
नईदुनिया प्रतिनिधि, जबलपुर। सभी निजी एंबुलेंस मालिकों और संचालकों को अपनी एंबुलेंस का निर्धारित मानकों के अनुरूप पंजीयन कराने और नियमित ऑडिट करवाना अनिवार्य होगा।
डाॅ. कोठारी ने निर्देश दिए हैं कि जिले के सभी निजी एंबुलेंस संचालक आगामी एक सप्ताह के भीतर मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी कार्यालय पहुंचकर अपनी एंबुलेंस का परीक्षण कराएं।
एंबुलेंस में उपलब्ध सुविधाओं की जांच 108 एंबुलेंस सेवा के निर्धारित मानकों के आधार पर की जाएगी। इसके लिए एंबुलेंस को उन्नत जीवन रक्षक सेवा (एएलएस) और बुनियादी जीवन रक्षक सेवा (बीएलएस) श्रेणियों में वर्गीकृत कर पंजीकृत किया जाएगा।
स्वास्थ्य विभाग के अनुसार, निजी एंबुलेंसों में कई बार ऑक्सीजन की पर्याप्त उपलब्धता नहीं होने, सिलिंडर भरे हुए नहीं मिलने और वेंटिलेटर के क्रियाशील नहीं होने जैसी समस्याएं सामने आती हैं। वेंटिलेटर संचालन के लिए डाॅक्टरों और तकनीशियनों के डिग्रीधारी अथवा प्रशिक्षित होने को लेकर भी सवाल उठते रहे हैं।
ऐसी लापरवाही आपातकालीन परिस्थितियों में मरीजों की जान के लिए गंभीर खतरा बन सकती है। इन्हीं समस्याओं पर अंकुश लगाने के लिए निजी एंबुलेंसों का भी 108 एंबुलेंस सेवा की तर्ज पर निर्धारित श्रेणियों के अनुसार नियमित, मासिक आडिट कराया जाएगा।
एंबुलेंस में उपलब्ध जीवन रक्षक उपकरणों और अन्य आवश्यक सुविधाओं की स्थिति पर निगरानी रखी जा सकेगी। सीएमएचओ डा. कोठारी ने सभी निजी एंबुलेंस मालिकों और संचालकों को निर्धारित समय-सीमा में परीक्षण एवं पंजीयन की प्रक्रिया पूरी करने के निर्देश दिए हैं। आदेश का पालन नहीं करने वालों के विरुद्ध दंडात्मक कार्रवाई की चेतावनी दी गई है।
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