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जबलपुर के प्राइवेट अस्पतालों में फायर सेफ्टी को लेकर लापरवाही, सरकारी में इंतजाम ही भारी

फायर टैक्स और बिना एनओसी पर 5 लाख जुर्माना व सीलिंग का प्रावधान है, लेकिन हकीकत यह है कि सरकारी अस्पताल खुद इन नियमों का पालन नहीं कर रहे।

By Alok BanerjeeEdited By: Prashant Pandey
Publish Date: Fri, 16 Oct 2026 09:38:28 AM (IST)Updated Date: Fri, 16 Oct 2026 09:53:33 AM (IST)
जबलपुर के प्राइवेट अस्पतालों में फायर सेफ्टी को लेकर लापरवाही, सरकारी में इंतजाम ही भारी
जिला अस्पताल में आग से बचाव के लिए केवल पाइप लाइन लगाई और छोड़ दिया। जिला अस्पताल के महिला वार्ड में लगे अग्निशमन यंत्र में एक्सपायरी डेट नहीं।

HighLights

  1. जबलपुर जिले में 179 से पंजीकृत निजी अस्पताल, 40 प्रतिशत के पास वैध फायर एनओसी नहीं
  2. विक्टोरिया अस्पताल 150 साल पुराना भवन, लकड़ी के दरवाजे, पुरानी फाल्स सीलिंग लगी है
  3. 2024 में जिला अस्पताल के ब्लड बैंक में एसी ब्लास्ट से आग लगी थी, समय रहते बुझाया गया

आलोक बनर्जी, नईदुनिया, जबलपुर। शैल्बी हास्पिटल में आग की घटना के बाद एक बार फिर शहर के अस्पतालों में मरीजों की सुरक्षा को लेकर सवाल खड़े हो गए है। फायर सेफ्टी को लेकर स्वास्थ्य विभाग के आंकड़े बताते हैं कि जिले में 179 से पंजीकृत निजी अस्पताल और डायग्नोस्टिक सेंटर हैं, जिनमें से 30 से 40 प्रतिशत के पास वैध फायर एनओसी नहीं है या उनकी एनओसी एक्सपायर हो चुकी है।

हर हादसे के बाद जांच, नोटिस और सीलिंग की कार्रवाई होती है, लेकिन कुछ महीनों में सब कुछ पहले जैसा हो जाता है। यही कारण है कि आग लगने की घटनाएं कम नहीं हो रही हैं।

स्वास्थ्य विभाग और निगम आमने-सामने

मध्य प्रदेश अग्निशमन व आपातकालीन सेवा सामान्य नियम-2026 लागू होने के बाद अब हर साल 30 जून तक फायर ऑडिट, फायर सुपरवाइजर की नियुक्ति, फायर टैक्स और बिना एनओसी पर 5 लाख जुर्माना व सीलिंग का प्रावधान है। लेकिन हकीकत यह है कि सरकारी अस्पताल खुद इन नियमों का पालन नहीं कर रहे।


विशेषज्ञों का मानना है कि जब तक फायर सेफ्टी को पंजीयन नवीनीकरण से सीधे नहीं जोड़ा जाएगा, माक ड्रिल हर महीने अनिवार्य नहीं होगी और सरकारी अस्पतालों की इलेक्ट्रिक लोड ऑडिट कर पुरानी वायरिंग नहीं बदली जाएगी, तब तक जबलपुर में अस्पताल आग के ढेर पर ही बैठे रहेंगे। अगली बड़ी घटना से पहले सिस्टम जाग जाए, यही सबसे बड़ी जरूरत है।

हर तीन महीने में एक आग की घटना

पिछले 2 साल में 12 से अधिक छोटी-बड़ी आग : जबलपुर हॉस्पिटल में जनरेटर रूम में आग, कटंगी पीएचसी में ट्रांसफार्मर ब्लास्ट, मदनमहल के 3 अस्पतालों में एसी में शार्ट सर्किट। सीएमएचओ कार्यालय में दर्ज शिकायतों के अनुसार हर 3 महीने में एक आग की घटना।

कारण एक ही : ओवरलोडेड बिजली लोड, पुरानी वायरिंग, एसी का 24 घंटे चलना, ऑक्सीजन लाइन के पास ज्वलनशील सामग्री, फायर माक ड्रिल कभी न होना और स्टाफ को एक्सटिंग्विशर चलाना तक न आना। नगर निगम फायर शाखा के अनुसार 60 फीसदी अस्पतालों में फायर हाइड्रेंट में पानी का प्रेशर नहीं, स्प्रिंकलर सिस्टम शोपीस है।

सरकारी मेडिकल कॉलेज और जिला अस्पताल : स्थिति और भी खराब, यदि निजी अस्पतालों में यह हाल है तो सरकारी अस्पतालों की स्थिति और भी डरावनी है।

मेडिकल कॉलेज

  • यह 2300 बेड का अस्पताल है, रोज 1000 से अधिक मरीज। यहां बिजली का लोड 1960-70 की वायरिंग पर चल रहा है।
  • पिछले 1 साल में 4 बार शार्ट सर्किट से धुआं उठने की घटनाएं। आइसीयू, एनआइसीयू और आपरेशन थियेटर में वायरिंग खुले में।
  • फायर आडिट 2023 में हुआ था, जिसमें 17 कमियां निकाली गईं, जिनमें से 12 आज भी वैसी ही हैं।
  • 200 फायर एक्सटिंग्विशर में से 60 एक्सपायर, 8 हाइड्रेंट में से 3 में पानी नहीं आता।
  • फायर एग्जिट में मरीजों के अटेंडेंट सोते हैं, स्ट्रेचर रास्ता रोकते हैं।
  • फायर सुपरवाइजर का पद स्वीकृत है लेकिन नियमित नियुक्ति नहीं।

यह भी पढ़ें- जबलपुर के शैल्बी अस्पताल का पंजीयन निलंबित, आग लगने के बाद स्वास्थ्य विभाग की कार्रवाई

जिला अस्पताल, विक्टोरिया और रानी दुर्गावती अस्पताल

  • विक्टोरिया जिला अस्पताल 150 साल पुराना भवन। लकड़ी के दरवाजे, पुरानी फाल्स सीलिंग जो आग पकड़ती है।
  • 2024 में जिला अस्पताल के ब्लड बैंक में एसी ब्लास्ट से आग लगी थी, समय रहते बुझा ली गई।
  • यहां रोज 800 ओपीडी, एक ही मुख्य गेट। इमरजेंसी में आग लगी तो मरीजों को निकालने के लिए रैंप तक पर्याप्त नहीं।
  • फायर सेफ्टी के लिए 1.5 करोड़ का प्रस्ताव 2 साल से लंबित।

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विभाग स्तर पर दोबारा विचार होगा

शैल्बी हॉस्पिटल प्रबंधन से हमने भवन व इलेक्ट्रिक फिटनेस का नगर निगम से जारी होने वाले प्रमाण पत्र मांगा है, उसके बाद ही उसके पंजीयन पर विभाग स्तर पर दोबारा विचार होगा। साथ ही सभी निजी अस्पताल को एक परिपत्र जारी करते हुए यह कहा गया है कि इसे यह न समझ़ें कि हम आपका अस्पताल बंद कर रहे। व्यवस्थाएं सुधारें, विशेष रूप से महिला व शिशु वार्ड को लेकर ऑनलाइन पोर्टल में प्रविष्ठ होनी चाहिए कि सुरक्षा को लेकर क्या उपाय किए गए हैं। - डॉ. नवीन कोठारी, सीएमएचओ