
नईदुनिया प्रतिनिधि, खंडवा, ओंकारेश्वर। सिंहस्थ-2028 की तैयारियों के तहत तीर्थनगरी ओंकारेश्वर में चल रहे कार्यों के बीच स्थानीय नागरिक परिषद के आह्वान पर दो दिवसीय बंद का व्यापक असर देखने को मिला। नगरवासी अपने मकान और दुकान बचाने तथा डुइक्किया में विस्थापन की आशंका के विरोध में बंद कर रहे हैं। बंद के समर्थन में दुकानदारों, होटल और गेस्ट हाउस संचालकों, ऑटो ड्राइवरों सहित अन्य व्यापारियों ने अपने प्रतिष्ठान बंद रखे।
इससे तीर्थनगरी की आर्थिक गतिविधियां प्रभावित हुईं, वहीं भगवान ओंकारेश्वर के दर्शन करने पहुंचे श्रद्धालुओं को भी परेशानियों का सामना करना पड़ा। कई भक्तों को भगवान को अर्पित करने के लिए फूल और प्रसाद तक नहीं मिल सके। आम दिनों में ओंकारेश्वर में 35 से 40 हजार श्रद्धालु प्रतिदिन दर्शनार्थ आते हैं।

सिंहस्थ-2028 की तैयारियों के लिए नगर में किए जा रहे कार्यों को लेकर स्थानीय लोगों में अपने मकान और दुकानों को लेकर चिंता है। नगरवासियों का कहना है कि वे डुइक्किया में विस्थापित नहीं होना चाहते। इसी मुद्दे पर जिला प्रशासन और स्थानीय नागरिकों के बीच चर्चा जारी है।
नगरवासियों के अनुसार, प्रशासन के साथ हुई चर्चा में 19 बिंदुओं में से 18 पर सहमति बनने की बात सोशल मीडिया पर वायरल एक वीडियो में सामने आया है। हालांकि, विस्थापन से जुड़े बिंदु पर स्थिति स्पष्ट नहीं होने के कारण असंतोष बना हुआ है। स्थानीय लोगों की मांग है कि उनकी समस्याओं का समाधान निकाला जाए और उनके वर्षों पुराने आशियानों व व्यवसायों को सुरक्षित रखने पर विचार किया जाए।

बंद के दौरान आम दिनों में श्रद्धालुओं की भीड़ और दुकानों की चहल-पहल से गुलजार रहने वाली नगरी में सन्नाटा पसरा रहा। शुरुआत में कुछ किराना दुकानों, साग-सब्जी, दूध और चाय के प्रतिष्ठान खुले रहे, लेकिन बाद में वे भी बंद हो गए। बाजार बंद होने से श्रद्धालुओं को जरूरी सामग्री और पूजा की सामग्री जुटाने में परेशानी हुई।
बस स्टैंड से मंदिर तक पहुंचने तथा अन्य सुविधाएं पाने में भी दिक्कतों का सामना करना पड़ा। दिल्ली से पहली बार ओंकारेश्वर पहुंचीं साईं दीपा ने कहा कि विरोध प्रदर्शन के कारण तीर्थनगरी का माहौल बदला हुआ नजर आया। सरकार को स्थानीय लोगों की समस्याओं पर ध्यान देने के साथ श्रद्धालुओं की सुविधाओं का भी ध्यान रखना चाहिए।
दिल्ली से आए आकाश गर्ग ने बताया कि प्रसाद की दुकानें बंद होने से भगवान को अर्पित करने के लिए प्रसाद नहीं मिल सका। उन्होंने प्रशासन और स्थानीय नागरिकों के बीच बातचीत से समाधान निकालने की जरूरत बताई।
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बंद के दौरान श्रद्धालुओं को राहत देने के लिए जिला प्रशासन की ओर से पूरे नगर में ठंडे आरओ पानी की व्यवस्था की गई। अब स्थानीय लोगों और प्रशासन के बीच विस्थापन के मुद्दे पर होने वाली चर्चा पर सभी की नजरें हैं। वैसे कलेक्टर ऋषभ गुप्ता की ओर से प्रशासन द्वारा समिति की 19 में से 18 मांगों पर सहमति की बात कही गई है साथ ही डूकिया में विस्थापन को लेकर भी बीच का रास्ता निकलने के संकेत दिए है।
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