
हरिओम गौड़, नईदुनिया, मुरैना। मुरैना जिले में चोरों की ऐसी कई गैंग सक्रिय हैं, जो बिजली लाइनों को चुरा रही हैं। एक रात में कई खंभों के तार गायब हो जाते हैं। बिजली कंपनी का रिकार्ड बता रहा है कि बीते नौ महीने में यह चोर 80 किलोमीटर लंबे बिजली नेटवर्क को पचा चुके हैं। इसका खामियाजा किसान भुगत रहे हैं, जिनके कुएं व बोरों की बिजली गुल हो गई है और खेती-बाड़ी का काम ठप हो गया है।
रबी फसल का सीजन शुरू हो गया है। किसान गेहूं व सरसों की बोवनी में जुट गया है। बोवनी से पहले खेतों की सिंचाई (पलेवा) किया जा रहा है। मुरैना जिले में आधी से ज्यादा खेती बोर व कुओं के पानी पर निर्भर है, ऐसे सैकड़ों किसान बिजली की समस्या से जूझ रहे हैं, क्योंकि ग्रामीण क्षेत्र में कृषि फीडर की बिजली लाइनों को चोर चुराकर ले जा रहे हैं।
दो दिन पहले तिंदोखर गांव में 14 से अधिक खंभों की बिजली लाइन चोरी हो गई। यह लाइन खेतों की बिजली पहुंचाने वाली थी, लाइन चोरी होने से 200 से अधिक किसानों के कुएं-बोर बंद हो गए हैं। इसी तरह मुड़ियाखेड़ा में सात दिन पहले सात खंभों से बिजली तारों को चोर ले गए। इसी तरह सबलगढ़, रामपुर, कैलारस, जौरा और दिमनी क्षेत्र में भी खंभों से तार चोरी हुए हैं।
बिजली कंपनी के अनुसार एक किलोमीटर लंबे तारों की कीमत चार लाख रुपये होती है। जनवरी से अब तक 80 किलोमीटर से अधिक लंबी लाइन के तार चोरी हुए हैं, जिनसे बिजली कंपनी को 2 करोड़ 40 लाख रुपये का नुकसान हुआ है। स्थिति इतनी चिंताजनक है, कि चिन्नौनी क्षेत्र में अभी भी 30 किलोमीटर लंबे बिजली तारों की जरूरत है, जिसके लिए किसान रोज आवेदन दे रहे हैं, क्योंकि इन दिनों गेहूं व सरसों की बोवनी की तैयारी चल रही है।
तार चोरी करने वाले बदमाश इतने दुस्साहसी हैं, कि एक ही जगह से दो से तीन-तीन बार तार चोरी कर चुके हैं। उदाहरण ऐसे समझें, कि एक महीने पहले झुंडपुरा क्षेत्र में आठ खंभों के तार चोरी हुए। बिजली कंपनी की टीम ने तीसरे दिन यहां नए तार डाल दिए। तार डालने का काम दोपहर में पूरा हो गया और दूसरे दिन की सुबह इन खंभों के तार फिर चोरी हो गए। इसी जगह पर एक सप्ताह में तीन बार तार चोरी हुए। इसी तरह देवगढ़-चिन्नौनी क्षेत्र में नहर रोड पर एक ही जगह से दो से तीन-तीन बार तार चोरी हो गए चुके हैं।
चोर इसलिए बेखौफ हैं, क्योंकि उन्हें न तो पकड़े जाने का डर है, नहीं किसी सजा का। कारण यह है, कि बिजली तार चोरी होने पर पुलिस थानों में केस दर्ज ही नहीं होते। चिन्नौनी के तिंदोखर गांव में हुई बिजली तारों की चोरी की शिकायत उसी दिन थाने में की, लेकिन केस दर्ज नहीं हुआ। बागचीनी थाने में आठ महीने में बिजली तार चोरी के छह आवेदन दिए गए, लेकिन पुलिस ने एक भी केस दर्ज नही हुआ। मुरैना के स्टेशन रोड थाने में 20 दिन पहले ग्रामीणों ने तार चोराें की गाड़ी पकड़कर दी, उसमें भी केस दर्ज नही किया।
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यह हैरतअंगेज मामला पहाड़गढ़ के मरा गांव का है। मरा गांव में घाटी नीचे क्षेत्र के बिजली खंभों से सात महीने पहले बिजली तार चोरी हुए। इसकी शिकायत उसी दिन थाने में की गई, लेकिन केस दर्ज नही हुआ। बिजली लाइन चोरी होने से 500 से अधिक किसानों की खेती प्रभावित है।
बीते 22 अक्टूबर को ग्रामीणों ने बिजली कंपनी के सहायक यंत्री के नाम ज्ञापन देकर कहा, कि सात महीने से खेत बंजर पड़े हैं। गेहूं-सरसों की बोवनी नही हो पा रही। किसानों ने चेतावनी दी है, कि आठ दिन में बिजली लाइन नहीं डली तो आदिवासी, मोंगिया और गुर्जर किसान सामूहिक आत्मदाह करने को मजबूर हो जाएंगे।
तारों की चोरी की घटनाएं आए दिन हो रही हैं। इस साल लगभग 80 किलोमीटर के तार चोरी हुए हैं। एक किलोमीटर तारों का खर्च चार लाख आता है। जहां ऐसी घटना होती है उसकी तत्काल शिकायत थाने में कर रहे हैं, पर पुलिस केस दर्ज नहीं हो रहे। अगर पुलिस केस हों तो आरोपित पकड़े जाएंगे, उससे कार्रवाई का भय बढ़ेगा, तार चोरी की घटनाओं पर कुछ अंकुश तो लगेगा। - एलएन पाटीदार, महाप्रबंधक, बिजली कंपनी मुरैना