नईदुनिया प्रतिनिधि, खरगोन। जिले में तेज बारिश से भारी नुकसान हुआ है। कई जगह जलजमाव हो गया है, तो एक जगह युवक के बहने से मौत हो गई है। शहर के मांगरुल मार्ग पुलिया पर तेज बारिश के कारण पानी का बहाव तेज होने से मांगरुल निवासी हरिराम की बह जाने की सूचना पर SDM वीरेंद्र कटारे पहुंचे। कुछ घंटे बाद हरिराम का शव मिला है।
लोगों ने बताया कि आसपास कालोनियों के विस्तार में पुलिया को संकरा किए जाने की शिकायत भी की गई। उधर, जिला अस्पताल में वार्डो में पानी घुस गया। ICU में पानी घुस गया। पानी के बीच में मरीजों का इलाज किया गया। जवाहर नगर को थोक किराना दुकानों में पानी जमा हो गया है। व्यापारी संतोष गुजराती का कहना है कि रात में पानी घुस गया था। मजदूर सामान जमा रहे हैं। एक लाख से ज्यादा का नुकसान हुआ है।
कहीं जाने की जल्दी में लोग जान दांव पर लगाने से भी बाज नही आते। ऐसा नजारा इन दिनों जलमग्न पुल-पुलियाओं पर देखने को मिल रहा है। भले ही जिले में नियमित बारिश नही हो रही है, लेकिन कुछ स्थानों पर छोटी पुल-पुलिया, रपट जलमग्न हो गई है, जो आवाजाही में बाधा बन रही है।
जिले की गोगावां जनपद के ग्राम अवरकच्छ में बह रही कुंदा नदी पर बनी निचली पुलिया (रपट) पानी भर जाने से पूरी तरह जलमग्न है। इसके बाद भी लोग बहाव के बीच पैदल या बाइक के सहारे नदी पार कर रहे हैं। यह जोखिम भरा काम होने के बाद भी मानो लोग जान दांव पर लगाने के लिए आतुर है।
प्रशासन की बेखबरी और लापरवाही मानो हादसों को न्यौता दे रही है। तेज बहाव के बीच नदी पार करते समय राहगीरों की थोड़ी सी चूक या लापरवाही उनके लिए जानलेवा साबित हो सकती है। बावजूद इसके उन्हें कोई रोकने-टोकने वाला नहीं है।
जानकारी के अनुसार, अवरकच्छ नदी की रपट में बारिश में ही पानी बह निकलता है, जिससे नदी पर बहते पानी के बीच आवाजाही करना मानो लोगों की आदत बन गया है। इस नदी से करीब दो दर्जन से अधिक गांव के लोग आवाजाही करते है। विडम्बना यह है कि रोकने के बजाय यहां पर ग्रामीण ही राहगीरों को हाथ पकड़कर नदी पार करा रहे हैं। ऐसे में कभी भी गंभीर हादसा हो सकता है।
हादसे की संभावना उस समय ज्यादा बढ़ जाती है, जब वर्षा होती है। प्रशासनिक सतर्कता केवल बारिश के शुरुआती दिनों में नजर आती है, जब बाढग़्रस्त पुल- पुलिया, रपट पर सूचना बोर्ड, बेरिकेटिंग कर लोगों को सतर्क किया जाता है, लेकिन पुल-पुलिया पर पानी होने के बाद भी लोग आवाजाही कर रहे हैं इसकी रोकथाम की न तो निगरानी रखी जा रही न ही इसे रोकने के कोई प्रयास, मानो लोगों को अपने हाल पर छोड़ दिया है।