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पॉक्सो मामलों का बढ़ता बोझ चिंता का विषय, एमपी हाई कोर्ट की तीनों पीठों में 14,531 अपील पेंडिंग

एमपी हाई कोर्ट ने पॉक्सो और पीएनडीटी एक्ट से संबंधित मामलों की प्रगति तथा कानून के प्रविधानों के क्रियान्वयन की निगरानी के लिए हाई कोर्ट की कमेटी को ज...और पढ़ें

By Surendra DubeyEdited By: Prashant Pandey
Publish Date: Wed, 23 Sep 2026 02:12:18 PM (IST)Updated Date: Wed, 23 Sep 2026 02:16:12 PM (IST)
पॉक्सो मामलों का बढ़ता बोझ चिंता का विषय, एमपी हाई कोर्ट की तीनों पीठों में 14,531 अपील पेंडिंग
मध्य प्रदेश हाईकोर्ट जबलपुर। फाइल फोटो

HighLights

  1. पीड़ितों की उम्र 16 से 18 वर्ष और आरोपियों की उम्र 19 से 22 वर्ष के बीच
  2. कई आरोपी कम उम्र के हैं और पॉक्सो के तहत अपराध के आरोप में जेल में हैं
  3. पॉक्सो और किशोर न्याय कानून के संबंध में जागरुकता कार्यक्रम भी चलाया गया

नईदुनिया प्रतिनिधि, जबलपुर। पॉक्सो एक्ट के तहत दर्ज मामलों और लंबित अपीलों की बढ़ती संख्या को मध्य प्रदेश हाई कोर्ट ने गंभीरता से लिया है। हाई कोर्ट की तीनों पीठों में इस समय पाक्सो एक्ट से संबंधित 14,531 आपराधिक अपीलें लंबित हैं। इनमें अधिकतर मामलों में पीड़ितों की उम्र 16 से 18 वर्ष और आरोपियों की उम्र 19 से 22 वर्ष के बीच है।

मुख्य न्यायाधीश अल्पेश यशवंत कोगजे की अध्यक्षता वाली युगलपीठ ने कहा कि लंबित मामलों का शीघ्र निपटारा तभी प्रभावी होगा, जब नए मामलों की संख्या को नियंत्रित करने के लिए कानून के प्रभावी उपायों के साथ व्यापक जागरूकता भी सुनिश्चित की जाए। याचिका में अधिवक्ता अमिताभ गुप्ता ने पाक्सो एक्ट के प्रविधानों के व्यापक प्रचार-प्रसार और किशोरों तथा युवाओं को कानून की जानकारी देने की आवश्यकता उठाई थी।


जागरूकता कार्यक्रम चलाए जा रहे हैं

सुनवाई के दौरान राज्य सरकार की ओर से बताया गया कि पॉक्सो और किशोर न्याय कानून के संबंध में विभिन्न स्तरों पर प्रशिक्षण तथा जागरूकता कार्यक्रम चलाए जा रहे हैं। युगलपीठ ने आदेश में कहा कि इन प्रयासों के बावजूद पॉक्सो एक्ट के तहत मामले लगातार दर्ज हो रहे हैं। कई आरोपी कम उम्र के हैं और पॉक्सो के तहत अपराध के आरोप में जेल में हैं।

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कोर्ट ने पॉक्सो और पीएनडीटी एक्ट से संबंधित मामलों की प्रगति तथा कानून के प्रविधानों के क्रियान्वयन की निगरानी के लिए हाई कोर्ट की कमेटी को जिम्मेदारी सौंपी है। कमेटी पॉक्सो मामलों की प्रगति की निगरानी करने के साथ समयबद्ध निपटारे के लिए आवश्यक निर्देश जारी कर सकेगी तथा राज्य सरकार के संबंधित अधिकारियों को भी दिशा-निर्देश दे सकेगी।

युगलपीठ ने दो याचिकाओं का निराकरण करते हुए स्पष्ट किया कि अब सुनवाई संज्ञान याचिका के रूप में जारी रहेगी। अधिवक्ता अमिताभ गुप्ता को न्यायालय मित्र नियुक्त किया गया है।

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