
नईदुनिया प्रतिनिधि, खरगोन। मध्य प्रदेश के खरगोन जिले में आदिवासी क्रांतिकारी टंट्या मामा की प्रतिमा लगाने में भ्रष्टाचार का मामला सामने आया है। जिला मुख्यालय के बिस्टान रोड तिराहे को मुख्यमंत्री रहते शिवराज सिंह चौहान द्वारा की गई घोषणा के अनुसार टंट्या मामा तिराहा नाम दिया गया और नगर पालिका परिषद ने यहां नौ लाख 90 हजार रुपये की लागत से प्रतिमा लगाने के लिए टेंडर निकाला था। जिस फर्म ने यह टेंडर लिया, उसे यहां धातु की प्रतिमा लगानी थी लेकिन इसके बजाय उसने फाइबर की प्रतिमा लगा दी।
इसका बाजार मूल्य एक लाख रुपये से भी कम बताया जा रहा है। यह गड़बड़ी सामने आने पर कांग्रेस ने सत्ता पक्ष पर महापुरुषों के नाम पर भी भ्रष्टाचार करने का आरोप लगाते हुए भाजपा को घेरा है। इसके बाद मामला सामने आने पर नगर पालिका परिषद ने कार्रवाई करते हुए प्रतिमा लगाने वाली कंपनी को ब्लैक लिस्टेड किया है और भौतिक सत्यापन में लापरवाही पर दो उपयंत्रियों को कारण बताओ नोटिस किया। विभागीय जांच भी शुरू की गई है।
तीन साल पहले दिसंबर 2022 में तत्कालीन मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने आदिवासी जननायकों को महत्व देने के लिए विभिन्न कार्यक्रम शुरू करवाए थे। इसमें टंट्या मामा के अतिरिक्त भीमा नायक, खाज्या नायक आदि के स्मारक, उनके नाम से मेले, प्रतिमा स्थापना आदि काम किए गए थे। इसी क्रम में दिसंबर 2022 में तत्कालीन मुख्यमंत्री चौहान ने खरगोन में बिस्टान नाके तिराहे का नाम टंट्या मामा तिराहा किए जाने की घोषणा की थी। इसके बाद सितंबर 2025 में नगर पालिका परिषद की बैठक में बिस्टान नाका तिराहे पर टंट्या मामा की धातु की प्रतिमा लगाने का निर्णय लिया गया था।
शहर की पिनाक ट्रेडिंग कंपनी ने यह टेंडर लिया। तिराहे को सुंदरीकरण कर 15 नवंबर 2025 में जनजातीय गौरव दिवस पर प्रतिमा का अनावरण खरगोन के भाजपा विधायक बालकृष्ण पाटीदार व नगर पालिका अध्यक्ष छाया जोशी ने किया था। बता दें कि आदिवासी क्रांतिकारी टंट्या मामा भील का जन्म स्थान मध्य प्रदेश के खंडवा जिले का ग्राम बड़ौदा अहीर है। उनका कार्यक्षेत्र यहां का निमाड़ क्षेत्र रहा है। देश की आजादी के पूर्व टंट्या भील ने अंग्रेजी शासन को चुनौती देकर सशस्त्र विद्रोह का नेतृत्व किया और आखिरकार में पकड़े गए और उन्हें फांसी दे दी गई।
प्रतिमा लगाने में जैसे ही लापरवाही सामने आई, तुरंत कार्रवाई की गई है। कंपनी को ब्लैक लिस्टेड किया है और संबंधित कर्मचारियों पर जांच बैठाई है। तीन माह में उसी स्थान पर धातु की प्रतिमा स्थापित की जाएगी- छाया जोशी, नपाध्यक्ष खरगोन।
यह भी पढ़ें- भागीरथपुरा को अभी और करना होगा इंतजार, 70% हिस्सा अब भी टैंकरों के भरोसे, पाइपलाइन बदलने में लगेगा एक महीने का समय
आदिवासी समाज के क्रांतिकारी टंट्या भील का जन्म स्थान खंडवा जिले का ग्राम बड़ौदा अहीर है। उनका कार्यक्षेत्र निमाड़ क्षेत्र रहा है। आजादी के पूर्व टंट्या मामा ने अंग्रेजों को खासी चुनौती दी थी। कहा जाता है कि वे अंग्रेजों का धन लूटकर क्षेत्र के गरीब लोगों में बांट देते थे। इसके चलते उन्हें राबिन हुड के रूप में भी याद किया जाता है। आदिवासी समाजजन उन्हें टंट्या मामा के रूप में पूजते हैं।
वे सिर्फ एक स्वतंत्रता सेनानी नहीं थे, वे आदिवासी समुदायों के लिए प्रतिरोध, गरिमा और न्याय के प्रतीक थे। उन्होंने सात साल तक अंग्रेजों को चकमा दिया, सशस्त्र विद्रोह का नेतृत्व किया और आखिरकार अपनी जवानी में पकड़े गए और उन्हें फांसी दे दी गई। उल्लेखनीय है कि करीब चार साल पहले कांग्रेस की भारत जोड़ो यात्रा के दौरान राहुल गांधी टंट्या मामा की जन्मस्थली गए थे।