
नईदुनिया प्रतिनिधि, जबलपुर। हाई कोर्ट ने फर्जी वकालतनामे और शपथपत्र में कथित रूप से गलत जानकारी देने के गंभीर मामले में कड़ा रुख अपनाया है। न्यायमूर्ति विवेक अग्रवाल व न्यायमूर्ति अवनीन्द्र कुमार सिंह की युगलपीठ ने पाया कि जिस नीरज कुमार साकेत को अधिवक्ता बताया गया था, वह वास्तव में रीवा जिले के सरकारी स्कूल में अंग्रेजी के गेस्ट लेक्चरर, ग्रेड टू के पद पर कार्यरत हैं।
कोर्ट ने अधिवक्ता राम प्रकाश यादव के शपथपत्र में नीरज साकेत को अधिवक्ता बताए जाने को प्रथमदृष्टया गलत जानकारी माना। हाई कोर्ट ने स्कूल शिक्षा विभाग, रीवा सेंट्रल जेल प्रशासन व एमपी स्टेट बार काउंसिल को अलग-अलग जांच कर 30 दिन में रिपोर्ट प्रस्तुत करने के निर्देश दिए हैं।
सुनवाई में यह भी सामने आया कि नीरज साकेत ने राम प्रकाश यादव के लिए 30 वकालतनामे प्राप्त किए थे। कोर्ट ने कहा कि यदि उनका किसी आरोपित से पारिवारिक संबंध भी हो, तो अन्य आरोपितों के वकालतनामे प्राप्त करने का अधिकार नहीं बनता।
कोर्ट के समक्ष प्रस्तुत जानकारी के अनुसार रीवा सेंट्रल जेल से अधिवक्ता राम प्रकाश यादव के लिए 300 से अधिक वकालतनामे प्राप्त किए गए। हाई कोर्ट ने मामले की जांच के निर्देश दिए। रीवा जेल के तत्कालीन अधीक्षक की भूमिका की भी जांच होगी, जबकि स्टेट बार काउंसिल अधिवक्ता के खिलाफ गलत शपथपत्र के मामले में कार्रवाई करेगी।
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