे पर मिली मुआवजे की राशि कहीं 5 रुपये है तो कहीं यह राशि 10 हजार तक जा पहुंची है।
इधर जिले में कुंडम तहसील से लगे क्षेत्र में फसल मुआवजा की राशि बहुत कम आवंटित की है। इस तहसील से लगे कुंवर हटा गांव के सभी किसानों को मिलाकर 17 रुपए का बीमा मुआवजा दिया गया है, जो जिले में सबसे कम है। वहीं, मझौली तहसील के चनोटा गांव के किसानों को सबसे ज्यादा करीब 11 लाख 29 हजार रुपए का फसल बीमा मुआवजा दिया है, जिले में बाकी शेष गांव से सबसे ज्यादा है। किसान को नहीं पूरे गांव का जारी किया डाटा इस बार जिले के कृषि विभाग और फसल बीमा देखने वाली एजेंसी, दोनों के पास यह जानकारी नहीं है कि किस किसान को कितनी मुआवजा राशि दी गई है।
कृषि विभाग का कहना है कि पीएम फसल बीमा योजना में किसानों के खाते में सीधे मुआवजे की राशि पहुंची, लेकिन वहां से जो जानकारी भेजी गई, वो तहसील और गांव स्तर पर है। यानि गांव में सभी किसानों को बांटी गई फसल बीमा की राशि का डाटा जारी हुआ। इसमें एक गांव के किसानों को 17 रुपये तक का मुआवजा दिया गया । कुंडम तहसील के गांव कुंवर हटा गांव के सभी किसानों को महज 17 रुपए का बीमा मुआवजा दिया गया है, जो जिले में सबसे कम है। इससे यहां के किसान नाराज हैं।
उनका कहना है कि बीमा कंपनी और सरकार ने किस आधार पर यह नुकसान का अनुमान लगाया है। यह पूरी तरह से गलत और किसानों के साथ छल करने की तरह है। सैटेलाइट पद्धति से सर्वे किसान हित में नहीं है। किसानों ने सेटलाइट द्वारा किए जा रहे सैटेलाइट पद्धति आधारित आकलन को गलत ठहराया।
किसान संघ के राघवेंद्र पटेल ने बताया कि सैटेलाइट पद्धति से कैसे फसल के नुकसान का आंकलन हो सकता है। क्या सैटेलाइट बता सकता है कि पाला या वर्षा से प्रभावित फसल में लगे फूल से फल बनेंगे की नहीं, कितना उत्पादन आएगा, फसल जीवित भी रहेगी या नहीं, पौधे की जड़े गल रही हैं तो वह पौधा आगे कुछ दिन में सूख जाएगा या फल फूल नहीं आएंगे, लेकिन खेत में पौधा हरा रहेगा।
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सैटेलाइट फसल की घेंटी में लगे दाने को फोड़कर तो फोटो नहीं ले सकता कि कितना नुकसान है तो फसल के बीमा का वास्तविक आंकलन संभव ही नहीं है। यह प्रक्रिया अपनाई गई तो किसान को फसल बीमा की राशि प्रति एकड़ 2 व 5 रुपए आना तय है। प्रीमियम हजारों रुपए में देना होगा। किसान इसका पुरजोर विरोध कर रहें है।
वहीं, कृषि विभाग के सहायक उपसंचालक रवि आम्रवंशी ने कहा कि किसानों के खाते में बीमा की राशि जा रहा है। इस वजह से हमें सिर्फ गांव के कुल किसानों को मिले मुआवजे की राशि की जानकारी है। यहां एक बैंक नहीं बल्कि हर नेशनल बैंक के खातों में किसानों को पैसा पहुंचा है।