नईदुनिया प्रतिनिधि, जबलपुर। प्राथमिक कक्षाओं का संचालन करने वाली संस्था क्या आबकारी नियमों के तहत स्कूल की श्रेणी में आएंगी? संजीवनी नगर में एक ही भवन में स्कूल और शराब दुकान संचालित होने के मामले में राज्य सरकार ने हाई कोर्ट में जवाब पेश करके इस कानूनी सवाल पर अपना पक्ष रखा।
सरकार के अनुसार, वर्ष 2023 में आबकारी नियमों में किए गए संशोधन के बाद प्राथमिक कक्षाओं को शराब दुकान के लिए निर्धारित 100 मीटर की प्रतिबंधित दूरी के दायरे में शामिल नहीं किया गया है। संशोधित नियम में मान्यता प्राप्त माध्यमिक विद्यालय, हाई स्कूल, कॉलेज और शासकीय कन्या छात्रावास का उल्लेख है।
दरअसल, मध्य प्रदेश आबकारी अधिनियम, 1915 के तहत बनाए गए सामान्य प्रयुक्ति के नियमों में 31 मार्च 2018 को जारी अधिसूचना में शैक्षणिक संस्था की परिभाषा में प्री-प्राइमरी, प्राइमरी और सेकंडरी स्कूल शामिल थे। इसके बाद 31 मार्च 2023 को जारी राजपत्र अधिसूचना संख्या- 111 के जरिए नियम-एक को प्रतिस्थापित कर दिया गया।
प्राथमिक स्कूल का जिक्र नहीं
यह संशोधन एक अप्रैल 2023 से प्रभावी हुआ। इसमें शराब दुकान के लिए धार्मिक संस्थाओं, मान्यता प्राप्त मिडिल स्कूल, हाई स्कूल, कॉलेज और शासकीय कन्या छात्रावास से 100 मीटर की दूरी का प्रावधान किया गया। नई परिभाषा में प्राथमिक विद्यालय का उल्लेख नहीं है।
मामले में जबलपुर निवासी अजय पटेल की ओर से याचिका दायर की गई है। इसमें कहा गया है कि संजीवनी नगर के मुख्य मार्ग स्थित एक भवन के एक हिस्से में शराब दुकान संचालित हो रही है, जबकि दूसरे हिस्से में संस्कार भारती नाम से स्कूल चलाया जा रहा है।
याचिकाकर्ता ने एक ही भवन में दोनों के संचालन पर आपत्ति जताते हुए जिला कलेक्टर और आबकारी विभाग से शिकायत की थी। कार्रवाई नहीं होने पर हाई कोर्ट की शरण ली।
अनावेदकों को नोटिस जारी मांगा जवाब
पूर्व सुनवाई पर मुख्य न्यायाधीश अल्पेश यशवंत कोगजे और न्यायमूर्ति विवेक जैन की युगलपीठ ने राज्य सरकार, जिला कलेक्टर और आबकारी विभाग सहित अन्य अनावेदकों को नोटिस जारी कर जवाब मांगा था।
शुक्रवार को सुनवाई के दौरान सरकार ने 2023 के संशोधन का हवाला देते हुए अपना जवाब पेश किया। वहीं, कलेक्टर की ओर से बताया गया कि स्कूल और आबकारी विभाग की रिपोर्ट प्राप्त हो चुकी है।
अभ्यावेदन पर निर्णय लेने के लिए अतिरिक्त समय मांगा गया। इस पर युगलपीठ ने जिला कलेक्टर को अगली सुनवाई से पहले याचिकाकर्ता के अभ्यावेदन का निराकरण कर आदेश पारित करने के निर्देश दिए। मामले की अगली सुनवाई 16 नवंबर को निर्धारित की गई है।