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नईदुनिया प्रतिनिधि, जबलपुर। संस्कारधानी में सर्दी की दस्तक के साथ ही नर्मदा तट पर विदेशी मेहमानों की चहचहाहट सुनाई देने लगी है। ठंडी हवाओं के बीच साइबेरियन पक्षियों के झुंड नर्मदा के घाटों पर नजर आने लगे हैं। गौरीघाट हो या तिलवाराघाट, इन दिनों नदी के किनारे पक्षियों की मौजूदगी लोगों को आकर्षित कर रही है।
पानी में अठखेलियां करते और आसमान में झुंड बनाकर उड़ते इन पक्षियों को देखना पर्यटकों और प्रकृति प्रेमियों के लिए खास अनुभव बन रहा है। नर्मदा तट पर सुबह और शाम के समय इन पक्षियों की गतिविधियां लोगों का ध्यान खींच रही हैं।
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श्रद्धालु जहां मां नर्मदा के दर्शन और पूजन के लिए घाटों पर पहुंच रहे हैं, वहीं कई लोग इन विदेशी मेहमानों को निहारने के लिए भी कुछ समय यहां बिताते हैं। सर्दी के मौसम में साइबेरिया और दूसरे ठंडे क्षेत्रों से प्रवासी पक्षियों का अपेक्षाकृत गर्म इलाकों की ओर आना प्रकृति की एक अनूठी प्रक्रिया है।
भोजन, अनुकूल वातावरण और सुरक्षित ठिकानों की तलाश में ये पक्षी लंबी दूरी तय करते हैं। जबलपुर में नर्मदा का विस्तृत जल क्षेत्र और घाटों के आसपास का वातावरण इनके लिए आकर्षण का केंद्र बनता है। हालांकि, पक्षियों की प्रजातियों और उनके वास्तविक प्रवास मार्ग की पुष्टि के लिए पक्षी विशेषज्ञों की पहचान जरूरी है।
दाना डालते ही पानी की ओर खिंचे चले आते हैं पक्षी
नर्मदा तट पर पहुंचने वाले लोगों के लिए इन पक्षियों को करीब से देखना आकर्षण का केंद्र रहता है। कई पर्यटक पक्षियों को दाना डालते हैं। दाना देखते ही पक्षियों का झुंड पानी से निकलकर किनारे की ओर बढ़ने लगता है। देखते ही देखते नदी की सतह पर पक्षियों की हलचल बढ़ जाती है।
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कुछ पक्षी पानी में तैरते नजर आते हैं, तो कुछ किनारे पर बैठकर भोजन तलाशते हैं। इस दौरान घाटों पर मौजूद लोगों के लिए मनमोहक दृश्य बन जाता है। गौरीघाट और तिलवाराघाट जैसे प्रमुख नर्मदा तटों पर सुबह के समय प्रकृति का यह नजारा विशेष रूप से आकर्षित करता है।
नदी की लहरों के बीच तैरते पक्षी, ठंडी हवा और सुबह की हल्की धूप मिलकर वातावरण को खूबसूरत बना देते हैं। यही वजह है कि लोग इन दृश्यों को अपने मोबाइल कैमरों में कैद करते दिखाई देते हैं।
चार हजार किलोमीटर तक का सफर तय करने की क्षमता
प्रवासी पक्षियों की दुनिया अपने आप में बेहद रोचक है। मौसम में बदलाव के साथ कई प्रजातियों के पक्षी हजारों किलोमीटर की यात्रा करते हैं। साइबेरिया जैसे ठंडे क्षेत्रों में तापमान गिरने और भोजन की उपलब्धता प्रभावित होने पर कुछ पक्षी अपेक्षाकृत अनुकूल जलवायु वाले क्षेत्रों की ओर रुख करते हैं।
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इस दौरान वे नदियों, झीलों और जलाशयों के आसपास अपना अस्थायी ठिकाना बनाते हैं। नर्मदा का प्राकृतिक परिवेश ऐसे पक्षियों के लिए अनुकूल परिस्थितियां उपलब्ध करा सकता है। लंबी दूरी तय करने वाले ये पक्षी अपनी दिशा पहचानने और मौसम के अनुसार प्रवास करने की अद्भुत क्षमता रखते हैं। हालांकि, सभी प्रवासी पक्षी साइबेरिया से ही आते हैं, ऐसा नहीं है। अलग-अलग प्रजातियों के प्रवास मार्ग और उनके पहुंचने का समय भी अलग-अलग हो सकता है।
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