कैमोर में 10 लाख टन एस्बेस्टस कचरे से गंभीर बीमारियों का खतरा, हाई कोर्ट ने मांगा जवाब
कटनी जिले के कैमोर में दशकों से जमा एस्बेस्टस युक्त औद्योगिक कचरे और उससे उत्पन्न स्वास्थ्य संकट पर हाई कोर्ट ने संज्ञान लिया है।
Publish Date: Thu, 05 Nov 2026 08:28:36 PM (IST)Updated Date: Thu, 05 Nov 2026 08:32:43 PM (IST)
हाई कोर्ट ने नोटिस जारी कर मांगा जवाब, फाइल फोटोHighLights
- एस्बेस्टस कचरे से गहराया स्वास्थ्य संकट
- हजारों लोगों की सेहत पर खतरे का दावा
- हाई कोर्ट ने नोटिस जारी कर मांगा जवाब
नईदुनिया प्रतिनिधि, जबलपुर। कटनी जिले के कैमोर में दशकों से जमा एस्बेस्टस युक्त औद्योगिक कचरे और उससे उत्पन्न स्वास्थ्य संकट पर हाई कोर्ट ने संज्ञान लिया है। करीब 10 लाख टन दूषित मिट्टी के अनुमान का हवाला देते हुए दायर जनहित याचिका पर न्यायालय ने केंद्र और राज्य सरकार सहित संबंधित पक्षकारों को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है।
समाजसेवी आशुतोष दीक्षित मनु और कैमोर निवासी गणेश राव की जनहित याचिका के अनुसार, ब्रिटिश कंपनी टर्नर एंड न्यूआल पीएलसी ने 1934 में कैमोर में एस्बेस्टस फैक्ट्री स्थापित की थी। इसके औद्योगिक अपशिष्ट का वर्षों तक आसपास के क्षेत्रों में निस्तारण किए जाने से आवासीय और सार्वजनिक स्थानों पर प्रदूषण फैलने की आशंका है।
याचिकाकर्ताओं ने कनाडाई संस्था ईसीओएच की रिपोर्ट का हवाला देते हुए करीब 10 लाख टन एस्बेस्टस दूषित सतही मिट्टी होने का अनुमान प्रस्तुत किया है। लगभग 5.65 लाख वर्ग मीटर क्षेत्र में प्रदूषण और हजारों लोगों के संपर्क में आने की आशंका भी जताई गई है।
एस्बेस्टस के सूक्ष्म रेशों से एस्बेस्टोसिस, फेफड़ों का कैंसर और मेसोथेलियोमा जैसी गंभीर बीमारियां हो सकती हैं। याचिका में वर्ष 2013 से आयोजित चिकित्सा शिविरों, जांच रिपोर्टों और सैकड़ों प्रभावितों के मेडिकल रिकॉर्ड का उल्लेख किया गया है।
मांग की गई है कि मिट्टी और हवा के नमूनों की स्वतंत्र वैज्ञानिक जांच कराई जाए। प्रभावित नागरिकों और पूर्व कर्मचारियों की स्वास्थ्य जांच, उपचार, पुनर्वास तथा नियमानुसार मुआवजा सुनिश्चित किया जाए।
याचिका में फैक्ट्री के स्वामित्व में हुए बदलावों का उल्लेख करते हुए टर्नर एंड न्यूआल, बेल्जियम की ईटेक्स और वर्तमान स्वामित्व वाली एवरेस्ट इंडस्ट्रीज लिमिटेड से जुड़ी जिम्मेदारियों का सवाल भी उठाया गया है।
मांग है कि प्रदूषण की पुष्टि होने पर दूषित कचरे के सुरक्षित निस्तारण और पर्यावरणीय पुनर्स्थापन की समयबद्ध कार्ययोजना बनाई जाए।