
नईदुनिया प्रतिनिधि, रीवा। जिले से भ्रष्टाचार और सरकारी संसाधनों के दुरुपयोग का एक गंभीर मामला सामने आया है। "रखवाला ही निकला चोर" वाली कहावत को चरितार्थ करते हुए, सेवा सहकारी समिति परसिया के समिति प्रबंधक पर अपने ही भाई के साथ मिलकर धान के अवैध भंडारण का आरोप लगा है। इस मामले में प्रशासनिक सख्ती के बाद अब पुलिस ने एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। पूरा मामला जनेह थाना क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले चंद्रपुर गांव का है।
प्रशासन को गुप्त सूचना मिली थी कि सरकारी धान को अवैध रूप से एक निजी फार्म हाउस में छिपाकर रखा गया है। सूचना के आधार पर त्योंथर एसडीएम, नायब तहसीलदार और अन्य राजस्व अधिकारियों की टीम ने फार्म हाउस पर दबिश दी। छापेमारी के दौरान अधिकारी तब दंग रह गए जब फार्म हाउस के भीतर 977 बोरी धान का अवैध भंडारण पाया गया। सबसे चौंकाने वाली बात यह थी कि यह धान उन सरकारी बारदानों में भरा हुआ था, जो केवल समर्थन मूल्य पर सरकारी खरीदी के लिए आवंटित किए जाते हैं। इससे स्पष्ट संकेत मिले कि इस धान को अवैध तरीके से सरकारी कोटे में खपाने की तैयारी की जा रही थी।
कार्रवाई के दौरान मुख्य आरोपी समिति प्रबंधक शैलेंद्र तिवारी और उनका भाई प्रदीप तिवारी मौके से फरार मिले। हालांकि, उनका एक अन्य भाई ज्ञानेंद्र तिवारी वहां मौजूद था, जो धान के स्वामित्व से संबंधित कोई भी वैध दस्तावेज पेश नहीं कर सका। कलेक्टर प्रतिभा पाल ने समीक्षा बैठक के दौरान इस मामले में ढिलाई बरतने वाले अधिकारियों पर कड़ी नाराजगी व्यक्त की। उन्होंने खाद्य नियंत्रक को तत्काल प्रभाव से एफआईआर दर्ज कराने के निर्देश दिए। कलेक्टर ने स्पष्ट किया कि जिले की सीमाएं अन्य राज्यों से सटी होने के कारण व्यापारियों द्वारा अवैध धान खपाने की संभावना बनी रहती है, जिसे रोकने के लिए प्रशासन पूरी तरह सतर्क है।
कलेक्टर के कड़े रुख के बाद कनिष्ठ आपूर्ति अधिकारी विनीत मिश्रा ने जनेह थाने में शिकायत दर्ज कराई। पुलिस ने समिति प्रबंधक शैलेंद्र तिवारी और उनके भाई प्रदीप तिवारी के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता की संबंधित धाराओं के तहत मामला दर्ज कर लिया है। शैलेंद्र तिवारी को समिति प्रबंधक के पद से हटा दिया गया है। परसिया स्थित विवादित खरीदी केंद्र को बंद करने का निर्णय लिया गया है। आस-पास के अन्य केंद्रों पर किसानों के लिए स्लॉट बुकिंग की वैकल्पिक व्यवस्था की गई है।
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कलेक्टर प्रतिभा पाल ने बताया कि रीवा जिले में धान उपार्जन का लक्ष्य लगभग 3.70 लाख मीट्रिक टन है, जिसमें से 90% से अधिक लगभग 3.42 लाख मीट्रिक टन खरीदी पूरी हो चुकी है। उन्होंने सभी नोडल अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि उपार्जन के अंतिम 10-15 दिनों में विशेष निगरानी रखी जाए, क्योंकि इसी दौरान गड़बड़ी की संभावनाएं सबसे अधिक होती हैं। प्रशासन अब जिले के अन्य केंद्रों, जैसे चाकघाट विपणन समिति, की भी जांच कर रहा है ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि कहीं और भी इस प्रकार की अनियमितताएं तो नहीं हो रही हैं। पुलिस फिलहाल फरार आरोपियों की तलाश कर रही है।