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नईदुनिया प्रतिनिधि, मुरैना। राजस्थान के कोटा बांध से चंबल नहर में 18 अक्टूबर से पानी छोड़ना शुरू कर दिया है। यह पानी मुरैना जिले में लगभग सात दिन में पहुंचता है, इस कारण सिंचाई विभाग भी नहरों की सफाई के लिए जुट गया है। कुछ स्थानों पर नहरें साफ हो गईं, कुछ जगहों पर काम ही शुरू नहीं हुआ।
3900 क्यूसेक पानी की मांग
चंबल नहर में पानी आते ही मुरैना, भिंड व श्योपुर में गेंहू की बोवनी शुरू हो जाती है। कोटा बांध से चंबल नहर में पानी छोड़ने के लिए मप्र व राजस्थान के सिंचाई विभाग की बैठक बीते सप्ताह हुई। इसमें मप्र सिंचाई विभाग की ओर से रबी सीजन की फसलों के लिए नहर में 3900 क्यूसेक पानी की मांग रखी।
दरअसल, हर साल मप्र की ओर से 3900 क्यूसेक पानी की मांगा जाता है, लेकिन कोटा सिंचाई विभाग पूरी मात्रा में पानी नहीं देता। इसलिए इस बार पानी की मात्रा पर जोर दिया गया, क्योंकि चंबल अंचल में इस साल बारिश भी औसत से कम हुई है। बैठक में बनी सहमति के बाद रविवार 18 अक्टूबर को कोटा-बैराज के गेट खोल दिए गए और चंबल नहर में पानी छोड़ना शुरू कर दिया।
शुरुआत में 2000 क्यूसेक पाानी छोड़ा जा रहा है। यह पानी श्योपुर, मुरैना और फिर भिंड के अटेर तक पहुंच जाएगा, उसके बाद पानी की मात्रा बढ़ाई जाएगी। सिंचाई विभाग के अनुसार, मुरैना के सुनहरा एंड पर पानी 25 अक्टूबर की दोपहर तक पहुंचेगा।
2.70 लाख हेक्टेयर जमीन होगी सिंचित
चंबल नहर से मुरैना ही नहीं, बल्कि श्योपुर और भिंड जिले भी जमीनें सिंचित होती है। इस नहर के केवल रबी सीजन के लिए ही पानी दिया जाता है। जब तक गेहूं की फसल की सिंचाई चलेगी, तब तक नहर में पानी चलता है। सिंचाई विभाग के अनुसार तीनों जिलों में 2.70 लाख हेक्टेयर जमीन की सिंचाई चंबल नहर से होती है। इसके लिए क्षेत्रवार नहरों का जाल बिछाया गया है।
किसानों की मांग और जरूरत के हिसाब से अलग-अलग क्षेत्रों में अलग-अलग समय पर पानी छोड़ा जाता है। सबलगढ़-कैलारस में नहरे साफ, मुरैना-अंबाह में काम धीमानहरों में पानी आने से पहले ही उनकी सफाई शुरू हो जती है। सबलगढ़ व कैलारस में नहरों की सफाई का काम आधे से ज्यादा हो गया है, जबकि जौरा व मुरैना में अभी तक कई हिस्सों में सफाई नहीं हुई।
नहरों में झाड़ियां व कचरा भरा हुआ है। जौरा क्षेत्र में बागचीनी, सुमावली क्षेत्र की नहरें झाड़ियों व कचरों से पूरी तरह जाम हैं। पिछले साल भी इन नहरों की पूरी सफाई नहीं हुई। किसाानों ने बताया कि नहरों से कचरा नहीं हटा तो टेल एंड के किसानों तक भरपूर पानी नहीं पहुंचेगा। वर्जन- 18 अक्टूबर से कोटा डैम से पानी छोड़ दिया गया है, सुनहरा एंड पर 25 अक्टूबर तक पानी आ जाएगा।
नहरों की सफाई की जा रही है। इस महीने तो मुख्य नहर में ही पानी चलेगा। जब पानी अटेर तक पहुंच जाएगा, उसके बाद मुख्य नहरों से सहायक नहरों में पानी छोड़ना शुरू किया जाएगा। दिनेश रत्नाकर,ईई, सिंचाई विभाग सबलगढ़ संभाग।
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