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कर्मचारियों के हक में हाई कोर्ट का फैसला, ACR न होने पर भी कर्मचारी को मिलेगा चौथा वेतनमान, 6% ब्याज के साथ मिलेगा बकाया

MP High Court: मध्य प्रदेश हाई कोर्ट ने कर्मचारियों के हित में एक महत्वपूर्ण कानूनी व्यवस्था साफ की है। न्यायमूर्ति मनिंदर सिंह भट्टी की एकलपीठ ने अपन...और पढ़ें

By Digital DeskEdited By: Dheeraj Belwal
Publish Date: Sat, 17 Jan 2026 10:46:16 PM (IST)Updated Date: Sat, 17 Jan 2026 10:46:16 PM (IST)
कर्मचारियों के हक में हाई कोर्ट का फैसला, ACR न होने पर भी कर्मचारी को मिलेगा चौथा वेतनमान, 6% ब्याज के साथ मिलेगा बकाया
कर्मचारियों के हक में हाई कोर्ट का फैसला।

HighLights

  1. वेतनमान और एरियर रोकना कानूनन गलत
  2. कोर्ट ने डॉ. त्रिपाठी के पक्ष में सुनाया फैसला
  3. कर्मचारी को 6% ब्याज के साथ मिलेगा बकाया

नईदुनिया प्रतिनिधि, जबलपुर। मध्य प्रदेश हाई कोर्ट ने कर्मचारियों के हित में एक महत्वपूर्ण कानूनी व्यवस्था साफ की है। न्यायमूर्ति मनिंदर सिंह भट्टी की एकलपीठ ने अपने आदेश में स्पष्ट किया है कि यदि किसी कर्मचारी की वार्षिक गोपनीय प्रतिवेदन (ACR) उपलब्ध नहीं है, तो केवल इस तकनीकी आधार पर उसे चौथे वेतनमान और उससे मिलने वाले अन्य वित्तीय लाभों से वंचित नहीं किया जा सकता। कोर्ट ने माना कि दस्तावेजों का रखरखाव विभाग की जिम्मेदारी है, कर्मचारी की नहीं।

डॉ. अखिलेश मणि त्रिपाठी की याचिका पर आया आदेश

यह पूरा मामला सतना निवासी डॉ. अखिलेश मणि त्रिपाठी द्वारा दायर याचिका से जुड़ा है। याचिकाकर्ता ने कोर्ट को बताया था कि वे उच्च शिक्षा विभाग में अपनी सेवाएं दे रहे हैं। विभाग ने उन्हें पूर्व में स्वीकृत चौथा वेतनमान और उससे जुड़े लाभ देने से सिर्फ इसलिए मना कर दिया था क्योंकि उनके सेवा काल के कुछ वर्षों की एसीआर (ACR) रिकॉर्ड में उपलब्ध नहीं थी। विभाग के इस अड़ियल रवैये के खिलाफ उन्होंने हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाया था।


वकील का तर्क: विभाग की गलती का खामियाजा कर्मचारी क्यों भुगते?

याचिकाकर्ता की ओर से पैरवी करते हुए अधिवक्ता आकाश सिंघई ने दलील दी कि एसीआर को सुरक्षित रखना और उसे रिकॉर्ड में बनाए रखना संबंधित विभाग का दायित्व है। यदि विभाग से रिकॉर्ड गुम हो गया है या उपलब्ध नहीं है, तो इसमें कर्मचारी की कोई गलती नहीं मानी जा सकती। अधिवक्ता ने तर्क दिया कि केवल इस आधार पर किसी भी कर्मचारी का वैधानिक लाभ रोकना कानूनन गलत और अन्यायपूर्ण है। सुनवाई के दौरान इस संबंध में सुप्रीम कोर्ट द्वारा पूर्व में दिए गए विभिन्न दिशा-निर्देशों और नजीरों का भी हवाला दिया गया।

ब्याज सहित भुगतान करने का निर्देश

हाई कोर्ट ने याचिकाकर्ता के तर्कों से सहमत होते हुए उच्च शिक्षा विभाग को कड़ी फटकार लगाई और डॉ. त्रिपाठी के पक्ष में आदेश जारी किया। कोर्ट ने विभाग को निर्देशित किया है कि याचिकाकर्ता को तत्काल चौथा वेतनमान प्रदान किया जाए। साथ ही, उससे जुड़े सभी पिछले लाभ और बकाया राशि का भुगतान 6 प्रतिशत वार्षिक ब्याज के साथ किया जाए।

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90 दिनों की समय सीमा तय

अदालत ने इस प्रक्रिया के लिए समय सीमा भी निर्धारित कर दी है। आदेश में कहा गया है कि विभाग को हाई कोर्ट के आदेश की प्रमाणित प्रति प्राप्त होने की तिथि से 90 दिनों के भीतर सभी बकाया राशि और ब्याज का भुगतान सुनिश्चित करना होगा। इस फैसले से उन हजारों कर्मचारियों को राहत मिलने की उम्मीद है जिनके प्रमोशन या वेतनमान संबंधी लाभ रिकॉर्ड की कमी के कारण अटके हुए हैं।