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शिक्षक पति की मौत के बाद अनुकम्पा नियुक्ति के लिए भटक रही पत्नी, बोली-चपरासी ही बना दीजिए

अब आर्थिक तंगी से जूझ रही महिला ने जिला शिक्षा अधिकारी कार्यालय को पत्र लिखकर शिक्षक पद के बजाय भृत्य (चपरासी) के पद पर अनुकम्पा नियुक्ति देने की गुहा...और पढ़ें

By Ramkrishan paramhans pandeyEdited By: Dheeraj kumar Bajpai
Publish Date: Fri, 28 Aug 2026 10:34:03 PM (IST)Updated Date: Fri, 28 Aug 2026 10:34:03 PM (IST)
शिक्षक पति की मौत के बाद अनुकम्पा नियुक्ति के लिए भटक रही पत्नी, बोली-चपरासी ही बना दीजिए
महिला बोली-पति की मृत्यु के बाद उनकी पत्नी शिववती मरकाम ने परिवार की आर्थिक स्थिति ठीक नहीं। प्रतीकात्‍मक चित्र

HighLights

  1. आर्थिक स्थिति को देखते हुए आवेदन किया
  2. अनुकम्पा नियुक्ति की उम्मीद में लगा रही है
  3. शिक्षक पात्रता परीक्षा उत्तीर्ण नहीं कर सकीं

नईदुनिया प्रतिनिधि, जबलपुर। पति की शासकीय सेवा के दौरान मृत्यु के बाद परिवार की जिम्मेदारी संभाल रही एक महिला पिछले कई वर्षों से अनुकम्पा नियुक्ति की उम्मीद में विभाग के चक्कर लगा रही है। शिक्षक पद के लिए आवश्यक शिक्षक पात्रता परीक्षा उत्तीर्ण नहीं कर पाने के कारण उनकी नियुक्ति नहीं हो सकी।

21 जुलाई 2018 को उनका निधन हो गया था

जानकारी के अनुसार संकुल केंद्र सकरा के अंतर्गत शासकीय प्राथमिक शाला मादों, कुंडम में अध्यापक संवर्ग के सहायक अध्यापक अनुप सिंह मरकाम पदस्थ थे। शासकीय सेवा में रहते हुए 21 जुलाई 2018 को उनका निधन हो गया था। पति की मृत्यु के बाद उनकी पत्नी शिववती मरकाम ने परिवार की आर्थिक स्थिति को देखते हुए अनुकम्पा नियुक्ति के लिए आवेदन किया।


शिक्षक पद पर उनकी नियुक्ति का रास्ता बंद हो गया

शिववती मरकाम ने शिक्षक पद पर अनुकम्पा नियुक्ति पाने के लिए शिक्षक पात्रता परीक्षा भी दी, लेकिन वह परीक्षा उत्तीर्ण नहीं कर सकीं। इसके चलते शिक्षक पद पर उनकी नियुक्ति का रास्ता बंद हो गया। दूसरी ओर पति की मृत्यु के बाद परिवार की आर्थिक स्थिति लगातार खराब होती चली गई। दो बच्चों की जिम्मेदारी अकेले उठाना उनके लिए मुश्किल हो रहा है।

पत्र भेजकर अपनी स्थिति से अवगत कराया

इसी परेशानी को लेकर उन्होंने जिला शिक्षा अधिकारी कार्यालय को पत्र भेजकर अपनी स्थिति से अवगत कराया है। पत्र में उन्होंने विभाग से भावुक अपील करते हुए कहा है कि यदि शिक्षक पद के लिए वे पात्र नहीं हैं तो उन्हें भृत्य पद पर ही अनुकम्पा नियुक्ति प्रदान कर दी जाए, ताकि उन्हें रोजगार मिल सके और वे अपने बच्चों का भरण-पोषण सम्मानपूर्वक कर सकें।

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