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जबलपुर में बोले शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद, युवाओं की सुननी चाहिए बात, जेन-जी से टकराना सरकार के लिए हानिकारक

स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने युवाओं के आंदोलन को उनकी पीड़ा और असंतोष की अभिव्यक्ति बताते हुए कहा कि जिस तरह पैर में कांटा चुभने पर बच्चा अपनी पीड़ा व्...और पढ़ें

By Surendra DubeyEdited By: Nitin Kumar
Publish Date: Mon, 28 Sep 2026 02:16:51 PM (IST)Updated Date: Mon, 28 Sep 2026 02:33:20 PM (IST)
जबलपुर में बोले शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद, युवाओं की सुननी चाहिए बात, जेन-जी से टकराना सरकार के लिए हानिकारक
स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद, फाइल फोटो

HighLights

  1. जबलपुर प्रवास के दौरान बोले अविमुक्तेश्वरानंद
  2. जेन-जी से टकराना सरकार के लिए हानिकारक
  3. मुख्य चुनाव आयुक्त को देना चाहिए शीघ्र इस्तीफा

नईदुनिया प्रतिनिधि, जबलपुर। ज्योतिष पीठ के स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती ने जबलपुर प्रवास के दौरान देश की वर्तमान राजनीतिक परिस्थितियों, जेन-जी के आंदोलन और निर्वाचन व्यवस्था को लेकर तीखी टिप्पणियां कीं।

उन्होंने कहा कि सत्ता में बैठे लोग यदि नई पीढ़ी के निष्कपट और शांतिपूर्ण युवाओं से टकराएंगे तो इसका परिणाम उनके लिए भारी पड़ सकता है। उन्होंने मुख्य चुनाव आयुक्त को तत्काल पद से हटाने और निर्वाचन व्यवस्था में पारदर्शिता के साथ नई नियुक्ति करने की मांग भी उठाई।

स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने युवाओं के आंदोलन को उनकी पीड़ा और असंतोष की अभिव्यक्ति बताते हुए कहा कि जिस तरह पैर में कांटा चुभने पर बच्चा अपनी पीड़ा व्यक्त करता है, उसी तरह नई पीढ़ी भी अपनी व्यथा सामने रख रही है।


युवाओं की मांगों को किया जाए पूरा

उनका कहना था कि सरकार को युवाओं की जायज मांगों को समझकर शीघ्र समाधान की दिशा में कदम बढ़ाना चाहिए। उन्होंने चेतावनी के स्वर में कहा कि आंदोलन को दबाने या अनावश्यक रूप से लंबा खींचने की कोशिश की गई तो इससे नई राजनीतिक पीढ़ी तैयार हो सकती है।

उन्होंने 1974 के जयप्रकाश नारायण आंदोलन का उदाहरण देते हुए कहा कि उस दौर के आंदोलन से भी आगे चलकर अनेक राजनीतिक नेतृत्व उभरे थे।

उन्होंने महाविद्यालयों और विश्वविद्यालयों में छात्र संघ चुनाव लंबे समय से नहीं होने को भी युवाओं के राजनीतिक प्रवेश से जोड़ते हुए टिप्पणी की। उनके अनुसार नई पीढ़ी को लोकतांत्रिक और राजनीतिक प्रक्रिया में अपनी भूमिका निभाने के अवसर मिलने चाहिए।

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युवाओं की बातों को सुना जाना चाहिए

उन्होंने कहा कि वर्तमान युवा आंदोलन को दबाने के बजाय उसकी बात सुनी जानी चाहिए। उनके मुताबिक यदि युवाओं से टकराव बढ़ा तो आंदोलन से बड़ी संख्या में नए राजनीतिक नेतृत्व के उभरने की संभावना बन सकती है। यह उनका राजनीतिक आकलन और टिप्पणी है, न कि किसी चुनाव परिणाम का पूर्वानुमान।

मुख्य चुनाव आयुक्त को हटाने की मांग

निर्वाचन व्यवस्था पर टिप्पणी करते हुए स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने मुख्य चुनाव आयुक्त और अन्य चुनाव आयुक्तों के बीच मतभेदों का हवाला दिया। उन्होंने कहा कि निर्वाचन प्रक्रिया की विश्वसनीयता बनाए रखने के लिए वर्तमान मुख्य चुनाव आयुक्त को हटाकर पारदर्शी प्रक्रिया से नई नियुक्ति की जानी चाहिए।

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