• Jagran.com
  • Jagran Josh
  • Her Zindagi
  • Onlymyhealth
  • Jagran TV
  • Vishvas News
  • Inextlive
मेरी खबरें
  • होम
  • ताजा खबरें
  • मध्यप्रदेश
  • छत्तीसगढ़
  • उत्तर प्रदेश
  • देश
  • धर्म
  • मनोरंजन
  • राशिफल
  • लाइफस्टाइल
  • अन्य
    • बिज़नेस
    • बड़ी खबरें
    • खेल
    • विदेश
    • करियर
    • टॉपिक्स
    • टेक्नोलॉजी
    • शिक्षा
  • राज्य चुनें
  • ई-पेपर
  • राशिफल
  • राज्य चुनें
  • ई-पेपर
  • फटाफट
  • राशिफल
  • वेब स्टोरीज
नईदुनिया ट्रेंडिंग
  • बढ़ता यूपी
  • समृद्ध उत्तराखंड
  • शारदीय नवरात्रि
  • होम
  • मध्य प्रदेश
  • रायसेन

रायसेन में स्कूल की बिल्डिंग बनी खंडहर, 12 साल से नहीं डली छत; बच्चों के लिए टॉयलेट तक नदारद

रायसेन के सुंड गांव में प्राथमिक स्कूल भवन 12 साल से अधूरा है। बिना छत का यह जर्जर ढांचा खंडहर बन चुका है। यहां शौचालय भी नहीं है, जिससे बच्चों की सुर...और पढ़ें

By Digital DeskEdited By: Anurag Mishra
Publish Date: Wed, 21 Oct 2026 01:14:43 PM (IST)Updated Date: Wed, 21 Oct 2026 02:40:30 PM (IST)
रायसेन में स्कूल की बिल्डिंग बनी खंडहर, 12 साल से नहीं डली छत; बच्चों के लिए टॉयलेट तक नदारद
रायसेन में स्कूल की बिल्डिंग बनी खंडहर। (एआई जनरेटेड)

HighLights

  1. रायसेन के सुंड गांव में 12 साल से स्कूल अधूरा।
  2. दीवारों के बाद आज तक भवन पर नहीं डली छत।
  3. भवन खंडहर में तब्दील, खिड़की और दरवाजे भी हैं गायब।

डिजिटल डेस्क, रायसेन। मध्य प्रदेश के रायसेन जिले में शिक्षा व्यवस्था के सरकारी दावों की जमीनी हकीकत बेहद चौंकाने वाली है। जिला मुख्यालय से चंद किलोमीटर की दूरी पर सांची विकासखंड के एक गांव में प्राथमिक स्कूल का भवन पिछले 12 सालों से अधूरा पड़ा है, जो अब बच्चों के लिए एक खतरनाक खंडहर में बदल चुका है।

12 साल से छत का इंतजार

रायसेन के सांची ब्लॉक के तहत आने वाले सुंड गांव के प्राथमिक स्कूल की हालत बदतर है। यहां बच्चों के लिए एक अतिरिक्त स्कूल भवन की मंजूरी करीब 12 साल पहले दी गई थी। निर्माण कार्य शुरू हुआ और दीवारें भी खड़ी कर दी गईं, लेकिन एक दशक से ज्यादा का समय बीत जाने के बाद भी आज तक इस भवन पर छत नहीं डाली जा सकी है।


हादसे को न्योता देता जर्जर ढांचा

लंबे समय से अधूरा पड़ा यह भवन अब पूरी तरह से खंडहर का रूप ले चुका है। हालात ऐसे हैं कि इमारत के खिड़की और दरवाजे तक गायब हो चुके हैं। इसके अलावा, स्कूल में टॉयलेट (शौचालय) जैसी सबसे बुनियादी सुविधा का भी घोर अभाव है। यह जर्जर और कमजोर ढांचा हर दिन यहां पढ़ने आने वाले छोटे बच्चों के लिए एक बड़ा खतरा बना हुआ है।

यह भी पढ़ें- ग्वालियर में एजी पुल की मरम्मत अटकी, 4 बार टेंडर के बाद भी नहीं मिला ठेकेदार; PWD की सख्त शर्तें बनीं रोड़ा

मुख्यालय के पास ये हाल, तो दूर-दराज का क्या?

सिस्टम की लापरवाही का सबसे बड़ा उदाहरण यह है कि बदहाली का शिकार यह स्कूल रायसेन जिला मुख्यालय से महज 8 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है। जब मुख्य शहर के इतने करीब शिक्षा के बुनियादी ढांचे का यह बुरा हाल है, तो आसानी से समझा जा सकता है कि जिले के सुदूर ग्रामीण इलाकों में सरकारी स्कूलों की स्थिति कितनी दयनीय होगी।

यह भी पढ़ें- झांसी स्टेशन पर ट्रेन से 2.55 करोड़ रुपये की चांदी बरामद, शिवपुरी के अमोला का युवक 133 किलो आभूषणों के साथ गिरफ्तार