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मतदाता सूची सुधार अभियान बना वरदान, SIR की वजह से 22 साल बाद मां से मिला बिछड़ा बेटा, नम हो गईं सबकी आंखें

SIR In MP: चुनाव आयोग द्वारा चलाए जा रहे मतदाता सूची गहन पुनरीक्षण अभियान (SIR) को लेकर भले ही प्रशासनिक स्तर पर चुनौतियां आ रही हों, लेकिन मंदसौर में...और पढ़ें

By Alok SharmaEdited By: Dheeraj Belwal
Publish Date: Sat, 10 Jan 2026 10:27:39 PM (IST)Updated Date: Sat, 10 Jan 2026 10:27:39 PM (IST)
मतदाता सूची सुधार अभियान बना वरदान, SIR की वजह से 22 साल बाद मां से मिला बिछड़ा बेटा, नम हो गईं सबकी आंखें
नई आबादी थाने में बेटे विनोद के साथ मां।

HighLights

  1. मतदाता सूची सुधार ने खत्म किया 22 साल का वनवास
  2. राजस्थान में नाम जुड़वाने के लिए मांगी पुरानी जानकारी
  3. 2003 का रिकॉर्ड ढूंढना बना मां से मिलने का जरिया

नईदुनिया प्रतिनिधि, मंदसौर। चुनाव आयोग द्वारा चलाए जा रहे मतदाता सूची गहन पुनरीक्षण अभियान (SIR) को लेकर भले ही प्रशासनिक स्तर पर चुनौतियां आ रही हों, लेकिन मंदसौर में इस अभियान ने एक परिवार की खुशियां लौटा दी हैं। 22 वर्ष पहले प्रेम विवाह कर घर से लापता हुए एक युवक का सुराग इसी अभियान के चलते मिला, जिससे सालों से बिछड़ी मां और बेटा फिर से एक हो गए।

वोटर लिस्ट के लिए पुरानी जानकारी जुटाना बना जरिया

मामला खिलचीपुरा का है, जहां का मूल निवासी विनोद गायरी (45) 22 साल पहले प्रेम विवाह करने के बाद डर के मारे गांव छोड़कर चला गया था। वर्तमान में चल रहे एसआईआर (SIR) अभियान के तहत अपना नाम मतदाता सूची में जुड़वाने के लिए विनोद को वर्ष 2003 के रिकॉर्ड की आवश्यकता थी। उसने अपने साथियों के माध्यम से माता-पिता का वोटर आईडी नंबर और पुरानी सूची की जानकारी लेने के लिए खिलचीपुरा में संपर्क किया। जब यह खबर उसकी मां तक पहुंची, तो उन्हें सालों बाद बेटे के जीवित होने की उम्मीद जागी।


पुलिस की मदद से राजस्थान के नागौर में मिला परिवार

पुत्र की जानकारी मिलते ही मां ने तत्काल नई आबादी थाना पुलिस से संपर्क किया। एसपी विनोद कुमार मीना के निर्देशन में थाना प्रभारी कुलदीप सिंह ने एक टीम गठित की। पुलिस ने ग्राम पंचायत और तहसील निर्वाचन कार्यालय से तकनीकी जानकारी जुटाई, जिससे पता चला कि विनोद अपनी पत्नी और दो बच्चों के साथ राजस्थान के नागौर में रह रहा है। पुलिस टीम ने सक्रियता दिखाते हुए विनोद को उसकी मां से मिलवाया। 22 साल बाद इस मिलन को देख मौके पर मौजूद सभी लोगों की आंखें नम हो गईं।

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22 साल के वनवास के पीछे था 'डर'

विनोद के परिजनों ने बताया कि उसने अपने एक नजदीकी रिश्तेदार की लड़की से प्रेम विवाह किया था। उस समय लड़की के परिवार वालों की नाराजगी और सामाजिक डर के कारण विनोद गांव छोड़कर भाग गया था। इस लंबे अंतराल के दौरान विनोद के पिता का देहांत भी हो गया, लेकिन वह कभी वापस नहीं आया। मां ने भी बेटे के मिलने की आस छोड़ दी थी। लेकिन मतदाता सूची को अपडेट करने की प्रक्रिया (SIR) ने अनजाने में ही सही, एक टूटे हुए परिवार को फिर से जोड़ दिया।