
नईदुनिया प्रतिनिधि, जबलपुर। जबलपुर में गरीब बच्चों के हक पर डाका डालने का एक सनसनीखेज मामला सामने आया है। आर्थिक अपराध प्रकोष्ठ (EOW) ने पांच निजी स्कूलों के संचालकों और शिक्षा विभाग के नोडल अधिकारियों के खिलाफ भ्रष्टाचार का मामला दर्ज किया है। इन आरोपियों ने आपस में साठगांठ कर सरकार को 26.5 लाख रुपये की आर्थिक चपत लगाई है।
EOW की जांच में खुलासा हुआ कि यह पूरा खेल वर्ष 2011 से 2016 के बीच खेला गया। स्कूल संचालकों ने सरकारी प्रतिपूर्ति राशि (Reimbursement) हड़पने के लिए कमजोर आय वर्ग की सीटों पर फर्जीवाड़ा किया। हैरान करने वाली बात यह है कि रिकॉर्ड में एक ही छात्र का दो से तीन बार प्रवेश दर्शाया गया, ताकि सरकार से अधिक पैसा वसूला जा सके।
जांच में पाया गया कि शिक्षा विभाग के नोडल अधिकारियों ने अपनी जिम्मेदारी का निर्वहन करने के बजाय भ्रष्टाचार में साथ दिया। इन अधिकारियों ने संबंधित स्कूलों में पढ़ रहे बच्चों के प्रवेश का वास्तविक सत्यापन (Verification) नहीं किया। नियमों को ताक पर रखकर बिना जांचे-परखे फाइलों को आगे बढ़ाया गया, जिससे निजी स्कूल संचालकों को लाखों रुपये का अवैध भुगतान संभव हो सका।
EOW ने गहन छानबीन के बाद भ्रष्टाचार में शामिल निम्नलिखित संस्थानों और व्यक्तियों को आरोपी बनाया है:
स्कूल का नाम - संचालक का नाम - संबंधित नोडल अधिकारी
स्मिता चिल्ड्रन एकेडमी - मनीष असाटी - चंदा कोष्टा
आदर्श ज्ञान सागर शाला - नसरीन बेगम - गुलनिगार खानम
गुरु पब्लिक स्कूल - मोहम्मद तौसीफ - अख्तर बेगम अंसारी
उस्मानिया मिडिल स्कूल - मोहम्मद शमीम - राजेंद्र बुधेलिया
सेंट अब्राहम स्कूल - मोहम्मद शफीक - डीके मेहरा
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ईओडब्ल्यू (EOW) के अनुसार, वंचित और गरीब वर्ग के बच्चों के लिए आरक्षित सीटों के नाम पर यह गबन सीधे तौर पर शासन के कल्याणकारी प्रविधानों का उल्लंघन है। आरोपियों ने कूट रचित दस्तावेज तैयार कर शासकीय राशि का आहरण किया। वर्तमान में सभी आरोपियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कर ली गई है और मामले की आगे की कड़ियों को जोड़ा जा रहा है। अधिकारियों का मानना है कि इस जांच का दायरा बढ़ने पर कुछ और स्कूलों और अधिकारियों के नाम भी सामने आ सकते हैं।