
नईदुनिया प्रतिनिधि, जबलपुर। स्कूलों में व्यवस्थाओं की कमियों को लेकर अब शिक्षक भी अपना पक्ष दस्तावेजों के जरिए रखने की तैयारी कर रहे हैं।
शिक्षकों ने निर्णय लिया है कि वे नियमित डेली डायरी में केवल शैक्षणिक गतिविधियों ही नहीं, बल्कि स्कूल में उपलब्ध संसाधनों, अधूरी व्यवस्थाओं और लंबित समस्याओं का भी उल्लेख करेंगे।
जर्जर कक्षों की स्थिति, विद्यार्थियों को मिलने वाली पाठ्यपुस्तकों की संख्या, पुस्तकों की आपूर्ति, भवन की मरम्मत, शिक्षकों के रिक्त पद और विभिन्न मदों में अटकी राशि जैसी जानकारियां दर्ज की जाएंगी।
शिक्षकों का कहना है कि निरीक्षण के दौरान अक्सर स्कूलों में पाई जाने वाली कमियों के लिए पूरे स्टाफ को जिम्मेदार ठहरा दिया जाता है, जबकि कई समस्याएं ऐसी हैं जिनका समाधान विभागीय स्तर पर होना है।
ऐसे में स्कूल की वास्तविक स्थिति और पहले से लंबित समस्याओं का लिखित रिकॉर्ड रखना जरूरी है, ताकि निरीक्षण के समय अधिकारियों के सामने वस्तुस्थिति स्पष्ट की जा सके।
हाल ही में पांच शिक्षकों को कारण बताओ नोटिस जारी किए जाने के बाद यह मुद्दा चर्चा में आया है। संयुक्त संचालक द्वारा कुंडम क्षेत्र के स्कूल का निरीक्षण किया गया था।
निरीक्षण के दौरान कुछ कमियां सामने आने पर शिक्षकों को नोटिस जारी किए गए। इसके बाद शिक्षकों ने स्कूल की व्यवस्थाओं और उपलब्ध संसाधनों का नियमित रिकॉर्ड रखने पर जोर दिया है।
शिक्षकों का कहना है कि संबंधित स्कूल में सीसीटीवी कैमरे लगे हैं और इसी माह भवन में पुताई भी कराई गई थी। इसके बावजूद स्कूल की व्यवस्थाओं को लेकर सवाल उठाए गए।
उनका यह भी कहना है कि विद्यालय में प्राचार्य का पद रिक्त है और एक वरिष्ठ महिला अध्यापक के मार्गदर्शन में स्कूल का संचालन हो रहा है। ऐसे में प्राचार्य की पदस्थापना जैसे विषयों पर भी विभाग को ध्यान देना चाहिए।
शिक्षकों के अनुसार अब डेली डायरी में स्कूल की कमियों का क्रमवार विवरण दर्ज किया जाएगा। इसमें भवन के जर्जर कमरों की संख्या, बाउंड्रीवॉल की स्थिति, भृत्य और चौकीदार की उपलब्धता, शिक्षकों के रिक्त पद, विद्यार्थियों को नहीं मिलीं पुस्तकें।
लंबित बजट और राशि की जानकारी शामिल होगी। साथ ही यह भी दर्ज किया जाएगा कि संबंधित समस्या के समाधान के लिए पहले कब और किस स्तर पर प्रयास किया गया।
शिक्षकों का तर्क है कि स्कूलों में संसाधनों की कमी की जानकारी विभाग तक पहुंचाने के बाद भी यदि समस्याएं बनी रहती हैं, तो उसका रिकॉर्ड उपलब्ध होना चाहिए। इससे यह स्पष्ट हो सकेगा कि कौन-सी कमी विद्यालय स्तर पर दूर की जा सकती है और किन मामलों में विभागीय हस्तक्षेप की आवश्यकता है।
शिक्षकों ने कहा कि स्कूलों का निरीक्षण करना अधिकारियों की जिम्मेदारी है, लेकिन विद्यालय की समस्याओं का समाधान सुनिश्चित करना भी उतना ही आवश्यक है। केवल कमियां गिनाकर पूरे स्टाफ को जिम्मेदार ठहराने के बजाय अधिकारियों को यह भी देखना चाहिए कि विद्यालय में आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध हैं या नहीं।
शिक्षकों ने यह भी कहा कि हाईस्कूल के शिक्षकों का नियमित प्रशिक्षण जबलपुर में आयोजित होता है, जिसमें डेली डायरी और स्टूडेंट डेटा रजिस्टर जैसे दस्तावेज लेकर जाना होता है। ऐसे में डायरी अधूरी होने संबंधी टिप्पणी पर भी उनका पक्ष सुना जाना चाहिए।
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