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नईदुनिया प्रतिनिधि, जबलपुर। हाई कोर्ट के न्यायमूर्ति विशाल धगट की एकलपीठ के हस्तक्षेप के बाद नर्सिंग कॉलेजों में विभिन्न फैकल्टीज की भर्ती में अब पुरुष उम्मीदवारों को उनका अधिकार मिला है। कर्मचारी चयन मंडल (ईएसबी) ने संशोधित विज्ञापन जारी कर पुरुष उम्मीदवारों से भी आवेदन आमंत्रित किए हैं। महिलाओं के लिए सौ प्रतिशत आरक्षण वाली शर्त हटाई। इसके अलावा आवेदन करने की अंतम तिथि सात जनवरी से बढ़ाकर 13 जनवरी कर दी। ईएसबी के जवाब को रिकॉर्ड पर लेते हुए कोर्ट ने याचिका का निराकरण कर दिया।
याचिकाकर्ता जबलपुर निवासी नौशाद अली सहित कई पुरुष उम्मीदवारों की ओर से याचिका दायर कर महिलाओं को शत-प्रतिशत आरक्षण देने को चुनौती दी गई थी। याचिकाकर्ता की ओर से अधिवक्ता विशाल बघेल ने पक्ष रखा। उन्होंने दलील दी कि प्रदेश के शासकीय नर्सिंग कॉलेजों में असिस्टेंट, एसोसिएट प्रोफेसर व अन्य पदों पर महिलाों को 100 प्रतिशत आरक्षण दे दिया गया है।
उन्होंने बताया कि मध्य प्रदेश कर्मचारी चयन मंडल की ग्रुप-1 सब ग्रुप-2 संयुक्त भर्ती परीक्षा 2025 के विज्ञापन में असिस्टेंट प्रोफेसर तथा एसोसिएट प्रोफेसर सहित ट्यूटर के कुल 286 पदों पर महिला उम्मीदवारों को 100 प्रतिशत आरक्षण दिया गया है। प्रदेश के सरकारी नर्सिंग कॉलेजों में 40 एसोसिएट प्रोफेसर, 28 असिस्टेंट प्रोफेसर और 218 सिस्टर ट्यूटर के पद भरे जाने हैं। इनमें पुरुष उम्मीदवारों को पूरी तरह बाहर कर दिया गया है। इसमें भर्ती नियम तथा इंडियन नेशनल काउंसिल के सभी मापदंड का उल्लंघन किया गया है।
दलील दी गई कि लोक स्वास्थ्य कल्याण विभाग के द्वारा की जा रही भर्ती में संविधान के अनुच्छेद 14, 15 और 16 तथा भर्ती के नियमों की अनदेखी की जा रही है। यह भी कहा गया कि सरकार की ये भर्ती प्रक्रिया में सुप्रीम कोर्ट के इंद्रा साहनी मामले के 50 प्रतिशत आरक्षण सीमा का उल्लंघन भी है। 7 जनवरी को अंतिम तिथि उक्त पदों के लिए 16 दिसंबर को विज्ञापन जारी किया गया था। इसके लिए 24 दिसंबर से आवेदन आमंत्रित किए गए थे।
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