हरिओम गौड़, नईदुनिया मुरैना। सरकार ने बीते साल मिट्टी परीक्षण लैबों को निजी हाथों में सौंप दिया और इन लैबों ने किसान, खेत और फसलों तक का फर्जी रिकॉर्ड बनाकर लाखों-करोड़ों के घपले शुरू कर दिए। मिट्टी परीक्षण के नाम पर हैरान कर देने वाला मामला सबसे पहले मध्य प्रदेश के कृषि मंत्री ऐंदल सिंह कंषाना के गृह जिले मुरैना में ही सामने आया है।
मुरैना में शहडोल, भिलाई, नागदा से लेकर तेलंगाना तक के तीन हजार से अधिक फर्जी किसानों के खेतों की मिट्टी का परीक्षण कर सोइल हेल्थ कार्ड जारी कर दिए गए हैं। यह फर्जीवाड़ा कृषि विभाग और मिट्टी परीक्षण लैब का संचालन कर रहे लोगों ने मिलकर किया है।
जौरा ब्लॉक की मिट्टी परीक्षण शाला में हुआ घोटाला
मुरैना के जौरा ब्लॉक की मिट्टी परीक्षण शाला में यह घोटाला किया गया है। जहां, मई गांव के किसान अतर सिंह के 0.19 हेक्टेयर खेत से सर्वे नंबर 1051 में 28 मई 2025 को मिट्टी के सैंपल लिए गए। इस मिट्टी की जांच कर 30 सितंबर 2025 को सोइल हेल्थ कार्ड जारी किया गया।
नईदुनिया की पड़ताल में सामने आया है कि मई गांव में अतर सिंह नाम का कोई किसान नहीं। मिट्टी परीक्षण शाला में अतर सिंह के नाम पर जो मोबाइल नंबर दर्ज है, उस पर फोन करने पर तेलंगाना के गदवाल शहर निवासी सुजन कुमार से बात हुई।
नाम किसी और का मोबाइल नंबर किसी और का
इसी तरह मई गांव के ही गोरेलाल नाम के किसान की 0.3 हेक्टेयर खेत से 28 मई 2025 को सर्वे नंबर 411 द्वारा मिट्टी सैंपल लेना बताया गया। 30 सितंबर को सोइल हेल्थ कार्ड जारी हुआ। गोरेलाल के नाम पर जो मोबाइल नंबर दर्ज है, वह शहडोल के पांडानगर निवासी प्रभा दुबे का पाया गया। प्रभा ने बताया कि यह मोबाइल नंबर उनके पिता आरएस दुबे का है, जिनका बीते महीने निधन हो चुका है।
मुरैना में कोई दूर का रिश्तेदार तक नहीं
जौरा ब्लॉक के किसान अमर सिंह के नाम से सोइल हेल्थ कार्ड जारी हुआ है। जौरा की मिट्टी परीक्षण लैब के रिकॉर्ड के अनुसार, अमर सिंह के 0.72 हेक्टेयर खेत से सर्वे क्रमांक 557 ने 28 मई को सैंपल लिए थे।
अमर सिंह के नाम से जो मोबाइल नंबर दर्ज है, उस नंबर पर नागदा जिले की संगीता मालवीय ने फोन उठाया। उन्होंने कहा कि मुरैना में उनकी जमीन तो छोड़िए, कोई दूर का रिश्तेदार तक नहीं है, न ही जीवन में वह कभी मुरैना आई हैं।
3000 से अधिक किसानों के नाम से फर्जी मिट्टी परीक्षण
यह तीन तो केवल उदाहरण मात्र हैं। ऐसे 3000 से अधिक किसानों के नाम से फर्जी मिट्टी परीक्षण किया गया है। जौरा की मिट्टी परीक्षण लैब का ठेका राधिका कोऑपरेटिव प्राइवेट लिमिटेड को दिया गया है, जिसे एक सोइल हेल्थ कार्ड के बदले सरकार से 233 रुपये मिलते हैं और सारा फर्जीवाड़ा इसी राशि के लिए हुआ है। राधिका कोऑपरेटिव ने बीते साल 3042 किसानों के नाम से सोइल हेल्थ कार्ड जारी किए हैं।
जिस खेत में पांव नहीं रखा, वहां से भी सैंपल लेना बताया
जौरा के अलापुर गांव निवासी राकेश यादव का नाम भी मिट्टी की जांच कराने वालों में दर्ज है। मिट्टी परीक्षण शाला के रिकॉर्ड में राकेश यादव की टेस्ट आइडी एससीएच 2025-128-00 दर्ज है।
सर्वेयर का नंबर 1011 बताते हुए 8 मई 2025 को राकेश यादव के 0.187 हेक्टेयर खेत से मिट्टी के सैंपल लेना बताया गया है, लेकिन राकेश यादव का कहना है कि उनके खेत में कोई सर्वेयर नहीं आया और न ही उन्होंने मिट्टी के सैंपल दिए हैं। फिर उनके खेत की मिट्टी का परीक्षण कैसे बता दिया।
किसान फर्जी, लोकेशन ग्वालियर की
केवल किसान, मोबाइल नंबर ही नहीं फसल तक ऐसी बता दी गई हैं, जो मुरैना में होती ही नहीं। कई सोइल हेल्थ कार्ड में समा के चावल (बोनयार्ड बाजरा) जैसी फसल होना बताया। फर्जीवाड़ा इस स्तर का हुआ है कि सोइल हेल्थ कार्ड में जीपीएस लोकेशन में जो खेत जौरा ब्लॉक के सहराना गांव में बताया गया है, उसकी जीपीएस लोकेशन ट्रेस करने पर ग्वालियर जिले की जमीनें आ रही हैं।
एक मोबाइल दो से तीन-तीन लोगों के नाम दर्ज
मिट्टी परीक्षण के रिकॉर्ड में इतना घालमेल है कि एक ही मोबाइल नंबर दो से तीन-तीन लोगों के नाम दर्ज कर दिया गया है। एक ही मोबाइल नंबर सुनीता और दिनेश के नाम पर दर्ज हैं। इसी तरह एक अन्य मोबाइल नंबर किरन और विद्या नाम के दर्ज है और यह बंद है। एक अन्य मोबाइल नंबर तो तीन जगह अखिलेश नाम के किसान के आगे दर्ज है, यह नंबर सेवा में नहीं है।
मैं इस बारे में ज्यादा कुछ नहीं बता सकता, क्योंकि मुझे जौरा में पदस्थ हुए 10 दिन हुए हैं। यह बात सही है कि मिट्टी परीक्षण के लिए सैंपल आरईओ व एईओ ही लाते हैं और लैब में देते हैं। मैं जांच करवाऊंगा कि कब और कैसे गड़बड़ी हुई है। उसके हिसाब से कार्रवाई की जाएगी।
-विजय महोरिया, एसएडीओ, कृषि विभाग जौरा
हम खेतों में मिट्टी के सैंपल लेने नहीं जाते। यह सैंपल कृषि विभाग के एईओ व आरईओ लाकर देते हैं। हम जांच करके ऑनलाइन सोइल हेल्थ कार्ड में जानकारी फीड करते हैं। यह बात सही है कि जांचों का पैसा हमें मिलता है, लेकिन मुझे नहीं पता यह गड़बड़ी हुई है और कैसे हुई है।
-मदन कुमार डंडौतिया, संचालक व लैब टेक्नीशियन, जौरा मिट्टी लैब परीक्षण शाला