48 घंटों में हटाएं कोर्ट प्रोसिडिंग के आपत्तिजनक यूआरएल, MP हाई कोर्ट ने यूट्यूब और इंस्टाग्राम को कहा
नियमों का उल्लंघन करते हुए यूट्यूब जैसे प्लेटफार्म पर इन्हें अपलोड किया जा रहा है। सुनवाई में, याचिकाकर्ता ने इंस्टाग्राम और यूट्यूब द्वारा होस्ट किए ...और पढ़ें
Publish Date: Mon, 12 Jan 2026 08:58:48 PM (IST)Updated Date: Mon, 12 Jan 2026 09:11:06 PM (IST)
यू-ट्यूब और इंस्टाग्राम।HighLights
- तर्क दिया गया कोर्ट कार्यवाही की सनसनीखेज प्रस्तुति हो रही है।
- इस तरह की चीजें न्यायिक प्रक्रिया की गरिमा कमजोर करती है।
- न्यायिक टिप्पणियों के संदर्भ को गलत तरीके से प्रस्तुत करती है।
नईदुनिया प्रतिनिधि, जबलपुर। हाई कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश संजीव सचदेवा व न्यायमूर्ति विनय सराफ की युगलपीठ ने रील, क्लिप और मीम्स के माध्यम से लाइव-स्ट्रीम की गई अदालती कार्यवाही के दुरुपयोग का आरोप लगाने वाली एक जनहित याचिका पर सोमवार को सुनवाई की। कोर्ट ने संबंधित प्लेटफार्मों, यूट्यूब और इंस्टाग्राम को 48 घंटों के भीतर आपत्तिजनक यूआरएल को हटाने का सख्त निर्देश दिया। मामले की अगली सुनवाई 24 मार्च को होगी।
यह है पूरा मामला
याचिकाकर्ता दमोह निवासी विजयबजाज ने जनहित याचिका में कहा था कि इस तरह की सामग्री कानूनी बिरादरी को अपमानजनक और गलत तरीके से चित्रित करती है। तर्क दिया गया कि अदालती कार्यवाही की चयनात्मक क्लिपिंग और सनसनीखेज प्रस्तुति न्यायिक प्रक्रिया की गरिमा कमजोर करती है।
न्यायिक टिप्पणियों के संदर्भ को गलत तरीके से प्रस्तुत करती है। उन्होंने हाई कोर्ट के पूर्व फैसले का हवाला दिया, जिसमें अदालत ने पहले व्यक्तियों और संस्थाओं को अदालत की कार्यवाही, 2021 के लिए मध्य प्रदेश लाइव स्ट्रीमिंग और रिकार्डिंग नियमों के नियम 11 (बी) के अनुरूप, किसी भी रूप में अदालत की लाइव-स्ट्रीम सामग्री को संपादित करने, छेड़छाड़ करने या अवैध रूप से उपयोग करने से रोक दिया था।
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जनहित याचिकाकर्ता ने दावा किया कि इन सुरक्षा उपायों के बावजूद, आपराधिक कार्यवाही के शार्ट वीडियो, क्लिपिंग और अन्य रिकार्डिंग पोस्ट किया जाना जारी है। नियमों का उल्लंघन करते हुए यूट्यूब जैसे प्लेटफार्म पर इन्हें अपलोड किया जा रहा है।
सुनवाई में, याचिकाकर्ता ने इंस्टाग्राम और यूट्यूब द्वारा होस्ट किए गए आपत्तिजनक यूआरएल की एक सूची प्रस्तुत की। इस पर ध्यान देते हुए, अदालत ने उक्त प्लेटफार्मों को आदेश के 48 घंटों के भीतर उक्त यूआरएल तक पहुंच को अवरुद्ध करने का निर्देश जारी किया।